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एक मां की कहानी....:जिन्होंने अपने खर्चों में कटौती की, दिन-रात मेहनत की, आज बेटी को मुकाम तक पहुंचाया

मुरैना10 दिन पहले

हम बात कर रहे हैं मुरैना की खुशबू शिवहरे की मां रानी शिवहरे की जिन्होंने अपनी मेहनत व लगन से अपनी बेटी को इतना काबिल बनाया कि आज उनकी बेटी का नाम प्रदेश भर में रोशन हो रहा है। खुशबू शिवहरे ने माध्यमिक शिक्षा मण्डल की हायर सेकेण्ड्री परीक्षा में कॉमर्स संकाय में प्रदेश में पहला नंबर लाकर जिले का नाम रोशन किया है। खुशबू शिवहरे की इस उपलब्धि के पीछे मुख्य हाथ उनकी मां रानी शिवहरे का है। रानी शिवहरे ने दैनिक भास्कर को दिए संक्षिप्त साक्षात्कार में बताया कि उनका जीवन शुरु से ही संघर्षमय रहा। उनका मायका ग्वालियर के घास मण्डी स्थित राय मौहल्ले में हैं। जब वे 13 वर्ष की थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। घर में मां व दो भाई थे, जिन्होंने घर को संभाला। अभावों में पलकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की तथा जेसी मिल गर्ल्स कॉलेज से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर की परीक्षा पास की। वर्ष 2004 में उनकी शादी मुरैना निवासी कमल किशोर शिवहरे के साथ हुई। अपनी मेहनत व लगन से उन्होंने ससुरालियों के दिल में अपने लिए जगह बनाई। बेटी खुशबू हुई तो उसका लालन-पालन किया और कक्षा पांच तक उसे स्वयं पढ़ाया। उसके बाद उसका एडमीशन जेएस पब्लिक स्कूल मुरैना में कराया। उसके बाद घर के मुरैना के महंगे इग्लिश मीडियम स्कूल टीएसएस में पढ़ाया। अपने व घर के खर्चों में कमी करके साल की पचास हजार रुपए तथा 25 हजार रुपए कोचिंग फीस का इंतजाम किया।

मां रानी शिवहरे।
मां रानी शिवहरे।

बच्चों ने नहीं कराया कभी काम
अपने बच्चों को काबिल बनाने के लिए रानी शिवहरे ने कभी भी अपने बच्चों से काम नहीं कराया। उनकी एक ही तमन्ना रहती थी कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर उनका नाम रोशन करे।

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