लॉकडाउन का असर / प्रकृति को साक्षी माना और एक-दूसरे को फूलमाला पहनाकर किया विवाह

Witnessed nature and married each other by wearing a flower
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Witnessed nature and married each other by wearing a flower

  • न घोड़ी न बरात, पंडित और मंत्र भी नहीं, माता-पिता से लिया आशीर्वाद

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

पलसूद. लॉकडाउन के दौरान वैसे तो कई शादियां बिना घोड़ी व बरात के हुई हैं लेकिन एक विवाह ऐसा भी हुआ है। जो सबसे अलग है। इसमें वर-वधु ने प्रकृति को साक्षी मानकर एक-दूसरे के गले में फूलमाला पहनाकर विवाह किया और माता-पिता से आशीर्वाद लेकर नया जीवन शुरू किया। इस शादी में न घोड़ी थी, न बाराती थे। यहां तक कि पंडित तक शामिल नहीं हुए न ही मंत्र का जाप हुआ। प्रकृति को साक्षी मानकर ही दोनों से एक-दूसरे का सुख-दुख में साथ निभाने का संकल्प लिया और फूलमाला पहनाई।
जय भीम सेवा समिति के उपाध्यक्ष प्यारेलाल कनोजे ने अपनी प्रेम संगनी इबा कनोजे के साथ प्रकृति को साक्षी मानकर विवाह किया है। दोनों ने एक साथ जीवन जीने और एक-दूसरे का सुख-दुःख में साथ निभाने का संकल्प भी लिया है। प्यारेलाल कनोजे ने बताया कि उनकी सगाई एक साल पहले ग्राम सीदड़ी की युवती इबा से हुई थी। जिनका विवाह आदिवासी रीति-रिवाज अनुसार आखातीज पर होना था लेकिन कोरोना जैसी महामारी के कारण लॉकडाउन लगने से इनका विवाह नहीं हो पाया था। फिर दोनों ने प्रकृति को साक्षी मानकर विवाह करने का निर्णय लिया और शुक्रवार को एक-दूसरे को पुष्पमाला पहनाकर व एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर विवाह कर लिया। इसके बाद अपने माता-पिता से आशीर्वाद लिया। दोस्तों व परिवारजनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से बधाई दी।

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