नर्मदापुरम के मॉब लिंचिंग वाले गांव का सच:मवेशी जंगल में घुस जाएं तो लौटकर नहीं आते; तस्कर सीधे कत्लखाने ले जाते हैं

धर्मेंद्र दीवान, शशांक मिश्रा (नर्मदापुरम/सिवनी मालवा)2 महीने पहले

नर्मदापुरम जिले से 60 किलोमीटर दूर नंदरवाड़ा गांव...। यहां से कुछ ही दूरी पर बराखड़ में दो दिन पहले गो तस्करी के आरोप में मॉब लिंचिंग हुई। इस घटना ने अफसरों की नींद उड़ा दी। लेकिन गो तस्करी से सुर्खियों में आए नंदरवाड़ा में हालात अब सामान्य हैं। दैनिक भास्कर की टीम इस गांव में पहुंची। पढ़िए दैनिक भास्कर की पूरी पड़ताल...

गुरुवार दोपहर करीब 2 बज रहे थे। टीम गांव के मुख्य बाजार में पहुंची। यहां चहल-पहल थी। दुकानें खुली हुई थीं। एक दिन पहले हुई घटना का कोई असर नहीं दिखा। पहले तो ग्रामीण इस बारे में ज्यादा कुछ कहने से बचते नजर आए। ज्यादातर ने कहा, रात में सभी सो जाते हैं, इसलिए ज्यादा कुछ पता नहीं चलता। उनके मन को कुरेदा तो उन्होंने नाम उजागर नहीं करने की शर्त रखी। धीरे-धीरे हालात बताने लगे। उन्होंने कहा कि यहां के अलावा आसपास के गांवों से भी गायों को ले जाया जाता है। जबकि, पुलिस का मानना है कि लोकल नेटवर्क के बिना गो तस्करी संभव नहीं।

रात में वाहन में भरते हैं मवेशी

एक ग्रामीण ने बताया, गांव से 2-3 किलोमीटर दूर से जंगल लगा है। पक्का कुछ नहीं पता, लेकिन आधी रात के बाद आउट साइड में गाड़ियों में मवेशी भरे जाते हैं। ये काम लोकल लोगों की मिलीभगत से होता है। लोकल लोग ही व्यापारियों से सड़क पर बैठे मवेशियों का सौदा करते हैं। इसके बाद गाड़ियां आती हैं। मवेशियों को गाड़ी में भरकर ले जाते हैं। दो दिन पहले की घटना की जानकारी अखबार से मिली। इसके बाद से गांव में चर्चा है कि पिछले एक महीने में दो बार गाड़ियां भरकर मवेशी भेजे जा चुके हैं। इस बार गो-सेवकों की जागरुकता से गाड़ी नहीं जा पाई।

नंदरवाड़ा के मुख्य बाजार में चहल-पहल थी। दुकानें खुली हुई थीं। एक दिन पहले हुई मॉब लिंचिंग की घटना का कोई असर नहीं दिखा।
नंदरवाड़ा के मुख्य बाजार में चहल-पहल थी। दुकानें खुली हुई थीं। एक दिन पहले हुई मॉब लिंचिंग की घटना का कोई असर नहीं दिखा।

मवेशियों की सुरक्षा के लिए कोई नहीं

नंदरवाड़ा से कुछ ही दूरी पर नहर है। हमारी टीम नहर के पास खेत किनारे पहुंची। यहां 40-50 मवेशी चर रहे थे। कोई चरवाहा नहीं था। यहीं से एक रास्ता जंगल की ओर जाता है। यहां एक ग्रामीण मिला। उसने बताया कि लावारिस और पालतू मवेशी इस जंगल वाले रास्ते में चले गए तो लौटकर नहीं आते।

बता दें, मॉब लिंचिंग की घटना में घायल ट्रक ड्राइवर शेख लाला ने इसी नहर के किनारे वाले खेत से मवेशियों को भरने की बात FIR में लिखवाई है। वो नंदरवाड़ा से मवेशी भरकर महाराष्ट्र के अमरावती जा रहा था।

बारिश के दिनों में जंगल और घास वाला क्षेत्र गीला रहता है। जहरीले कीड़े भी रहते हैं। ऐसे में आवारा मवेशी इस तरह सड़कों पर बैठे रहते हैं। रात में इन्हें गो तस्कर उठा ले जाते हैं।
बारिश के दिनों में जंगल और घास वाला क्षेत्र गीला रहता है। जहरीले कीड़े भी रहते हैं। ऐसे में आवारा मवेशी इस तरह सड़कों पर बैठे रहते हैं। रात में इन्हें गो तस्कर उठा ले जाते हैं।

लालच देकर आदिवासियों की मदद लेते हैं तस्कर

ग्रामीणों ने बताया कि पुलिस और गो रक्षकों को शक न हो, इसलिए गो तस्कर आदिवासियों की मदद लेते हैं। उनको रुपयों का लालच देते हैं। फिर आदिवासियों की मदद से जंगल के रास्ते जानवरों को हांक कर दूर तक ले जाते हैं। एक बार जंगल में पथरोटा थाने की पुलिस ने कुछ लोगों को पकड़ा भी था। बैतूल के 3 लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज हुई थी। आदिवासी नेता और तिलक सिंदूर मंदिर समिति के विनोद बारीबा ने बताया कि इटारसी तिलक सिंदूर रोड पहाड़ी से एक मार्ग बैतूल की तरफ निकलता है। इससे हर दिन गोवंश को लाया जाता है। आदिवासी खुद को आने वाले गांव के रिश्तेदार बताकर गो तस्करों तक पहुंच जाते हैं। इस तरह गोवंश को गांव से बाहर निकलवाने में आदिवासियों का सहारा लिया जाता है।

मवेशियों को औबेदुल्लागंज-बैतूल नेशनल हाईवे से महाराष्ट्र ले जाया जाता है। यहां चेकिंग भी कम रहती है। इसके अलावा सिवनी मालवा क्षेत्र से पगढाल, ढेकना, चिचोली, बैतूल के रास्ते भी अमरावती पहुंचते हैं। बैतूल से अमरावती 170 किमी है। बैतूल से नर्मदापुरम 100 और इटारसी 80 किमी है। यहां चेकिंग का डर कम रहता है।

गो तस्कर वाहनों में मवेशियों के मुंह-पैर बांधकर उन्हें एक के ऊपर एक चढ़ाते हैं। मवेशियों को ट्रक में इस तरह ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है।
गो तस्कर वाहनों में मवेशियों के मुंह-पैर बांधकर उन्हें एक के ऊपर एक चढ़ाते हैं। मवेशियों को ट्रक में इस तरह ठूंस-ठूंसकर भरा जाता है।

ठूंस-ठूंस कर भरते हैं मवेशी

बुधवार को पकड़े गए ट्रक में मवेशियों को ठूंस-ठूंसकर भरा गया था। इससे पता चला कि मवेशियों के मुंह-पैर बांधकर उन्हें एक के ऊपर एक चढ़ाते हैं। 60-70 घंटे के सफर में भूखा-प्यासा बांधकर रखा जाता है। रास्ते में कहीं भी वाहन नहीं रोके जाते। वाहन पूरी तरह से बंद किए जाते हैं। इसमें सांस लेने के लिए हवा तक नहीं मिलती। नतीजा, दम घुटने से कई मवेशी मर जाते हैं।

दो महीने पहले इटारसी पुलिस ने मवेशियों से भरा ट्रैवलर वाहन पकड़ा था। गो-रक्षकों से बचने के लिए कंटेनर, ट्रैवलर, जीप, टैक्सी, टैंकरों को ऐसे बनाया जाता है कि पता ही नहीं चलता इनके अंदर मवेशी हैं।
दो महीने पहले इटारसी पुलिस ने मवेशियों से भरा ट्रैवलर वाहन पकड़ा था। गो-रक्षकों से बचने के लिए कंटेनर, ट्रैवलर, जीप, टैक्सी, टैंकरों को ऐसे बनाया जाता है कि पता ही नहीं चलता इनके अंदर मवेशी हैं।

सीधे कत्लखाने भेजते हैं मवेशी

गो रक्षकों की मानें तो आवारा मवेशियों को चोरी कर कत्लखाने भेजा जाता है। इसमें परिवहन के अलावा तस्करों को ज्यादा खर्च नहीं देना करना पड़ता है। गो-रक्षकों से बचने के लिए कंटेनर, ट्रैवलर, जीप, टैक्सी, टैंकरों को ऐसे बनाया जाता है कि पता ही नहीं चलता इनके अंदर मवेशी हैं। गुमराह करने के लिए देवी-देवताओं के चित्र, झंडे-बैनर तक लगाए जाते हैं। कई बार वाहनों में फर्जी नंबर प्लेट भी रहती है।

मवेशियों को ले जाते गुरुवार पकड़े गए ट्रक ड्राइवर शेख लाला (सफेद शर्ट) ने यह कहा था कि मवेशियों को कत्लखाने ले जा रहा था। उसके साथ दो और लोग थे। पिटाई से मुस्ताक अहमद घायल है। नाजिर अहमद की मौत हो चुकी है।
मवेशियों को ले जाते गुरुवार पकड़े गए ट्रक ड्राइवर शेख लाला (सफेद शर्ट) ने यह कहा था कि मवेशियों को कत्लखाने ले जा रहा था। उसके साथ दो और लोग थे। पिटाई से मुस्ताक अहमद घायल है। नाजिर अहमद की मौत हो चुकी है।

पुलिस ने माना- लोकल नेटवर्क हो सकता है शामिल

गो तस्करी का कारोबार राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक फैला है। नर्मदापुरम एसपी डॉ. गुरकरन सिंह ने बताया कि गो तस्करी के मामले में लोकल नेटवर्क की तलाश कर रहे हैं। बगैर लोकल सहयोग के यह संभव नहीं है। सक्रिय गो तस्करों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

मॉब लिंचिंग में घायल नाजिर अहमद ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इसके बाद नाजिर अहमद के परिवार वालों का बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि नाजिर ही घर में अकेला कमाने वाला था।
मॉब लिंचिंग में घायल नाजिर अहमद ने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इसके बाद नाजिर अहमद के परिवार वालों का बुरा हाल है। परिवार का कहना है कि नाजिर ही घर में अकेला कमाने वाला था।

महिलाओं का आरोप- पुलिस की मिलीभगत से हो रही गो तस्करी

पुलिस इस मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई है। आरोपियों की गिरफ्तारी और संदेही लोगों से पूछताछ को लेकर उनके परिवारों की महिलाएं गुरुवार को सिवनी मालवा थाने पहुंचीं। उन्होंने पुलिस पर बेवजह परेशान किए जाने के आरोप लगाए। महिलाओं ने कहा कि गो तस्करों में स्थानीय पुलिस की मिलीभगत है। सब पुलिस की जानकारी में होता है। इसके बावजूद पुलिस तस्कर और गाय की हत्या करने वालों को नहीं पकड़ रही। गो तस्कर और गो हत्या रोकने के बजाय पुलिस हमारे लोगों को पकड़ रही है।

नंदरवाड़ा की महिलाओं ने सिवनी मालवा थाने के सामने सड़क पर जाम लिया दिया था। महिला उप निरीक्षक श्रद्धा राजपूत ने महिलाओं को रास्ते से हटाया। इसके बाद महिलाएं थाने के सामने बैठकर नारेबाजी करती रहीं। महिलाओं का कहना था कि जब तक उनके बच्चों को छोड़ा नहीं जाएगा, वो थाने के सामने से नहीं हटेंगी।
नंदरवाड़ा की महिलाओं ने सिवनी मालवा थाने के सामने सड़क पर जाम लिया दिया था। महिला उप निरीक्षक श्रद्धा राजपूत ने महिलाओं को रास्ते से हटाया। इसके बाद महिलाएं थाने के सामने बैठकर नारेबाजी करती रहीं। महिलाओं का कहना था कि जब तक उनके बच्चों को छोड़ा नहीं जाएगा, वो थाने के सामने से नहीं हटेंगी।

बिना किसी पूछताछ के पीटने लगे: ड्राइवर
भीड़ के हमले में घायल ट्रक ड्राइवर शेख लाला ने दैनिक भास्कर को बताया, मंगलवार रात को हमने नंदेरवाड़ा गांव से मवेशी भरे थे। उनको अमरावती ले जा रहे थे। करीब साढ़े बारह बजे बड़ाखड़ के पास 50-60 लोग सड़क पर खड़े मिले। उनके हाथों में डंडे थे। मैंने ट्रक सड़क से नीचे उतार दिया। भीड़ हमारे पास आ गई और बिना किसी पूछताछ के पीटना शुरू कर दिया। भीड़ लाठी-डंडों से पीटती रही। वे लोग मारो-मारो चिल्लाते रहे। हमारे लहूलुहान और अधमरा होने तक रुके नहीं। हम जान की भीख मांगते रहे। कुछ देर बाद पुलिस आ गई। हमें अस्पताल ले जाया गया। लेकिन ​​​नाजिर अहमद की मौत हो गई।

यह है पूरा मामला

मंगलवार रात नंदरवाड़ा गांव से 3 लोग 30 मवेशियों को ट्रक में ठूंस-ठूंसकर महाराष्ट्र के अमरावती ले जा रहे थे। यहां से करीब 10 किमी दूर बराखड़ गांव में गो सेवकों और ग्रामीणों ने ट्रक रोक लिया। पता चला कि ट्रक में दो गायों की मौत हो गई। यह देख भीड़ ने तीनों पर हमला कर दिया। इसका वीडियो भी सामने आया। वीडियो में आक्रोशित भीड़ लाठी-डंडों से पीटती दिख रही है। कुछ लोग मारो-मारो चिल्ला रहे हैं। वीडियो में कुछ लोग ट्रक वालों को बचाने का प्रयास भी करते दिख रहे हैं। वहां मौजूद कुछ लोगों ने बचाया नहीं होता तो दो और लोगों की मौत हो सकती थी। तीनों घायलों को अस्पताल ले जाया गया, यहां नाजिर अहमद की मौत हो गई। ट्रक ड्राइवर शेख लाला और उसका साथी मुस्ताक अहमद जख्मी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में नाजिर की मौत की वजह सांस नली में उल्टी घटकना सामने आई है।

बता दें, इससे पहले जिले के माखननगर में भी पशुओं के अवैध परिवहन की घटना सामने आती रही हैं। गो रक्षकों का आरोप है कि उनकी सूचना को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती, जब वाहन पकड़े जाते हैं, तब पुलिस मजबूरी में आती है।

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