खेती / कपास की बोवनी शुरू, भाव कम मिलने से घटा रकबा, पिछले साल की अपेक्षा आधे से भी कम

Sowing of cotton starts, area reduced due to lower prices, less than half of last year
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Sowing of cotton starts, area reduced due to lower prices, less than half of last year

  • निंबोला क्षेत्र में पिछले साल ढाई हजार एकड़ में लगा था गर्मी का कपास
  • किसान बोले- खरीफ के कपास का रकबा भी होगा कम, क्योंकि भाव नहीं मिल रहे

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

निंबोला. निंबोला क्षेत्र में करीब एक हफ्ते से गर्मी के कपास की बोवनी की जा रही है, लेकिन इस साल इसका रकबा पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम हो गया है। इसके पीछे किसान पिछले साल अच्छे भाव नहीं मिलना कारण बता रहे हैं। किसानों ने कहा गर्मी के कपास के साथ ही खरीफ की बोवनी में भी इस साल कपास का रकबा घटेगा। क्योंकि ठीक भाव नहीं मिलने के कारण किसानों का रूझान कपास की ओर से कम हुआ है।
निंबोला क्षेत्र में पिछले साल गर्मी के कपास की बोवनी करीब ढाई हजार से अधिक एकड़ में की गई थी, लेकिन इस साल एक हजार एकड़ में ही इसकी बोवनी की उम्मीद जताई जा रही है। पिछले साल क्षेत्र में खरीफ के कपास की बोवनी तीन हजार एकड़ में की गई थी। इस साल सिर्फ दो हजार एकड़ में बोवनी करने की बात कही जा रही है। किसानों ने बताया पिछले साल कपास के सिर्फ 4500 से 5400 रुपए भाव मिले थे। जबकि भाव करीब सात हजार रुपए प्रति क्विंटल तक मिलना चाहिए। भाव कम मिलने के कारण ही इस साल कपास का रकबा घटा है।
तकरीबन हर खेत में घटेगा रकबा, किसान बोले- कौन सहेगा नुकसान
क्षेत्र के किसान विनोद भावसेकर ने पिछले साल 12 एकड़ में गर्मी के कपास की बोवनी की थी। इस साल आठ एकड़ में ही लगा रहे हैं। अजय पंवार ने पिछले साल चार एकड़ में बोवनी की थी। इस साल दो एकड़ में ही कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य किसान भी इस साल गर्मी के कपास की कम ही बोवनी करने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है- लॉकडाउन लागू है।यह कब खुलेगा, पता नहीं। ऐसे में उपज नहीं बिक पाएगी। इस तरह नुकसान कौन सहेगा।
खरीफ सीजन में ज्यादा बोएंगे ज्वार और सोयाबीन
निंबोला सहित क्षेत्र के मगरूल, बसाड़, नसीराबाद, बोरी, चुलखान, झांझर, झिरी और अन्य गांवों में खेत तैयार कर किसान गर्मी के कपास की बोवनी कर रहे हैं। हालांकि वे ही किसान गर्मी का कपास लगा रहे हैं, जिनके पास सिंचाई के लिए जलस्रोत हैं। वे ड्रीप के माध्यम से सिंचाई करेंगे। क्षेत्र में हर साल करीब एक हजार किसान गर्मी का कपास लगाते हैं, लेकिन इस साल 500 किसान ही इसकी बोवनी करेंगे। वहीं खरीफ का कपास भी एक हजार ही किसान लगाएंगे। हर साल करीब दो हजार से अधिक किसान इसकी बोवनी करते थे। किसानों ने बताया गर्मी के कपास की बोवनी 31 मई तक चलेगी। मानसून समय पर आया तो 15 जून से खरीफ की बोवनी शुरू करेंगे।

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