मानव सेवा ही जीवन का ध्येय:48 थैलेसीमिया बच्चों के रक्त पिता बने डॉ. यजुर्वेदी, हर 25 दिन में जुटाते हैं खून

मंदसौर6 दिन पहलेलेखक: कपिल शर्मा
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मानव सेवा को ही जीवन का ध्येय मान चुके जिला अस्पताल के डॉ. हिमांशु यजुर्वेदी ने थैलेसीमिया से ग्रसित 48 बच्चों को रक्त अभिभावक के रूप में गोद ले रखा है। इनके लिए हर 25 दिन में डाॅ. यजुर्वेदी ब्लड का इंतजाम करते हैं। मंदसौर में अब थैलेसीमिया के नए मामले सामने ना आएं, इसके लिए विशेष अभियान के तहत शिविर भी संचालित कर रहे हैं। इसको देखते हुए रविवार को तीसरी बार राज्य स्तर पर उन्हें सम्मानित किया। अब तक 1 अंतरराष्ट्रीय, 11 राष्ट्रीय व 3 राज्य स्तरीय पुरस्कार मिल चुके हैं।

सायकोलॉजिस्ट व मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. यजुर्वेदी ने 1998 में पहला रक्तदान किया। रक्तदान के प्रति अलख जगाने के लिए 2006 में डाॅ. यजुर्वेदी ने ब्लड ऑन कॉल संस्था बनाई। इसमें वर्तमान में देश के अलग- अलग हिस्सों से करीब 2 हजार से अधिक लोग व विभिन्न संगठन जुड़े हैं। कॉल मिलने के 15 मिनट के भीतर रक्तदाता मरीज पास पहुंच जाता है। डॉ. यजुर्वेदी ने बताया बच्चों को स्माइली बॉल व टाॅफी पसंद होती है।

दस्तावेज सहित अन्य कार्यों को लेकर पास में आने वाले हर दिव्यांग बच्चे के चेहरे पर स्माइल लाने के लिए उसे स्माइली व टाॅफी देता हूं ताकि वे स्वयं को कमजोर ना समझें। प्रोजेक्ट मुस्कान के अंतर्गत 200 से अधिक बच्चों को स्माइली गिफ्ट की है। यह सिलसिला 2016 से जारी है। डॉ. यजुर्वेदी ने निर्धन मरीजों के लिए कैबिन में कपड़े भी रखे हैं। इसके अलावा लावारिस या अज्ञात व्यक्ति के मृत होने पर अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाले कपड़े की व्यवस्था का जिम्मा भी उठा रखा है। बकायदा स्टाफ काे भी बता रखा है और सूचना भी चस्पा की है।

खुद अब तक 50 बार कर चुके हैं रक्तदान

डॉ यजुर्वेदी अब तक 50 बार रक्तदान कर चुके हैं। ब्लड ऑन कॉल संस्था के माध्यम से करीब 4 हजार लोगों की मदद की है। इनमें मंदसौर के अलावा देश के अलग- अलग हिस्सों के लोग शामिल हैं। रविवार को थैलेसीमिया मुक्त मप्र रक्तमित्र संगठन द्वारा जबलपुर के आईएमए हाॅल में रक्तदान के क्षेत्र में सतत कार्य करने व थैलेसीमिया उन्मूलन कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी करने को लेकर राज्य स्तर पर सम्मानित किया गया।

5 से अधिक मिल चुकी है उपाधि व सम्मान
डॉ. यजुर्वेदी को भारत गौरव, मानव रत्न, ब्लड कमांडो, कोटा प्राइड, राष्ट्रीय आदर्श रक्त सेवक सहित अन्य उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है। इसके लिए उत्तरप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में राष्ट्रीय सम्मान हो चुका है।

आगे क्या : बीमारी की रोकथाम के लिए लगा रहे शिविर, कर रहे जागरूक
मंदसौर में थैलेसीमिया के 48 मामले हैं। नए मामले सामने ना आएं, इसको लेकर विभिन्न संगठनों के साथ डॉ. यजुर्वेदी मुहिम शुरू कर रहे हैं। उन्हाेंने बताया कि हाल ही में सिंधी समाज के सहयाेग से आयोजित शिविर में 118 लोगों का परीक्षण किया, इसमें 30 में थैलेसीमिया माइनर सामने आया। यदि माइनर मेल व फिमेल में शादी हो तो होने वाला बच्चा मेजर थैलिसिमिया होगा। इसके लिए सतर्कता व रोकथाम के लिए अभियान चलाया जा रहा है। लाेगाें काे भी जागरूक कर रहे हैं। आगामी शिविर गरोठ में होगा।

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