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पर्युषण पर्व:उच्च स्थान पर पहुंचने के लिए होती है सीढ़ियों की आवश्यकता

सनावद7 दिन पहले
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  • तीसरे दिन संत निलय में संध्या दीदी व शैली दीदी ने धर्मोपदेश देते हुए कहा-

आर्जव आत्मा का स्वभाव है। महापर्व के तहत दस लक्षण धर्म की पूजा करते हैं। किसी भी उच्च स्थान पर पहुंचने के लिए सीढ़ियों की आवश्यकता होती है जो व्यक्ति सीढ़ियों का सहारा लेता तो एक-एक सीढ़ी चढ़कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। वह उच्च स्थान प्राप्त कर लेता है। पिछले 2 दिनों में हम सीढ़ी चढ़े या नहीं आज तीसरी पायदान की सीढ़ी पर पैर रखना है। पर्युषण पर्व के तीसरे दिन संत निलय में संध्या दीदी व शैली दीदी ने धर्मोपदेश देते हुए कहा।

उन्होंने कहा- आर्जव का अर्थ है सरलता। उसमें कोई वक्रता, कुटिलता, फरेब या छल कपट शेष रहे यह संभव ही नहीं है। आर्जव का अर्थ है कुटिलता का अभाव। यह संस्कृत के ऋजु शब्द की संतति है। जिसके मायने है ईमानदार, नेक, सच्चा, सरल, हिताकांक्षी, भला व भोला। इन शब्दों का सारांश है जिस व्यक्ति ने मन, वचन, काय से कुटिलता का त्याग किया है। उसे तिलांजली दी है वहीं आर्जव धर्म का पालन कर सकता है। जैसे अपने मन में विचार किया जाए वैसा ही दूसरों से कहा जाए व वैसा ही कार्य किया जाए। रविवार को आचार्य श्री 108 शांति सागर वर्धमान देशना निलय में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म को अंगीकार किया। सन्मति जैन काका ने बताया सभी जिनमंदिरों में श्रीजी का अभिषेक व शांतिधारा व नित्य नियम पूजा की। इस दौरान मनोज जैन, सरल जटाले, हेमंत काका, प्रशांत चौधरी, सुधीर जैन, सुनील जैन, प्रदीप पंचोलिया, टंटू सेठ, संगीता पाटोदी, श्रुति सराफ, प्रियंका पंचोलिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे।

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