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पूर्व विधायक बाबूलाल महाजन ने सीएम से की शिकायत:सर्व शिक्षा अभियान में फर्जी बिलों से कांटीजेंसी राशि में 9 करोड़ का भ्रष्टाचार

खरगोन2 महीने पहले

खरगोन जिले में सर्व शिक्षा अभियान के तहत जन शिक्षकों, बीआरसी, एवं डीपीसी द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। जिले की स्कूलों में शासन द्वारा प्रतिवर्ष विद्यार्थियों के लिए खेल सामग्री, स्कूल की मरम्मत, रंगाई पुताई, स्टेशनरी, फर्नीचर आदि के लिए करोड़ों रुपए की कांटीजेंसी (शाला आकस्मिक निधि) राशि दी जाती है।

प्रति स्कूल यह राशि दर्ज विद्यार्थियों के मान से दी जाती है, लेकिन खरगोन जिले के समस्त विकासखंडों की 2463 प्राथमिक एवं 826 माध्यमिक स्कूलों में बीआरसी (विकासखंड स्त्रोत समन्वयको) ने फर्जी बिल लगाकर इन राशियों का आहरण कर लिया है। मुश्किल से जिले की 20 प्रतिशत स्कूलों में राशि का भुगतान हुआ है। पूर्व विधायक बाबूलाल महाजन ने आरोप लगाते हुए कहा कि एक अनुमान के अनुसार करीब 9 करोड की राशि का बंदरबाट हुआ है।

उन्होंने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से की है। शिकायत की प्रति स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार, राज्य शिक्षा केंद्र के संचालक धनराजू एस, कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी ज्योति शर्मा को भी दी है।

महाजन ने बताया की प्रतिवर्ष राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय में विभिन्न मदों में राशि एसएमसी(शाला प्रबंधन समिति) को प्रदान की जाती है, लेकिन सत्र 2021 में समस्त एसएमसी खातों को बंद करवा दिया गया तथा आदेशित किया गया कि एसएमसी द्वारा किए गए व्यय के बिल बीआरसी स्तर पर प्रस्तुत करें। संबंधित फर्म को बीआरसी स्तर से भुगतान किया जाएगा तथा नवीन एसएमसी के खाते एसबीआई में खोले जाएंगे।

आनन-फानन में पिछले सत्र में दिसंबर-जनवरी में खाते बंद कर दिए गए एवं शेष राशि DPC (जिला परियोजना समन्वयक) के खाते में हस्तांतरित करवा ली गई। इसके बाद वरिष्ठ स्तर से शिक्षकों पर दबाव डाला गया कि उन्हें बीआरसी स्तर पर एसएमसी को प्राप्त राशि को पूर्णतः खर्च करना है, जबकि इसे आवश्यकतानुसार खर्च करना था। शिक्षकों को मौखिक रूप से कहा गया कि आपको सारी राशि खर्च करना है अन्यथा आप पर कार्रवाई हो सकती है।

प्रथम तो बीआरसी स्तर पर राशि अत्यंत देरी से प्राप्त हुई। 31 मार्च को उसके अंतिम तिथि थी, जल्दबाजी और मौके का फायदा उठाकर बीआरसी ने इसमें कमीशन का खेल खेलते हुए अपनी पसंद के फर्मों के बिल लगाते हुए कार्यों को अंजाम दिया गया। कुछ फर्मे तो ऐसी है जिनका शहर में कोई अता पता और न ही किसी प्रकार की दुकान है, सिर्फ कागज पर बिल बनाकर प्रस्तुत कर राशि आहरित कर ली गई है।

महाजन ने बताया कि हद तो तब हो गई जब अधिकांश एसएमसी सदस्यों को यह भी पता नहीं था कि हमारे विद्यालय के लिए हमने कौन सी फर्मों से सामग्री क्रय की एवं कौन से मद से कितना कितना खर्च किया है। क्रय की गई सामग्री अभी तक विद्यालयों को प्राप्त नहीं हुई है, शिक्षक दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। शिक्षकों के पास बिलों की फोटो कॉपी भी नहीं है क्योंकि बीआरसी ने स्वयं अपने पास जो फर्जी बिल बनवा रखे थे वह बिल लगाकर राशि आहरित कर ली है।

प्रत्येक प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल में दर्ज विद्यार्थियों के मान से 10 हजार से लेकर एक लाख तक की राशि मिलती है। जिसमे खेल सामग्री, स्कूल मरम्मत, रंगाई पुताई ,स्टेशनरी, व अन्य खर्चों के लिए दी जानी थी, लेकिन बीआरसीयों ने स्वयं की फर्म के बिल लगाकर यह राशि आहरित कर ली।

80 प्रतिशत स्कूलों में खेल सामग्री आज तक नहीं पहुंची

महाजन ने बताया की अब भी जिले की भगवानपुरा, झिरनिया, सेगाव, खरगोन, बड़वाह, महेश्वर, कसरावद, भीकनगांव, गोगावा ब्लॉकों की सैकड़ों स्कूल ऐसी है। जहां एक रुपए की भी खेल सामग्री अब तक नहीं पहुंची है, बावजूद इन स्कूलों की राशि आहरित कर ली गई है। रोड किनारे की कुछ स्कूलों में जागरूक जनशिक्षकों द्वारा जरूर खेल सामग्री दी गई है लेकिन वह भी घटिया सामग्री है। 10 हजार की खेल सामग्री जिसका भौतिक सत्यापन किया जाए तो मुश्किल से ढाई से तीन हजार की सामग्री होगी।

महाजन ने आरोप लगाए कि यह पूरा खेल डीपीसी के निर्देश पर पूरे जिले में खेला गया। उन्होंने बताया कि एक जानकारी के अनुसार प्रति विकासखंड में एक से दो करोड़ रुपए की राशि प्राप्त हुई थी, जिसमें भारी कमीशन के चक्कर में यह राशि अपनों अपनों में बांट ली गई है। ना तो विद्यार्थियों को खेल सामग्री मिली है नहीं स्कूलों की मरम्मत हुई है।

अग्निशामक यंत्रों में भी भारी भ्रष्टाचार

जिले की सभी प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूलों 2 हजार से लेकर 5 हजार रुपए तक के अग्निशामक यंत्र के बिल लगाए गए हैं, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि किसी भी स्कूल में अग्निशमक यंत्र अब तक नहीं पहुंचा है। इसके साथ ही माध्यमिक स्कूल में जहां दर्ज संख्या अधिक है बालिकाओ की आत्मरक्षा प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक मिडिल स्कूल में 9 हजार की राशि का प्रावधान था। राशि भी पूरे जिले की माध्यमिक स्कूलों के लिए दी गई थी। इन स्कूलों में आत्मरक्षा के प्रशिक्षण होना थे। इसमें भी फर्जी बिल लगाकर राशि संबंधित बीआरसी द्वारा आहरित कर ली गई है। किसी भी स्कूल में प्रशिक्षण नहीं हुए हैं।

शिक्षक विहीन शालाओ में सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ

जिले के आदिवासी विकासखंड जैसे भगवानपुरा, झिरनिया, भीकनगांव, में 148 प्राथमिक एवं 42 माद्यमिक स्कूले शिक्षक विहीन है। जिनका प्रभार जनशिक्षकों के पास है इन स्कूलों में अब तक एक भी रुपए की खेल सामग्री नहीं पहुंची है और नही इन स्कूलों की रंगाई पुताई हुई है किसी प्रकार की मरम्मत भीं नही हुई है फिर भी सारी राशि के फर्जी बिल लगाकर आपस में राशि बांट ली गई है। इन विकास खंडों में कुछ शालाओं की दर्ज संख्या को भी फर्जी तरीके से बढ़ा दी गई। जैसे किसी स्कूल की दर्ज संख्या 25 थी वहां की संख्या 35 कर राशि सीधे डबल करके आहरित कर ली। इसके साथ ही स्कूलों में कई प्रकार की अनियमित्ताएं है। महाजन ने इस पूरे मामले में शासन और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

एसडीएम को जांच दल प्रभारी किया नियुक्त

इस पूरे मामले में जिला प्रशासन द्वारा एक जांच दल बनाया है। जिसने खरगोन एसडीएम ओम नारायणसिंह बड़कुल को नियुक्त किया है। जो इस पुरे मामले की जांच करेंगे।

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