• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Morena
  • In The Survey, The Administration Considered A Loss Of Only 15% In Millet, The Farmers Said Come To The Fields And See The Officials

अतिवृष्टि का असर:सर्वे में प्रशासन ने बाजरा में 15% ही नुकसान माना किसान बोले- खेतों पर आकर तो देखें अधिकारी

मुरैनाएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सबलगढ़ क्षेत्र में अतिवृष्टि से बाजरा के खेतों में पानी भर गया। - Dainik Bhaskar
सबलगढ़ क्षेत्र में अतिवृष्टि से बाजरा के खेतों में पानी भर गया।

अक्टूबर के पहले सप्ताह में भारी बारिश से बाजरा की फसल को 35 से 50 फीसदी क्षति पहुंची है लेकिन प्रशासनिक सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट में 12 से 15 फीसदी ही नुकसान बताया गया है। सर्वे रिपोर्ट में न तो प्रभावित किसानों की संख्या का उल्लेख है न खराब हुई फसल के रकबा का जिक्र है। नियमानुसार 25 फीसदी से कम नुकसान पर किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता।

प्रशासन द्वारा कराए गए सर्वे में जौरा, सबलगढ़ व अंबाह ब्लॉक में 10 से 15 फीसदी, पोरसा व बानमोर ब्लॉक में 10 से 12 प्रतिशत और कैलारस ब्लॉक के गांवों में 5 से 10 फीसदी नुकसान बताया गया है। मुरैना देहात व मुरैना शहर में तो राजस्व, कृषि विभाग व पंचायत विभाग के कर्मचारियों ने 5 से 7 प्रतिशत ही क्षति मानी है। पूरी रिपोर्ट पर गौर करें तो प्रशासन की नजरों में 12 से 15 प्रतिशत नुकसान हुआ है। सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट अधीक्षक भू-अभिलेख ने राहत आयुक्त को भोपाल भेज दी है। वहीं सरकार ने नियम बनाया है कि अतिवृष्टि, बाढ़ या अन्य आपदा से किसानों ने फसल में 25 फीसदी से कम नुकसान है ताे उसमें प्रभावित किसानों को राहत देने का कोई प्रावधान नहीं है।

राजस्व अधिकारियों का कहना है कि अक्टूबर की अतिवृष्टि से बाजरा की कटी फसल को 12 से 15 फीसदी नुकसान हुआ है इसलिए पोरसा, अंबाह, मुरैना, जौरा, कैलारस, सबलगढ़, बानमोर व पहाड़गढ़ के किसानों को राहत नहीं मिलेगी। वहीं मप्र किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक तिवारी ने सीएम को भेजे पत्र में मांग की है कि अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को बाजरा के नुकसान के लिए 15 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर के मान से क्षतिपूर्ति दी जाए। किसानाें की फसल में 35 से 50 फीसदी नुकसान हुआ है।

जो किसान कॉल कर रहे, उनका हो रहा सर्वे
जो किसान अतिवृष्टि से फसल खराब होने की शिकायत कर रहे हैं या सूचना दे रहे हैं, उनके गांव व खेत पर पहुंचकर सर्वे दल नुकसान का आंकलन कर रहा है। इसलिए 10 दिन में सर्वे का काम पूरा नहीं हो सका है। तहसीलदारों की मानें तो खड़ी फसल के बाजरा के दाने की क्वालिटी प्रभावित हुई है। पूरी फसल खराब नहीं हुई। कटी फसल जरूर खेतों में पानी भरने के कारण सड़ गई है।

कटी फसल में नुकसान दिखा, खड़ी में नहीं
पटवारी, गिरदावल, पंचायत सचिव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के दल ने बाजरा की कटी फसल में तो नुकसान नजर आया है लेकिन खड़ी फसल में नहीं। भू-राजस्व संहिता के मुताबिक, यदि खड़ी फसल में नुकसान की स्थिति नहीं है तो सर्वे टीम कटी फसल के नुकसान को क्षति की श्रेणी में नहीं मानती है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में दो दिन की 89 मिमी बारिश से खेत पानी से लबालब हो गए और खेतों में खड़ा बाजरा से लेकर कटा बाजरा सड़ गया लेकिन प्रशासन को क्षति नजर नहीं आई। तहसीलदारों का कहना है कि 10 हेक्टेयर में से यदि एक से डेढ़ हेक्टेयर की फसल को आपदा के दौरान क्षति पहुंचती है तो वह 10 से 15 फीसदी नुकसान ही शुमार होगा।

रिपोर्ट गलत, सरकार मुआवजा नहीं देना चाहती
मुरैना विधानसभा क्षेत्र के 80 फीसदी गांवों में बाजरा की फसल में अतिवृष्टि से 80 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। सर्वे की प्रारंभिक रिपोर्ट गलत है, सरकार को राहत का पैसा नहीं देना है तो फर्जी आंकड़े क्यों तैयार कराए जा रहे हैं। -राकेश मावई, विधायक, मुरैना

अंबाह में फिर से सर्वे कराया जाएगा
पोरसा में बाजरा की खड़ी फसल में 10 से 12 फीसदी नुकसान है लेकिन अंबाह में बाजरा की कटी फसल में 50 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। इसलिए प्रभावित किसानों को राहत मिलना चाहिए। सर्वे गलत किया तो अंबाह विधानसभा के एक-एक खेत पर जाकर फिर से सर्वे कराया जाएगा। -कमलेश जाटव, विधायक, अंबाह

फसल में 15 फीसदी क्षति
अतिवृष्टि से अंबाह-पोरसा क्षेत्र में 10 से 15 फीसदी क्षति होने का पता चला है। सर्वे रिपोर्ट फाइनल करने पर काम चल रहा है। -राजीव समाधिया, एसडीएम अंबाह

खबरें और भी हैं...