गहरे पानी में डूबा बालक:गुलाबाई विसर्जन करने आया बालक ताप्ती में डूबा

निंबोला2 महीने पहले
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होमगार्ड टीम और गोताखोरों ने नदी के दोनों ओर एक-एक किमी तक विशाल को तलाशा। - Dainik Bhaskar
होमगार्ड टीम और गोताखोरों ने नदी के दोनों ओर एक-एक किमी तक विशाल को तलाशा।
  • बसाड़ के पास की घटना, 20 गोताखोरों ने तलाशा, शाम तक नहीं चला पता

गुलाबाई विसर्जन के लिए ताप्ती नदी पहुंचा बालक गहरे पानी में डूब गया। साथ गए बच्चों ने शोर मचाया तो बालक को बचाने गांव के एक युवक ने नदी में छलांग लगा दी। बालक का हाथ भी उसकी पकड़ में आया लेकिन हाथ फिसलने से बालक गहरे पानी में समा गया।

हादसे की खबर लगते ही परिजन, ग्रामीण, निंबोला थाना पुलिस व होमगार्ड जवान पहुंचे। दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक बालक को तलाशा लेकिन कहीं पता नहीं चला।बसाड़ निवासी 12 वर्षीय विशाल पिता संतोष वर्मा गांव के रजत प्रताप वर्मा व लल्ला सहित 5-6 बच्चों के साथ बुधवार सुबह गुलाबाई विसर्जन के लिए ताप्ती नदी पहुंचा था।

विसर्जन के बाद बच्चे नदी में नहाने लगे। विशाल 20 फीट गहरे पानी में डूबने लगा। उसे बचाने के लिए साथ गए बच्चों ने शोर मचाया। पास ही मकान की सफाई कर रहे उमेश वर्मा ने आवाज सुनी और दौड़कर नदी पर पहुंचा। उसने नदी में छलांग लगा दी। विशाल का हाथ उसकी पकड़ में आया लेकिन फिसलने से विशाल डूब गया।

नदी किनारे शाम तक बैठे रहे परिजन और ग्रामीण

सूचना मिलने पर दोपहर 12 बजे निंबोला थाने से पुलिस oव बुरहानपुर से बोट के साथ होमगार्ड जवान भी पहुंचे। उन्होंने बोट से विशाल को नदी में दोनों तरफ एक-एक किमी तक ढूंढा लेकिन कहीं पता नहीं चला। बचाव दल शाम 5 बजे दूसरे दिन आने का बोलकर लौट गया लेकिन परिजन और ग्रामीण देरशाम तक नदी के किनारे ही बैठे रहे। दल ने कहा कि गुरुवार सुबह से तलाश शुरू कर विशाल को बुरहानपुर तक भी ढूंढेंगे।

दो बहनों का इकलौता भाई है विशाल

विशाल गांव के ही स्कूल में कक्षा 6ठीं का छात्र है। पिता संतोष वर्मा का गांव में टेंट हाउस का कारोबार है। मां गायत्री गृहिणी हैं। विशाल के चचेरे भाई रितेश ने बताया उसकी बड़ी बहनों शालिनी और वैशाली का विशाल इकलौता भाई है। हादसे के बाद से परिजन बदहवास और ग्रामीण गमगीन हैं।

10 साल में 15 लोग डूबे

यहां ताप्ती नदी किनारे बसाड़, लिंगा, नसीराबाद व उमरदा गांव हैं। नदी में गणेश प्रतिमा, दुर्गा प्रतिमा विसर्जन व ग्रामीण अंत्येष्टि भी करते हैं। बसाड़ के सरपंच ज्ञानेश्वर पाटील ने बताया यहां 10 साल में 15 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है लेकिन घाटों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।

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