नुकसान / भावांतर योजना में शुरू नहीं हुई खरीदी, हर हफ्ते सड़ रहा 4-5 क्विंटल प्याज, फेंक रहे किसान

Purchases not started in Bhavantar Yojana, 4-5 quintal onions rotting every week, farmers throwing away
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Purchases not started in Bhavantar Yojana, 4-5 quintal onions rotting every week, farmers throwing away

  • लॉकडाउन के कारण इस साल योजना के तहत शुरू नहीं हुई खरीदी
  • खेत, गोडाउन और मकानों में रखा प्याज गर्मी से हो रहा खराब

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

निंबोला. कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन और शहर में जारी कर्फ्यू के कारण इस साल भावांतर योजना के तहत प्याज की खरीदी नहीं हो पाई है। इस कारण किसान उपज नहीं बेच पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेत, गोडाउन और मकानों में रखा प्याज बढ़ती गर्मी के कारण सड़ रहा है। हालात यह हैं कि हर हफ्ते किसान करीब चार से पांच क्विंटल प्याज खराब होने पर फेंक रहे हैं। किसानों ने कहा- मेहनत से पैदा की गई उपज को मजबूरी में इस तरह फेंकना पड़ रहा है। शासन-प्रशासन को भावांतर योजना में प्याज की खरीदी शुरू करना चाहिए।
उपज निकलने के बाद किसानों ने मकान और खेतों में प्याज रख रखा है। जगह नहीं होने पर कई किसानों ने किराए से गोडाउन लेकर यहां प्याज रखा है। लेकिन लॉकडाउन के कारण वे मंडी और अन्य कहीं उपज नहीं बेच पा रहे हैं। ऊपर से गर्मी के कारण प्याज सड़ रहा है। ऐसे में किसानों को दोगुना नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने बताया पिछले साल मई में भावांतर योजना के तहत मंडी में प्याज की खरीदी शुरू की गई थी। लेकिन इस बार अब तक कुछ नहीं हो सका है। लॉकडाउन के कारण व्यापारी भी प्याज नहीं खरीद रहे हैं। जो खरीद रहे हैं, वो भी मनमानी कर किसानों को काफी कम भाव दे रहे हैं। खराब होती उपज को देख कई किसान मजबूरी में सस्ते दाम पर ही प्याज बेच रहे हैं। ऐसे में उनकी लागत भी नहीं निकल पा रही है।
पिछले साल मिला था 900 से 1200 रुपए तक भाव
किसान बबलू चौधरी, भास्कर चौधरी और सुभाष महाजन ने बताया पिछले साल भावांतर योजना में प्याज का 900 से 1200 रुपए तक भाव मिला था। लेकिन इस साल खरीदी शुरू नहीं होने के कारण प्याज खराब हो रहा है। बढ़ती गर्मी के बीच रोजाना प्याज की सफाई करना पड़ रही है। ऐसे में हर हफ्ते चार से पांच क्विंटल सड़ा हुआ प्याज फेंकना पड़ रहा है। पिछले साल क्षेत्र मेें 500 एकड़ में प्याज लगाया गया था। दशहरे-दीवाली पर 80 से 100 रुपए किलो तक प्याज बिका। इसको देखते हुए किसानों ने इस साल रकबा दोगुना बढ़ाकर एक हजार एकड़ में प्याज लगाया। लेकिन कोरोना महामारी के बीच लागू लॉकडाउन ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं। किसानों ने भावांतर योजना में प्याज खरीदने की मांग की है।

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