1 वोट से जीतीं कांग्रेस की राधा बाई:गृहणी संभालेंगी जिला पंचायत की कमान, राधा बाई अध्यक्ष और बुंदकुंअर बनी उपाध्यक्ष

नर्मदापुरम13 दिन पहले

जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए दो प्रत्याशियों ने फार्म भरे थे। भाजपा से योजनगंधा सिंह जूदेव और कांग्रेस से राधा बाई पटेल ने नामांकन किया था। भाजपा ने अनुभवी योजनगंधा को प्राथमिकता दी थी। भाजपा का पलड़ा भारी माना जा रहा था क्यूंकि 15 में से 10 सदस्य भाजपा के थे। मगर अब कांग्रेस की राधा बाई पटेल चुनाव जीत चुकी हैं। भाजपाई समर्थित जिपं सदस्यों ने भीतरघात किया। क्रास वोटिंग की वजह से जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अब कांग्रेस के नाम हो चुका है। राधा बाई को कुल 8 वोट और योजनगंधा सिंह को 7 वोट मिले। राधाबाई कुल 1 वोट से जीती हैं। इसके बाद भारत माता की जय और जय श्री राम के नारे लगाए गए। 12 साल बाद यहां कांग्रेस की जिला पंचायत में वापसी हुई है।

राधा बाई पटेल पूर्व जनपद अध्यक्ष है। वे 2015 में सिवनी मालवा अध्यक्ष बनी थी। उनके पति तीन बार के सरपंच, एक बार के जिला पंचायत सदस्य रह चुके हैं। हांलाकि, कांग्रेस में किसी बड़े पद पर नहीं रहे। पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ता है। सुधीर पटेल पिछड़ा वर्ग से है और पत्नि राधा बाई पटेल आदिवासी समाज से है। जिला पंचायत अध्यक्ष सीट ST महिला के लिए आरक्षित है।

वहीं भाजपा की बुंदकुअर बैंकर निर्विरोध जिला पंचायत उपाध्यक्ष बनी हैं। इस बार अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ही पदों पर गृहणियों का कब्जा रहा है।

भाजपा की बुंदकुअर बैंकर बनीं उपाध्यक्ष।
भाजपा की बुंदकुअर बैंकर बनीं उपाध्यक्ष।

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इकठ्ठे हुए कांग्रेसी, जीत के बाद दिखे जिलाध्यक्ष

जिपं चुनाव के लिए सुबह से भाजपा के अलावा कांग्रेस एकजुट दिखे। जिलेभर के कांग्रेस के दिग्गज नेता जिला पंचायत परिसर में नजर आएं। प्रदेश सचिव पुष्पराज पटेल, किसान कांग्रेस जिला अध्यक्ष विजय बाबू चौधरी, समीर शर्मा, प्रदेश प्रवक्ता केलू उपाध्याय, नगर अध्यक्ष राकेश शर्मा, सोहागपुर से संतोष मालवीय, शिवराज चंद्रोल सहित कई कांग्रेसी चुनाव के दौरान मौजूद रहे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान पुष्पराज पटेल ने आरोप लगाया कि कुछ भाजपाई पीछे के गेट से कागज ले रहे। आपकी सत्ता होते हुए भी पीछे के रास्ते का उपयोग क्यों कर रहे। इस पर भाजपा नेता पीयुष शर्मा ने कहा हमारी सत्ता है, इतना तो करेंगे। जीत की जानकारी मिलते ही जिलाध्यक्ष सत्येंद्र फाैजदार सहित तमाम कांग्रेस नेती, कार्यकर्ता जयकारों के नारे लगाने लगे। जीत का जुलूस निकालकर सेठानी घाट पहुंचे। मां नर्मदा का पूजन कर आशीर्वाद लिया।

अध्यक्ष पद की सीट अनुसूचित जनजाति महिला के लिए रिजर्व थी। भाजपा के पास एसटी वर्ग की तीन महिला सदस्य हैं। भाजपा कार्यालय में रात करीब 10 बजे तक नाम को लेकर मंथन चल रहा था। भाजपा संगठन के प्रभारी अलकेश आर्य ने बताया कि सभी सदस्यों से रायशुमारी कर ली गई है। साथ ही सांसद, विधायकगण और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिरियों से परामर्श उपरांत अध्यक्ष पद के लिए नाम का पैनल प्रदेश कार्यालय भेज दिए है। प्रदेश कार्यालय मेंडेट का निर्णय योजनगंधा के लिए आया। भाजपा समर्थित तीन सदस्यों के क्रास वोटिंग की वजह से राधा पटेल की जीत हुई और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष योजनगंध की हार हुई।

जिला पंचायत अध्यक्ष की दौड़ में ये थे दावेदार

  • योजनगंधा सिंह जुदेव : जिला पंचायत के वार्ड नंबर 14 से भाजपा समर्थित प्रत्याशी योजनगंधा विजयी हुई है। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी खेमकुमारी सिंह जुदेव को 772 वोट से हराया। नर्मदापुरम बनखेड़ी के उमरधा गांव की योजनगंधा फतेहपुर स्टेट नदीपुरा आदिवासी राजघराने की बहू है। जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रह चुकीं योजनगंधा व उनके परिवार का राजनीतिक बैकराउंड अच्छा है। उनकी बेटी जागृति सिंह जुदेव उमरधा से निर्विरोध सरपंच चुनी गई है। पति महेंद्र सिंह जुदेव भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के जिला अध्यक्ष व संघ परिवार से जुडे है। राजनीति अनुभव के आधार पर अध्यक्ष के लिए उनके नाम पर मुर्हूर लग सकती है। हालांकि जिपं चुनाव में सबसे छोटे अंतर से जीतने वाली सदस्य है।
भाजपा समर्थित योजनगंधा सिंह हारीं।
भाजपा समर्थित योजनगंधा सिंह हारीं।
  • राधा सुधीर पटेल : वार्ड नंबर 3 से राधा सुधीर पटेल (गौर) विजयी हुई है। राधा पटेल ST वर्ग से आती है। वे जनपद अध्यक्ष भी रह चुकी है। ओबीसी और एसटी वर्ग के जातीय समीकरण के कारण मुकाबला रोचक रहा। राधा पटेल ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी को 3016 वोटों से हराया। भाजपा जिलाध्यक्ष व पीयुष शर्मा जिपं सदस्य को वोटिंग से पहले समझाते दिखे।

राधा बाई को पति ने बताया था बीमार

जिला पंचायत अध्यक्ष की दावेदार राधा बाई को पति ने बीमार बताया है। कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी राधा बाई पटेल गौर के पति सुधीर पटेल ने आवेदन देकर उनके साथ वोट करने की अनुमति मांगी है। हांलाकि राधा बाई के पति को जाने से रोका जा रहा है। तीन बार पत्र लिखने के बावजूद भी उसमें सुधार का कहकर उन्हें जाने से रोका गया।

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