सुरक्षा घेरे को पार नहीं कर पाए अधिकांश आम कार्यकर्ता:राहुल गांधी की जुबानी जिलेवासी नहीं सुन पाए "भारत जोड़ो' का संदेश

खरगोन2 महीने पहले
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24 नवंबर की शाम करीब 7 बजे जिले के खेरदा पहुंची राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा करीब 45 घंटे जिले में रही और 26 नवंबर की शाम करीब 5 बजे महू के लिए रवाना हुई। जिले में यात्रा ने 54 किमी की दूरी तय की। यात्रा में राष्ट्रीय व प्रादेशिक नेताओं सहित स्थानीय नेता, कार्यकर्ता आदि शामिल हुए। जिले में यात्रा दो बड़े नगरों सनावद व बड़वाह से गुजरी। जिले से यात्रा गुजरने के दौरान राहुल गांधी की कहीं भी सभा या उद्बोधन नहीं हुआ। सनावद में तय नुक्कड़ सभा भी ऐन मौके पर सुरक्षा कारणों के चलते निरस्त कर दी गई।

कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो का संदेश लेकर निकले राहुल गांधी को सुनने की जिलेवासियों की इच्छा अधूरी रह गई। यहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से कोई संबोधन नहीं दिया। मीडिया के सवालों का जवाब भी पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, कन्हैया कुमार आदि ने दिए। उधर, यात्रा के दौरान राहुल गांधी सुरक्षा के कड़े पहरे में रहे, इसके चलते उनके पास तक चुनिंदा बड़े नेता ही पहुंच पाए, आम कार्यकर्ता सुरक्षा घेरा पार नहीं कर सके। हालांकि जिले के नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी ने स्थानीय परिस्थितियों, जनसमस्याओं, योजनाओं व पार्टी की गतिविधियों को लेकर विस्तार से जानकारी ली है। साथ ही सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करने, जनता के बीच जाने व मैदानी पकड़ मजबूत करने का सूत्र दिया है।

ऊर्जा का संचार, परिणाम के लिए इंतजार
भारत जोड़ो यात्रा को लेकर कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इससे पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और आमजन में उत्साह का संचार हुआ है। इसे लगभग एक वर्ष बाद होने वाले विधानसभा व उसके बाद लोकसभा चुनावों से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि यात्रा के दौरान वरिष्ठ नेताओं ने यह भी साफ किया है कि यह सिर्फ राजनीतिक यात्रा नहीं है। हालांकि यात्रा और यात्रा से जुड़े संदेश का पार्टी नेता और आमजन पर कितना असर पड़ेगा और उसके क्या परिणाम होंगे, यह आने वाला समय ही तय करेगा।

विधायक ने दिया था स्व. इंदिरा गांधी के मंदिर जाने का निमंत्रण
भीकनगांव की कांग्रेस विधायक झूमा सोलंकी ने राहुल गांधी को उनकी पिस के पाडल्या में स्थित पूर्व पीएम स्व. इंदिरा गांधी के मंदिर आने का आमंत्रण दिया था। सोलंकी ने बताया कि तय रूट अलग होने से राहुल पाडल्या नहीं आ पाए लेकिन इसके स्थान पर उन्होंने खंडवा के बड़ौदा अहीर स्थित टंटया मामा के जन्मस्थान पर आदिवासी सम्मेलन की स्वीकृति दी और वहां उन्होंने पूरा समय दिया।

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