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शिवराज सरकार का बड़ा फैसला:सरकारी भर्तियों-परीक्षाओं में 27% OBC आरक्षण लागू; MPPSC, चिकित्सा शिक्षा और शिक्षकों की भर्ती पर रहेगी रोक

मध्य प्रदेश10 महीने पहले
  • पूर्व मंत्री बिसेन होंगे पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष

शिवराज सरकार ने मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं में 27% आरक्षण लागू कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि जिन परीक्षाओं और भर्ती पर हाईकोर्ट ने लगाई हैं, उनमें रोक रहेगी।

बता दें कि पीजी NEET 2019-20, PSC, मेडिकल अधिकारी भर्ती और शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है। इस आदेश के बाद अब मध्य प्रदेश में 64 विभागों में एक लाख से ज्यादा खाली पद भरने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।

15 महीने की कमलनाथ सरकार ने पिछड़ा वर्ग का आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27% किया था। इस मामले में पहले मार्च 2019 में अध्यादेश लाकर सरकार ने बढ़ा हुआ आरक्षण लागू किया, जिसे हाईकोर्ट ने स्टे कर दिया। इसके बाद इस मामले को उस दौरान तत्कालीन सरकार द्वारा कैबिनेट से अनुमोदन के बाद जुलाई 2019 में विधानसभा से पारित कराया और प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27% आरक्षण लागू किया।

कानून लागू होने के बाद लगी 6 याचिकाएं
इस कानून के लागू होने के बाद जैसे ही सरकारी भर्तियां शुरू हुई उनके खिलाफ हाईकोर्ट में 6 याचिकाएं दायर हो गई। कोर्ट के द्वारा बढ़े हुए आरक्षण पर रोक लगाते हुए 14% आरक्षण दिए जाने की बात कही है। इधर, सरकार का कहना है कि चूंकि कानून पर कोर्ट की तरफ से किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई है। हाईकोर्ट ने लोक सेवा आयोग, चिकित्सा शिक्षा और शिक्षकों की भर्ती में 14% ही ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने को लेकर अंतरिम आदेश दिया है।

हाईकोर्ट में हो रही है सुनवाई
इस मामले में राज्य सरकार की ओर से कानून के जानकारों से राय ली गई थी। इसमें यह बात सामने आई है कि चूंकि मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण दिए जाने को लेकर बनाए गए कानून पर कोई रोक नहीं है, सिर्फ 6 याचिकाएं जिन पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो रही है, उन पर 14% आरक्षण रखने का अंतरिम आदेश दिया है। इसलिए पिछड़ा वर्ग को आरक्षण दिए जाने का प्रदेश में कानून लागू है और इस वर्ग को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में बढ़े हुए आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है।

एडवोकेट जनरल ने रखा था पक्ष
इसके बाद मप्र के एडवोकेट जनरल पुरुषेन्द्र कौरव ने इसको लेकर समान्य प्रशासन विभाग को सुझाव दिया था। कौरव ने कहा था कि सरकारी नियुक्तियों और प्रवेश परीक्षाओं में OBC को 27% आरक्षण दे सकती है। हाईकोर्ट ने सिर्फ 6 प्रकरणों में ही रोक लगाई है। अन्य मामले में सरकार स्वतंत्र हैं।

उन्होंने कहा कि सरकारी नियुक्तियों और प्रवेश परीक्षाओं में OBC को बढ़ा हुआ आरक्षण देने पर कोई रोक नहीं है। हाईकोर्ट ने सिर्फ पीजी NEET 2019-20, PSC, मेडिकल अधिकारी भर्ती और शिक्षक भर्ती में रोक लगाई है। इसके अलावा सभी भर्तियों और परीक्षाओं में 27% OBC आरक्षण दिया जा सकता है।

सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव विनोद कुमार के मुताबिक राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग के आरक्षण के संबंध में सुझाव मांगा था, उस पर महाधिवक्ता मध्यप्रदेश की ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी गई है, जिसके अनुसार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में इस वर्ग के लिए 27% आरक्षण देने का आदेश जारी किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाधिवक्ता के सुझाव के अनुसार ही आगे भर्तियां की जाएंगी।

पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष होंगे पूर्व मंत्री बिसेन

पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया गया है। इसका अध्यक्ष गौरीशंकर बिसेन को बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने इसी साल 15 अगस्त को आयोग के गठन की घोषणा की थी। गुरुवार देर शाम इस संबंध में आदेश निकाला गया।

हाईकोर्ट में 20 सितंबर को सुनवाई
बता दें कि पीजी NEET 2019-20, PSC, मेडिकल अधिकारी भर्ती और शिक्षक भर्ती को लेकर लगाई गई याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 सितंबर की तारीख तय की है। कोर्ट में ओबीसी को 27% आरक्षण देने पर स्टे ऑर्डर के जरिए लगाई गई रोक पर 1 सितंबर को अंतिम बहस हुई। कोर्ट ने फिलहाल अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है।

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