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सिंधिया का सरकार में दबदबा:एडीजी ग्वालियर नहीं ले पा रहे चार्ज; और मंत्री जी की कोरोना की सबसे तेज रिकवरी

मध्यप्रदेश5 दिन पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का सरकार में दबदबा कायम है। सिंधिया ने पहले अपने समर्थकों को निगम मंडल का अध्यक्ष बनवाया और अब प्रशासन में उनका दखल देखने को मिला है। खासकर ग्वालियर-चंबल में उनकी सहमति के बिना न तो कोई अधिकारी हटाया जा रहा है और ना ही सरकार किसी को अपनी मर्जी से पदस्थ कर पा रही है।

हाल ही में वरिष्ठ पुलिस अफसरों के प्रमोशन हुए और उनकी नई पोस्टिंग की गई। गृह विभाग में पदस्थ आईजी रैंक के अधिकारी श्रीनिवास वर्मा को प्रमोट कर एडीजी ग्वालियर बनाया गया। आदेश मिलने के बाद वे तत्काल मंत्रालय में गृह सचिव के पद से रिलीव हो गए, लेकिन उन्हें अभी तक नई पदस्थापना का चार्ज नहीं मिला है। सुना है कि महाराजा की सहमति के बिना यह आदेश हुआ था। लिहाजा वर्मा अधर में लटक गए हैं। उनकी जगह मंत्रालय में आईपीएस अफसर गौरव राजपूत ने चार्ज ले लिया है। वर्मा को नए पद का चार्ज नहीं मिला तो वे छुट्टी पर चले गए हैं।

सरकार में रहकर सरकार को ही चैलेंज

एक मंत्री को कोरोना हो गया है, लेकिन वे रिपोर्ट आने के पहले सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। मंत्री जी हर कार्यक्रम में कहते सुने गए कि मास्क लगाना अनिवार्य है और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखें। जब उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो सोशल मीडिया में उनकी खूब आलोचना हुई कि मंत्री जी को बच्चों के कार्यक्रम में नहीं जाना चाहिए था। सुना है कि मंत्री जी ने इससे बचने के लिए अगले ही दिन निगेटिव रिपोर्ट बनवा ली। यह रिपोर्ट उज्जैन के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज ने जारी की है। जबकि कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट सरकारी अस्पताल ने जारी की थी। यानी सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट को ही मंत्री जी ने चैलेंज कर दियाl

अफसरों से हो सकते हैं सवाल-जवाब

एक पूर्व मंत्री ने अपने फार्म हाउस में नए साल की पार्टी अरेंज की थी, जिसमें उनके मित्र और कुछ चुनिंदा अफसरों को ही आमंत्रित किया गया था। इस पार्टी की खास बात यह है कि इसमें हरियाणा की डांसर जिसने मुंबई तक में धूम मचाई को बुलाया गया था। सुना है कि जो अफसर इस पार्टी में गए थे उनके नाम मुख्य सचिव तक पहुंच गए हैं। अब यह नाम मुख्यमंत्री तक भी पहुंचाने की तैयारी है। इन अफसरों से जवाब मांगा जाएगा कि जिला मुख्यालय छोड़कर पार्टी में किसकी इजाजत से गए थे?

सारी मेहनत पर पानी फिर गया

सरकार ने कुछ दिनों पहले ही निगम मंडलों में नियुक्ति की है। प्राधिकरण में हुई नियुक्ति को लेकर स्थानीय नेताओं में आक्रोश है, लेकिन वे विरोध नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि, यहां जिन्हें पदस्थ किया गया है वह पहले से ही पावरफुल हैं। पद पाने के लिए एक नेता ने भोपाल तक संगठन और सरकार के चक्कर काटे, लेकिन सारी मेहनत पर पानी फिर गया। एक नेता ने कहा कि पार्टी में अब नई परंपरा शुरू कर दी है कि जिले के कार्यकर्ताओं की बजाए बाहर के लोगों को पद दिए जा रहे हैं इसका नुकसान तो उठाना ही पड़ेगाl

और अंत में...:पुरानी गाड़ी में सवारी नहीं करेंगे अध्यक्ष जी

दो निगम अध्यक्षों ने पुरानी गाड़ी में सवारी करने से इनकार कर दिया है। दरअसल हुआ यह कि निगम मंडलों में राजनीतिक नियुक्ति नहीं होने के चलते यहां अध्यक्षों के लिए खड़ी गाड़ियां मंत्री इस्तेमाल कर रहे थे।अब यह गाड़ियां वापस निगम मंडलों में पहुंच गई हैं कई अध्यक्षों ने गाड़ियों में घूमना भी शुरू कर दिया है, लेकिन दो अध्यक्षों ने अपना रुतबा बताते हुए मंत्रियों के यहां लगी गाड़ियां तत्काल वापस बुला ली। अब वे चाहते हैं कि उन्हें नई गाड़ियां मिले। सुना है कि डिमांड मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। अब देखना है कि अध्यक्षों को नई गाड़ी मिलेगी या फिर उन्हें पुरानी गाड़ी में ही सवारी करनी होगी?