ये अजब है:हाईवे निर्माण कंपनी ने कसरावद तहसील में बना दिया तीसरा मिर्जापुर

खरगोन2 महीने पहले
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कसरावद तहसील में अब तक दो मिर्जापुर गांव थे। हाईवे 347 का निर्माण कर रही कंपनी ने अनदेखी के चलते एक और मिर्जापुर गांव बना दिया है। हाईवे पर स्थित ग्राम बालसमुद के बेड़ीपुरा नयानगर क्षेत्र में बकायदा इसका बोर्ड लगाया है। यही नहीं यहां बने यात्री प्रतीक्षालय पर भी यही नाम लिखा है। इसे पढ़कर लोग भ्रमित हो रहे हैं और आश्चर्यचकित भी हैं, क्योंकि जिस स्थान पर मिर्जापुर का बोर्ड लगा है, वहां से तहसील के खामखेड़ा क्षेत्र में बसे मिर्जापुर की दूरी करीब 20 किमी और सिनगुन क्षेत्र के इसी नाम के गांव की दूरी करीब 30 किमी है।

उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि यहां यह बोर्ड किस मकसद से लगा दिया गया। लोगों काे यह समझ नहीं आ रहा है कि हाईवे 347-सी के तहत बने 60 किमी दूरी के इस मार्ग पर कहीं भी इस नाम का गांव नहीं है। फिर सड़क निर्माण कंपनी से यह गलती कैसे हो गई। हाईवे इंजीनियर अनिल महाजन का कहना है कि त्रुटिवश इस नाम का बोर्ड बन गया होगा। इसे जल्द बदला जाएगा।

ग्रामीणों से पूछकर बनवाया था बोर्ड
गांव के विजय पाटीदार, सतीश पटेल, नितिन पटेल आदि के मुताबिक बालसमुद व नयानगर क्षेत्र के बीच एक गांव मेजमपुर था। हालांकि अब यह वीरान गांव की श्रेणी में आता है। यहां कोई बस्ती नहीं रही। इसके नाम से केवल एक सरकारी स्कूल ही संचालित हो रहा है। संभवत: कंपनी कर्मचारियों के पूछने के दौरान किसी ने मेजमपुर नाम बताया आैर लिखने के दौरान इसे मिर्जापुर लिख दिया गया हो। सड़क निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर एमएफ शेख का कहना है कि बोर्ड बनवाने से पहले क्षेत्र के ग्रामीणों से बात की थी। ग्रामीणों ने ही यह नाम बताया था। जल्द ही इसे दुरुस्त करवा देंगे।

पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाहियां
काम की शुरुआत से ही हाईवे निर्माण कंपनी पर लापरवाहियों व मनमानी के आरोप लगते रहे हैं। इनमें बिना संकेतक लगाए सड़क की खुदाई, पानी का छिड़काव नहीं करना, मशीनरी को सड़क पर खड़े करना, पैवर लगाते समय गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखना आदि शामिल हैं। निर्माण के दौरान मशीनों से टकराने से तीन लोगों की जान भी जा चुकी है। हालांकि इसमें समय के साथ सुधार भी हुआ लेकिन इस बार यह नए तरह का मामला सामने आया है।

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