मुनिश्री का उपदेश:शीघ्र लक्ष्य पाने वालों के निर्णय कभी सत्य नहीं हो पाते

मुरैना11 दिन पहले
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धर्मसभा के उपरांत भगवान जिनेंद्र की आरती उतारते जैन समाज के लोग। - Dainik Bhaskar
धर्मसभा के उपरांत भगवान जिनेंद्र की आरती उतारते जैन समाज के लोग।

शीघ्रता की प्राप्ति का लक्ष्य जिनके पास है, उनके निर्णय सत्य नहीं होते हैं। जो बहुत जल्दी बहुत ऊंचाइयां को पाने की चाहत रखते हैं उनके कदम मजबूत नहीं होते हैं। जितने ऊंचाइयों को हासिल करने के परिणाम हैं। उतनी पुरुषार्थ की नींव मजबूत होनी चाहिए। किसी भी क्षेत्र में जिन लोगों ने मात्र ऊंचाइयां देखी है। वे पक्षी बनकर भवन के शिखर पर बैठ सकते हैं। लेकिन भवन के सम्राट नहीं बन सकते। सम्राट बनने के लिए ऊंचाई नहीं चाहिए, नीचे से उठना पड़ेगा।

यह उपदेश रविवार को अतिशय क्षेत्र टिकटौली दूमदार में चातुर्मास करने आए जैन मुनि अजित सागर महाराज धर्मसभा में दे रहे थे। शनिवार को जिले भर के जैन समाज के लोग जैन मुनि के प्रवचन सुनने अतिशय क्षेत्र आए थे। धर्मसभा में जैन मुनि ने कहा कि जो नीचे से उठना नहीं जानता, सिर्फ ऊपर उड़ना जानता है। उसे बोध नहीं है कि पक्षी भी उड़ान नीचे से भरता है। विमान आसमान में उड़ता है, लेकिन उड़ान नीचे से भरता है। दृढ़ संकल्पी व्यक्ति बाधाओं से घबराता नहीं है।

जो घबराता नहीं है उसका विकास होता है। हार मानने वालों की जीत नहीं होती। कोशिश करने वालों की जीत होती है। जीवन में किसी भी पल कोशिश नहीं छोड़ना चाहिए। पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। पुरुषार्थ करते रहोगे तो उन लोगों में नाम नहीं लिखा जाएगा, जो प्रमादी हैं। उन लोगों में नाम लिखा जाएगा जो पुरुषार्थी थे। आचार्य श्री ने कहा कि तरीका बदलते ही तकदीर बदल जाती है, भाग्य बदल जाता है। जो अपना ढंग नहीं बदल पाते उनकी तकदीर नहीं बदल पाती है। प्रभु महावीर स्वामी ने अपने जीवन जीने का तरीका बदला तो उनका जीवन बदल गया।

आज पूरा विश्व, 3 लोक उन्हें नमस्कार करता है। आज हम धर्मसभा में प्रवचन सुन रहें हैं। लेकिन अपने जीवन में नहीं उतारेंगे तो कोई लाभ नहीं होगा। हमें जीवन को बदलना है तो तरीका बदलना पड़ेगा। धर्मसभा के अंत में जैन समाज के लोगों ने भगवान जिनेंद्र की सामूहिक आरती उतारी। इस अवसर पर राजेंद्र जैन भंडारी, ओमप्रकाश जैन, रमेश चंद्र जैन, संतोष जैन, रविन्द्र जैन, रीतेश, राजेश, बीना आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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