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कोरोना काल:लॉकडाउन में घरों पर रहकर बच्चे निखार रहे अपना हुनर, दीवारों पर कर रहे पेंटिंग, केनवास पर उकेर रहे हैं चित्र

सनावदएक महीने पहले
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लॉकडाउन होने के कारण बच्चों सहित अन्य लोग घरों में कैद हैं। स्कूल बंद होने से बच्चों की न तो पढ़ाई हो पा रही है न ही अन्य कला को निखार पा रहे हैं। ऐसे में उनका विकास रुक सा गया है लेकिन इसके विपरित शहर में करीब 50 से अधिक ऐसे बच्चे भी है। जो घरों में कैद होने के बाद भी बिना किसी के सहारे अपने हुनर को निखार रहे हैं।

लॉकडाउन के कारण मिल रहे समय का उपयोग कर वह अपनी कला को पहचान कर उसे निखारने में समय बीता रहे हैं। लगातार अभ्यास से अपनी कला के कारण आज उनकी कला का हर कोई दीवाना हो रहा है। ऐसे समय में जब हर कोई बीमारी से गुजर रहा है। वहां ये बच्चे घरों में बीमारी से दूर सकारात्मक ऊर्जा ला रहे हैं।

दीवारों पर बना दी पेटिंग

10वीं की छात्रा अश्मी मालाकार ने लॉकडाउन में पेंटिंग शुरु की। अब घर की दीवारों पर पेंटिंग बना रही है। पेटिंग के लिए न तो कोई क्लास ली न ही किसी ने सिखाया। वह आगे जाकर इंटीरियर डिजाइनर बनना चाहती हंै।

पेंटिंग से बढ़ा रही हौसला

बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा चंचल जोशी को जब समय मिलता तो पेंटिंग बनाने का अभ्यास करती थी। लगातार अभ्यास से निखार आ गया। कोरोना से लड़ रहे वारियर्स व संदेशात्मक पेंटिंग लोगों को जागरूक कर रही है।

बच्चों के डॉ. सुभाष मोरी ने बताया लॉकडाउन के कारण बच्चे घरों में कैद हैं। वह न तो पढ़ाई कर पा रहे हैं न ही खेलकूद में हिस्सा ले रहे हैं। जिससे उनका मानसिक तनाव बढ़ रहा है। वह डिप्रेशन में जा रहे हैं। ऐसे में बच्चे घरों में रहकर ही कोई एक्टिविटी करते हैं। तो उनका दिमाग खुलेगा। वह घरों में रहकर तनाव मुक्त रहेंगे। जिससे उनका मानसिक व शारीरिक विकास नहीं रुकेगा।

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