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श्री राजराजेश्वरी मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा:शिखर प्राण प्रतिष्ठा, महापूजा, पूर्णाहुति, महानैवेद्य, प्रसाद वितरण के साथ होगा आयोजन, अध्यक्ष हिंदुजा बोले- मंदिर ने आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बनाई पहचान

ओंकारेश्वर11 दिन पहले
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नर्मदा किनारे स्थित खेड़ीघाट पर प्राचीन श्री राजराजेश्वरी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के तीन दिवसीय आयोजन के तहत रविवार को प्रतिमाओं की स्थापना की जाएगी। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के मुख्य दिवस 8 मई को विशेष रूप से महामंडलेश्वर उत्तम स्वामी महाराज बांसवाड़ा राजस्थान, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारणी के सदस्य सुरेश सोनी मौजूद रहेंगे।

यह प्राण प्रतिष्ठा महोस्त्सव काशी के प्रसिद्ध वैदिकाचार्य पूज्य लक्ष्मीकांत दीक्षित के मार्गदर्शन में संपन्न होगा। आयोजन समिति के सदस्य कैलाश आवले ने इस मंदिर से जुड़े इतिहास के बारे में बताया कि इस मंदिर की स्थापना 1930 में पंडित भालचंद शास्त्री ने की थी। जिसे श्री राजराजेश्वरी माता त्रिपुर सुंदरी को यहां की मुख्य अधिकारी चतुर्भुज के रूप में विधमान किया था।

रविवार को देवता प्रबोधन, शिखर प्राण प्रतिष्ठा, महापूजा, पूर्णाहुति, महानैवेद्य, प्रसाद वितरण के साथ आयोजन संपन्न होगा। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति इंदौर के अध्यक्ष ईश्वरदास हिंदुजा मंत्री राकेश कुमार यादव के निर्देशन में समिति के कमलेश शर्मा, राजेंद्र साद, उदय सिंह चौहान सहित अन्य सदस्य आयोजन की तैयारी में लगे है।

समिति के अध्यक्ष ईश्वरदास हिंदुजा ने बताया कि शास्त्री जी द्वारा स्थापित इस मंदिर का 43 वर्ष बाद नवनिर्माण करवा कर यहां की प्रतिमा की पुनः स्थापन का कार्य किया गया। साथ ही यहां पर विभिन्न मंदिर और आध्यात्मिक केंद्र बने हुए हैं।

जिनका इतिहास और उनकी सत्यता आज भी नागरिकों के मन में अपनी स्मृति बनाए हुए है। वहीं आयोजन को लेकर मंदिर क्षेत्र में भव्य तैयारियां की जा रही है। यहां पर मध्य प्रदेश महाराष्ट्र करीब 20 हजार से अधिक श्रद्धालु आयोजन में शामिल होकर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएंगे। यज्ञ पूर्णाहुति के बाद महानैवैद्य का वितरण श्रद्धालुओं को किया जाएगा।

व्यापारी ने अचानक दिया दान

अमरावती के एक व्यापारी ने इंदौर जाने के दौरान राजराजेश्वरी मंदिर में रुक कर अचानक 75 किलो चावल भेंट किए। व्यापारी राजेंद्र रघुवंशी ने बताया कि वह अमरावती से चावल के साथ इंदौर जाने के लिए निकले थे। मोरटक्का स्थित राजराजेश्वरी मंदिर के सामने से गुजरने के दौरान यहां चल रहे आयोजन का स्वागत गेट देखा और अनायास ही मंदिर में चले आए। जबकि यहां पर सभी लोग अपरिचित थे।

वहीं जिस समय मंदिर में अन्नाधीवास की पूजन विधि संपन्न करवाई जा रही थी। उस दौरान वहां पर चावलों की कमी देखी गई। जब मैंने आयोजन समिति से चावल भेंट करने का अनुरोध किया। तो वहां आवश्यकता के अनुसार 75 किलो चावल लग रहे थे, जो मेरे वाहन में ही रखे थे।

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