बढ़ता जा रहा लम्पी वायरस का प्रकोप:115 गांव के 82360 मवेशियों को लगाने के लिए मिले सिर्फ 522 डोज, डॉक्टर भी सिर्फ 9

भगवानपुरा10 दिन पहले
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क्षेत्र के मवेशियों में इन दिनों लम्पी वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। ब्लॉक की सीमाएं महाराष्ट्र से जुड़ी होने व वहां के पशुपालकों की पशुओं को लेकर हाट बाजारों में आवाजाही होने से यहां के मवेशी भी तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। कलेक्टर के आवागमन प्रतिबंध के आदेश के बाद भी इस पर रोक नहीं लग रही है। ग्राम वडिया गोपालपुरा के भाईला पटेल, पीपलझोपा के संजय वास्कले व जूना बिलवा के केसीराम सोलंकी ने बताया पशुओं में वायरस के लक्षण देखे जा रहे हैं।

यह वायरस महाराष्ट्र से सीधे अपने पैर पसार रहा है लेकिन इस वायरस से निपटने के लिए विभागीय स्तर पर अब तक कोई पुख्ता तैयारी नहीं है। उपचार के नाम पर गोट पॉक्स टीकाकरण कर प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। हालांकि पशु डाॅक्टराें का कहना है कि प्राथमिक उपचार के बाद लक्षण सामान्य होते दिख रहे हैं। फिर भी पशुपालकों को सचेत रहना आवश्यक है। रोगी पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखना है। उन्हें फिटकरी के पानी से नहलाकर मच्छर-मक्खी से बचाना है। क्योंकि यह संक्रमण मच्छर व मक्खी के संपर्क में आने से अत्यधिक फैल रहा है।

पशु अस्पतालों में गोटपॉक्स के टीके भी पर्याप्त नहीं
विभागीय आंकड़ों के अनुसार क्षेत्र के भगवानपुरा, गढ़ी, पीपलझोपा व सिरवेल में पशु चिकित्सालय और बहादुरपुरा व धूलकोट में 2 पशु औषधालय है। यहां डॉक्टरों सहित 9 कर्मचारी पदस्थ है। पशु गणना के अनुसार 115 गांव के पशुपालक 82360 मवेशी पाल रहे हैं। इनका टीकाकरण 9 लोगों के जिम्मे है। पशु चिकित्सा अधिकारी रामकेश यादव के मुताबिक विभाग से अब तक कुल 522 डोज मिले है। पशु चिकित्सालय पर 99-99 व पशु औषधालय में 66-66 डोज बांट दिए हैं। टीके की कमी के कारण पूरे क्षेत्र में टीकाकरण नहीं हो पा रहा है।

इंसानों में नहीं फैलती यह बीमारी
किसान इस बढ़ते संक्रमण को देखकर भयभीत हो रहे हैं। संक्रमित मवेशियों का दूध पीने से इंसानों में यह बीमारी फैलने की अफवाह भी चल रही है। इसको लेकर पशु चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह महामारी सिर्फ पशु से पशुओं में फैलती है। इंसानों में नहीं। अफवाह पूरी तरह गलत है। महामारी को लेकर अनुसंधान चल रहा है। जल्द ही इसका टीका भी तैयार हो सकता है। इससे संक्रमण पर पूरी तरह रोक लग सकेगी।

चलित इकाई वाहन भी बंद
दूरदराज के गांवों में बसे पशुप लकों के मवेशियों को इलाज के लिए अस्पताल तक लाने में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए शासन ने सन 2013 में आदिवासी ब्लॉकों में चलित पशु चिकित्सा इकाई वाहन की शुरुआत की। विभाग के टोल फ्री नंबर 1962 पर शिकायत दर्ज करने पर चलित इकाई वाहन के साथ डॉक्टरों की टीम घर पहुंचकर पशुओं का इलाज करती थी। यह योजना भी 3 साल से बंद है। इससे बीमार पशुओं को 40 किमी दूर मुख्यालय पर लाने में दिक्कतें आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि चलित इकाई वाहन को फिर शुरू किया जाना चाहिए।

पशुपालकों को सलाह दे रहे हैं
"कुछ जगह लम्पी वायरस के लक्षण वाले मवेशी मिले है। इसका टीका तो अब तक नहीं आया है, लेकिन प्राथमिक इलाज के रूप में गोट पॉक्स टीके लगाए जा रहे है। पशु परिवहन पर पूर्णत प्रतिबंध लगा दिया है। संक्रमण पर नियंत्रण के लिए पशुपालकों को भी सलाह दे रहे हैं।"
-रामकेश यादव, पशु चिकित्सा अधिकारी भगवानपुरा

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