घरों की छत पर मोरों का बसेरा:मोर के नाम से जाना जाता है चिनगुन गांव, ग्रामीण घर के सद्स्य की तरह कर रहे देखभाल

खरगोनएक महीने पहले

जिले के महेश्वर तहसील में स्थित ग्राम चिनगुन को मोरों के गांव के नाम से जाना जाता है। एक हजार से अधिक आबादी वाले गांव में करीब 200 मकान है। गांव में स्थित घरों और मकानों की छत पर मोरों का बसेरा है। दिन के समय मोर खेतों और खुली जगह में विचरण करते हुए देखे जा सकते है। शाम होते ही यह गांव में मकानों की छतों पर ठेरा जमा लेते है। ग्रामीणों और मोरों के बीच इतना तालमेल बन गया है कि मोर बिना डरे ग्रामीणों के पास पहुंच जाते है। वहीं ग्रामीण भी राष्ट्रीय पक्षी का घर के सदस्य की तरह खयाल रखते है। गांव के नगीन जाट ने बताया कि ग्रामीण घरों के बाहर और छतों पर मोरे के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करते है। गांव और उसके आसपास मोरों आसानी से घुमता हुआ देखा जा सकता है। साथ ही इनकी मीठी आवाज भी सुबह से शाम तक गूंजती रहती है।

500 से अधिक मोर और मोरनी है क्षेत्र में

वन विभाग में पाडल्या रेंजर विष्णु पाटीदार ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में 500 से अधिक मोर और मोरनी है। गांव के संजय जाट, रुपेश जाट, रवि पटेल, दिनेश काला ने बताया कि मोरों को शिकारी कुत्तों से मोरों को बचाने के लिए ग्रामीण तत्पर रहते है। कुत्तों के हमलों से घायल हुए मोरों का तत्काल उपचार कराया जाता है। वहीं इस संबंध में वन विभाग को भी सूचित किया जाता है। रेंजर पाटीदार ने बताया कि ग्राम चिनगुन के ग्रामीण मोरों के संरक्षण के लिए बेहतर कार्य कर रहे है। रेंजर पाटीदार ने बताया कि बारिश के बाद खेतों में बुवाई की प्रक्रिया शुरु हो गई है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि बुवाई के समय बीज व कीटनाशकों का प्रयोग करते समय सावधानी बरतें। क्योंकि जहरीले बीजों के कारण मोरों की मृत्यु हो सकती है।

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