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नवरात्रि उत्सव:सैनिटाइज होकर पंडाल में जा सकेंगे, पांच मिनट में करना होंगे दर्शन, लिफाफे में मिलेगा प्रसाद

खंडवा3 दिन पहले
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  • 25 फीट ऊंचाई की दुर्गा व काली मां की प्रतिमाओं की स्थापना नहीं होगी, छोटे होंगे पांडाल

नवरात्रि पर इस बार दो फीट तक की ही देवी प्रतिमाओं की स्थापना हाे सकेगी। न दो हजार स्क्वेयर फीट तक के पंडाल नजर आएंगे न 25 से 30 फीट तक की दुर्गा व काली मां की प्रतिमाएं। जिन पंडालों के बाहर दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं की कतार होती थी वहां अब केवल 100 दर्शनार्थी ही दिखाई देंगे। यहां श्रद्धालु स्थायी व चलित झांकियों को भी नहीं देख पाएंगे। इसका कारण है काेराेना अाैर इसकी गाइडलाइन। नवरात्रि पर हर साल शहर में तीन से चार बड़े पंडाल और झांकियांे की तैयारी नवरात्रि के 2 से 3 महीने पहले शुरू हो जाती थी। पिछले 20-22 साल से देवी की भव्य प्रतिमाएं, पंडाल, चलित व स्थायी झांकियाें की स्थापना करने वाली समितियों के सदस्य वैसी ही परंपरा निभाने के लिए इस साल भी तैयार है, लेकिन कोविड-19 के चलते उन्होंने भी पर्व को सीमित करने व शासन के नियमों का पालन करते हुए मनाने का निर्णय लिया है। माता चौक जेपीबी क्लब के सदस्य गोलू सैनी ने बताया वैसे तो देवी मां की स्थापना वर्षों से हो रही है, लेकिन क्लब के सदस्य पिछले 21 साल से बड़ी प्रतिमा, भव्य पंडाल व आकर्षक झांकियों का निर्माण करते आ रहे हैं। हर साल नवरात्रि पर 2 हजार स्क्वेयर फीट जगह पर 25 फीट की देवी प्रतिमा के साथ आकर्षक स्थायी व चलित झांकियां भी बनती आ रही हैं। जिनके निर्माण के लिए कोलकाता, मुंबई, इंदौर व खंडवा के 60 से अधिक कलाकार 4 महीने पहले से जुट जाते थे, लेकिन इस साल परंपरा निभाते हुए छोटी प्रतिमा स्थापित करेंगे। सदस्य सुभाष सैनी ने बताया नवरात्रि के 9 दिन तक देवी दर्शन व झांकी देखने 50 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते थे। इस साल छोटी मूर्ति ही स्थापित होगी, इसलिए 10 कारीगर ही बंगाल से पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया देवी दर्शन व झांकी देखने के पहले श्रद्धालुओं को फव्वारे से सैनिटाइज करेंगे। सीलबंद पैकेट में सूखा प्रसाद बांटा जाएगा।

सियाराम चौक नवदुर्गा उत्सव : काली मां का स्वरूप भी छोटा होगा, ड्रायफ्रूट होगा प्रसाद
सियाराम चौक नवदुर्गा उत्सव समिति के पिंटू दरबार ने बताया शासन की नई गाइडलाइन के अनुसार देवी मां की स्थापना घर पर संभव नहीं है। क्षेत्र में 12 साल से देवी माता की स्थापना व पिछले 6 साल से 25 फीट तक की काली माता की स्थापना विधि विधान से कर रहे हैं। हर साल आयोजन पर 4 लाख रु. तक का खर्च आता है। हर साल चार महीने पहले कोलकाता से मूर्तिकार आकर निर्माण शुरू कर देते थे। अब छोटी व मिट्‌टी की मूर्ति का निर्माण प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार ही करेंगे। काली माता को ड्रायफ्रूट का प्रसाद चढ़ाया जाएगा। पिंटू ने बताया हर साल भव्य पंडाल में एक हजार श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था होती थी, इस साल 100 श्रद्धालुआें की ही व्यवस्था रहेगी वह भी सोशल डिस्टेंसिंग के साथ।
मूर्ति निर्माण से हर महीने होती थी 20 हजार रु. की कमाई, अब रोजी-रोटी का संकट
काेलकाता के मूर्तिकार मृत्युंजय पाल ने बताया खंडवा में हर साल करीब 100 मूर्तिकार अलग-अलग स्थानों पर मूर्ति निर्माण के लिए 6 महीने पहले पहुंच जाते थे। हर कलाकार करीब 20 हजार रु. महीने तक कमा लेता था, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण के चलते दो से पांच फीट की ही प्रतिमाएं बनेंगी, इसलिए एक महीने पहले पहुंचेंगे। खंडवा के कुछ मंडलों ने छोटी मूर्तियों के ऑर्डर दिए हैं, इसलिए गिनती के 8 कलाकार ही वहां पहुंचेंगे। उन्होंने बताया अभी तक बड़ी मूर्तियों के ऑर्डर भी नहीं मिले हैं। मृत्युंजय ने बताया छह महीने की कमाई से ही बंगाली मूर्तिकारों के परिवार का गुजर बसर होता है।

एक नजर इधर भी... शहर में कहां होती है भव्य प्रतिमाओं की स्थापना, बड़े दुर्गा पंडाल
खंडवा में आमतौर पर माता चौक, सियाराम चौक, इंदिरा चौक व सिंधी कालोनी में बड़े पंडाल व झांकियां होती हैं।
इनमें माता चौक, सियाराम चौक की झांकियां व पांडाल प्रमुख हैं जिन पर 4 से 10 लाख रु. हर साल 9 दिन में खर्च होते हैं।
इस बार यह बड़े दुर्गा पंडाल, झांकियां नहीं दिखाई देंगी, केवल देवी स्थापना होगी। झांकियां नहीं बनेंगी।
पिछले साल 20 से 25 फीट की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं, इस साल प्रतिमाएं दो से पांच फीट की हाेंगी।
जिला प्रशासन से अनुमति मिलती है तो एक बार में अधिक से अधिक पांच लोगों को सोशल डिस्टेंस के साथ दर्शन कराएंगे।
चलित व स्थायी झांकियां नहीं होने से दर्शन का समय पांच मिनट तक का होगा।
दुर्गा उत्सव समितियां कोविड-19 के सारे नियमाें का पालन करेंगी।
दर्शन से पहले श्रद्धालुओं को शॉवर से सैनिटाइज किया जाएगा।
इस साल श्रद्धालुओं को सूखा प्रसाद वह भी लिफाफे में दिया जाएगा।
हर साल पंडाल व झांकियां बनाने के लिए कोलकाता, मुंबई, इंदौर व खंडवा के 60 से अधिक कारीगर आते थे। इस बार केवल करीब 12 मूर्तिकार ही छोटी मूर्तियां बनाने ही पहुंचेंगे।

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