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आक्रोश में आदिवासी:आदिवासियों ने डीएफओ कार्यालय घेरा कलेक्टर परिसर में दो घंटे दिया धरना

खंडवा15 दिन पहले
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  • रोहणी के बीट क्रमांक 12 के जंगल से बेदखल किए जाने का विरोध
  • बोले- सरकार और प्रशासन कानून का पालन करें, नहीं तो हम सिखाएंगे

जंगल से बेदखल किए जाने के विरोध में आदिवासियों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय पर डीएफओ कार्यालय का घेराव कर कलेक्टोरेट परिसर में धरना प्रदर्शन किया। सुबह 11 बजे स्टेडियम में एकत्र होने के बाद वन विभाग के परिसर में डीएफओ चरणसिंह के कार्यालय के बाहर आदिवासियों ने संबोधित किया। वन विभाग के अफसरों को चुनौती दी कि आपने कानून के खिलाफ जाकर आदिवासियों के घरों पर हमला कर गृहस्थी का सामान भीड़ से लुटवाया है। आपने जो किया वह शासकीय कार्य नहीं, बल्कि लूट और डकैती है। रोहणी में खेती कर रहे आदिवासियों को वन अधिकार कानून के तहत नहीं हटाया।

40 से ज्यादा परिवारों के घरों को तोड़कर खेतों में खड़ी फसल को नष्ट कर दिया। खेतों में दवा छींटकर जमीन को जहरीला बना दिया है। टप्परों में रहे लोगों के घरों का 130 क्विंटल अनाज, 63 हजार रुपए नकद, पैसे, जेवर, 4 साइकिल, 5 मोबाइल, मुर्गा-मुर्गियां, बकरी व पशु चोरी किए हैं। 6 लोगों को बंधक बनाकर उनका अपहरण किया।

प्रदर्शन के लिए खंडवा जिले के गुड़ी, रोहणी, जामनिया, बुरहानपुर के नेपानगर व खरगोन-बड़वानी के सैकड़ों आदिवासी परिवार सहित खंडवा आए थे। सभी वक्ताओं ने एक ही बात कही कि वन अधिकार अधिनियम 2006 का उल्लंघन किया है। वक्ताओं ने कहा सरकार और प्रशासन को कानून का पालन करें, नहीं तो हम सिखाएंगे। सुबह 11 बजे शुरू हुआ प्रदर्शन शाम 4 बजे समाप्त हुआ।

चरणसिंह, दम है तो बाहर निकलो, नहीं तो हम आते हैं

वन विकास निगम उत्पादन डीएफओ चरणसिंह के कार्यालय के बाहर बैठकर आदिवासियों ने एक घंटे तक भाषणबाजी की। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि चरण सिंह बाहर निकलो। उस दिन तो हमारे गिनती के साथी थे, जिन्हें तुम उठाकर ले आए थे। जामनिया गांव में गुंडागर्दी की थी, अब बाहर निकलकर बताओ, दम है तो बाहर आओ, नहीं तो हम अंदर आते हैं।

हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है

आदिवासी जागृत संगठन की माधुरी बेन ने कहा वन अधिकार दावे की पूरी प्रक्रिया पूरी होने तक किसी को बेदखल नहीं किया जा सकता है। अगर सरकार खुद कानून तोड़ने लग जाए तो हमारा क्या होगा। जिस सरकार से हम उम्मीद करते हैं कि वो कानून का पालन करेगा, वही सरकार उसे तोड़ने लग गई। मप्र हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना हुई है। हम हाईकोर्ट में गए हैं। जिला प्रशासन पर अवमानना का केस लगाया है।

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