आफत की बारिश:अब भीगी कपास व सोयाबीन फसलों को सुखाने में जुटे किसान ताकि भाव अच्छे मिले

निंबोलाएक महीने पहले
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  • शनिवार-रविवार हुई बारिश से फसलों को हुआ नुकसान, उत्पादन प्रभावित होने का अंदेशा, फसलें निकालने व सुखाने के लिए किसानों को नहीं मिल रहे मजदूर, परिवार के साथ खेतों में जुटे

|शनिवार रात और रविवार दिनभर चली बारिश से जिलेभर में फसलें प्रभावित हुई हैं। फिलहाल खेतों में कपास सहित मक्का, ज्वार और सोयाबीन सहित अन्य फसलें पूरी तरह पककर तैयार हैं। मानसून विदा होने के बाद हुई बेमौसम बारिश ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी तैयार फसलें भीगने से इनका उत्पादन कम होने का अंदेशा है।

इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है उत्पादन प्रभावित हुआ तो बड़ा नुकसान होगा। अब मौसम खुलने के बाद किसान बारिश में भीगी कपास सहित अन्य फसलों को धूप में सूखा रहे हैं। उनका कहना है इससे कुछ हद तक तो नुकसान कम होगा।

दो दिन की बारिश के बाद दो दिन से मौसम खुला होने के कारण खेतों में चहल-पहल बढ़ गई है। किसान ज्यादा से ज्यादा मजदूर लगाकर फसल निकालने और इसे धूप में सुखाने में जुटे हैं। कपास सहित अन्य फसलों को खेत, खलिहान और घर की छत और आंगन में सुखाया जा रहा है।

खेतों में काम बढ़ने के कारण कई किसानों को मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें परिवार सहित खेतों में फसल निकालना और इसे सुखाना पड़ रहा है। इस काम में किसानों के परिवार की महिलाएं और बच्चे भी जुटे हुए हैं।

बारिश से कई खेतों में झड़ गए ज्वार और सोयाबीन के दाने

निंबोला क्षेत्र में पांच हजार एकड़ में कपास फसल लगाई गई है। इसमें खरीफ की कपास तीन हजार एकड़ और मई में लगाई गई कपास दो हजार एकड़ में है। इसके अलावा तीन हजार एकड़ में ज्वार, 1500 एकड़ में सोयाबीन और दो हजार एकड़ में मक्का फसल लगाई गई है। खेतों से करीब 50 प्रतिशत फसलें निकल चुकी हैं।

50 प्रतिशत फसल निकालना बाकी है। इस बीच हुई बारिश ने किसानों को परेशानी में डाल दिया। बारिश के कारण ज्वार और सोयाबीन के दाने झड़ गए। मौसम खुलने के बाद उन्होंने राहत महसूस की है। अब वे फसलों की देखरेख में जुटे हैं। फसल को भीगने से बचाने के लिए कई किसानों ने इसे खेत में तिरपाल से ढंककर रखा है। अच्छी धूप खिलने और फसलें सूखने के बाद वे थ्रेशर मशीन लगाकर उपज निकालेंगे।

कपास चुन कर धूप में सूखा रहे, खराब न हो

सोमवार और मंगलवार को किसान खेतों में पहुंचकर कपास चुनने में जुटे हैं। किसानों ने कहा दो-तीन दिन और इसी तरह बारिश होती तो फसलें बुरी तरह प्रभावित होती और इससे उत्पादन पर असर पड़ने से बड़ा नुकसान होता। पहले दिन सोमवार को चुनाई के दौरान गीला कपास निकला। इसे किसानों ने धूप में सुखाया है। मंगलवार कुछ हद तक सूखा कपास निकला। किसानों ने कहा दीपावली तक कपास सहित अन्य फसलें निकालने के बाद रबी फसलों के लिए खेत तैयार करेंगे।

गांव पहुंच कपास खरीदी रहे व्यापारी और बिचौलिए

​​​​​​​मंडी सहित सीसीआई द्वारा कपास खरीदी शुरू नहीं करने का फायदा कुछ व्यापारी और बिचौलिए उठा रहे हैं। वे सीधे गांवों में पहुंचकर किसानों से कम भाव पर कपास खरीद रहे हैं। इससे उन्हें अच्छा-खासा मुनाफा मिल रहा है। किसानों ने बताया व्यापारी और बिचौलिए भीगी हुई कपास की चार से साढ़े पांच हजार रुपए प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी कर रहे हैं। वहीं अच्छी और सूखी कपास के छह से सात हजार रुपए तक भाव मिल रहे हैं। दीपावली तक कपास फसल के अच्छे भाव मिलने की उम्मीद है।

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