शहीदों को जन्मदिन पर याद किया गया:शहीद शंकर शाह और रघुनाथ शाह वीर होने के साथ कवि हृदय भी थे: सिकरवार

मुरैना12 दिन पहले
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वीर शहीदों का जन्मदिन मनाते कांग्रेसी। - Dainik Bhaskar
वीर शहीदों का जन्मदिन मनाते कांग्रेसी।

मंडला में जन्मे अमर शहीद राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के शहीद दिवस पर शहर कांग्रेस के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने उन्हें याद किया और उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किए। शहर जिला कांग्रेस पर कांग्रेसियों ने राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर पुष्प एवं माल्यार्पण अर्पित की और उनके जीवन पर प्रकाश डाला। अतिथि के रूप में मौजूद शहर जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुभाष सिंह सिकरवार ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का जन्म मंडला किले में हुआ था।

किले का निर्माण गौड़ राजवंश के राजा नरेन्द्र शाह ने 1698 में करवाया था, जो तीन दिशाओं से मां नर्मदा की अथाह जलराशि से घिरा था। 1857 की क्रांति के बाद लार्ड डलहौजी ने भारतीय राज्यों को हड़पने के लिए एक नीति बनाई। इसके तहत झांसी, नागपुर, अवध, कानपुर, मंडला के रामगढ़ को अंग्रेज अपने अधीन करना चाहते थे। राजा रघुनाथ शाह इन सभी घटनाओं से आहत थे और अंग्रेजों को इस देश से भगाना चाहते थे। राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह बहुत वीर होने के साथ-साथ अच्छे कवि थे और अपनी कविताओं के माध्यम से लोगों में देशभक्ति की भावना का संचार कर रहे थे।

जबलपुर का डिप्टी कमिश्नर सभी भेद जान चुका था उसने अपने गुप्तचर चारो तरफ फैला दिए। 14 सितंबर 1857 की रात अंग्रेजों ने लगभग 20 घुड़सवार और 40 पैदल सिपाहियों के साथ राजा की हवेली पर धावा बोल दिया और राजा शंकर शाह उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह और 13 अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया। किले की तलाशी में जो कविताएं अंग्रेजों के हाथ लगीं, वे कुछ इस प्रकार थीं-मूंद मुख इंडिन को चुगलों को

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