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आरक्षण ने बदली किस्मत:90% मुस्लिम आबादी वाली ग्राम पंचायत में आदिवासी महिला बनी सरपंच, 14 पंच भी निर्विरोध निर्वाचित

नरसिंहपुर2 महीने पहले

नरसिंहपुर जिले की करेली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत रॉकई में एक महिला निर्विरोध सरपंच चुनी गई। इसके पीछे का कारण आरक्षण है। दरअसल रॉकई में 80 से 90% मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं। ग्राम पंचायत चुनाव में आज तक निर्विरोध सरपंच नहीं चुना गया। इस बार आरक्षण के चलते रॉकई में अनुसूचित जन जाति की आदिवासी महिला निर्विरोध सरपंच बनी है।

अनुसूचित जनजाति का केवल एक ही परिवार

दरअसल इस ग्राम पंचायत में अनुसूचित जनजाति का का केवल एक ही परिवार निवास करता है। जो गांव में निवास नहीं रहता, परिवार पास के गांव पिपरिया में रहता है। इनके पास करीब पांच एकड़ जमीन रॉकई में ही है, लेकिन कर्ज के चलते जमीन को गिरवी रख दिया है। सरपंच बनी महिला सुनीता की सास पिपरिया में निवास करके मजदूरी करती है।

सुनीता बाई और पति पुणे शहर में मजदूरी का काम करते थे, लेकिन आरक्षण होने के चलते गांव के लोगों ने एकजुट होकर सुनीता को सरपंच बनाने का निर्णय लिया। मुसलमान समाज के लोगों के साथ पूरे गांव ने पुणे में मजदूरी कर रही सुनीता को अपने गांव बुलाया और सरपंच घोषित कर दिया।

भाग्य में जो लिखा वो हो गया

2600 मतदाता वाले इस गांव में 14 वार्ड हैं, जिसमें सभी पंच भी सर्वसम्मति से निर्विरोध निर्वाचित हुए है। सरपंच बनी सुनीता का कहना है कि उन्होंने सपने में कभी नहीं सोचा था कि वह कभी सरपंच बनेंगी। उनकी किस्मत में लिखा था। सुनीता की सरपंच बनने से उनकी सास विनीता का कहना है कि मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले हम लोगों के भाग्य में यह लिखा था और वह हो गया।

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