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लोकसभा चुनाव में कालेधन का लेनदेन:SC के पुराने फैसलों का हवाला देकर कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में आरोपी अफसर, सरकार को आरोप पत्र का जवाब भी देंगे

भाेपाल8 महीने पहले
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लोकसभा चुनाव में कालेधन के लेनदेन मामले में आरोपी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर सरकार की कार्रवाही को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। - Dainik Bhaskar
लोकसभा चुनाव में कालेधन के लेनदेन मामले में आरोपी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर सरकार की कार्रवाही को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है।
  • गृह विभाग ने 10 जनवरी को सीबीडीटी की रिपोर्ट सचिवालय भेजकर आगे की कार्रवाई करने की अनुमति मांगी थी केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को तीनों आईपीएस अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुमति दी थी

लोकसभा चुनाव में कालेधन के लेनदेन मामले में आरोपी अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर सरकार की कार्रवाही को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही ये अफसर सरकार द्वारा दिए गए आरोप पत्र का जवाब भी देंगे। दो दिन पहले गृह विभाग ने 3 आईपीएस अफसर वी. मधुकुमार, सुशोवन बनर्जी व संजय वी. माने और राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी अस्र्ण मिश्रा को आरोप पत्र देकर 15 दिन में जवाब मांगा था।

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय प्रत्यक्षकर बोर्ड (सीबीडीटी) की रिपोर्ट के आधार पर इन अफसरों से लेनदेन को लेकर सवाल किए गए हैं। इससे पहले आरोपी अफसरों ने भी अपने बचाव में सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि आयकर की अप्रेजल रिपोर्ट के आधार पर सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि अप्रेजल रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जा सकता है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला भी दिया गया था।

इन अफसरों को आरोप पत्र देने में गृह विभाग ने डेढ़ माह का वक्त लगा दिया। दरअसल, विभागीय कार्रवाई की फाइल एक माह से मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी हुई थी। इसके चलते गृह विभाग इन अफसरों को आरोप पत्र जारी नहीं कर पा रहा था। गृह विभाग ने 10 जनवरी को सीबीडीटी (केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड) की रिपोर्ट के साथ आगे की कार्रवाई करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव सीएम सचिवालय भेजा था।

बता दें कि इस मामले में केंद्र सरकार ने 8 जनवरी को तीनों आईपीएस अफसरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुमति राज्य सरकार को दे दी थी। लेकिन हालत यह है कि एक माह बाद भी इन अफसरों की विभागीय जांच शुरू नहीं हो पाई है। इससे पहले चुनाव आयोग ने सरकार से सीबीडीटी की रिपोर्ट पर एक्शन लेने के निर्देश दिए थे। इस पर सरकार ने आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को एफआईआर दर्ज करने को कहा था। ईओडब्ल्यू ने 2 जनवरी को इसकी प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।

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