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MP के 'शहर संग्राम' में ओवैसी की एंट्री:जहां दंगे भड़के या तनाव फैला, वहां लड़ रहे चुनाव; जानिए AIMIM की स्ट्रेटजी

भोपाल3 महीने पहलेलेखक: संतोष सिंह

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल-मुस्लिमीन (AIMIM) मध्यप्रदेश में अलग ही रणनीति से निकाय चुनाव लड़ रही है। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि उसके कुछ स्थानीय नेता ‘दंगे और तनाव की पिच’ पर सियासी फसल काटना चाहते हैं। पार्टी ने खरगोन और बुरहानपुर समेत 7 शहर ऐसे चुने हैं, जहां सांप्रदायिक माहौल ज्यादातर नाजुक रहता है। दो शहरों में मेयर सहित 51 प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें से 49 मुस्लिम हैं। पार्टी से मैदान में उतरने वाले अधिकतर की उम्र 25 से 35 के बीच है। प्रदेश के लिए भी रणनीति मुस्लिमों के इर्द-गिर्द ही है।

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संवेदनशील मालवा-निमाड़ में सबसे अधिक प्रत्याशी

AIMIM ने सबसे अधिक प्रत्याशी संवेदनशील माने जाने वाले मालवा-निमाड़ में उतारे हैं। यहां के जिलों में पिछले डेढ़ साल में 14 से अधिक दंगे और कई बार तनाव की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। खरगोन का दंगा सबसे ताजा है। यही कारण है कि पार्टी ने वहां एक गैर मुस्लिम समेत 7 प्रत्याशी उतारे हैं। वहीं, अक्सर तनावग्रस्त रहने वाले खंडवा में पार्टी ने मेयर और 11 पार्षद पद पर प्रत्याशी उतारे हैं। उधर बुरहानपुर में मेयर के अलावा मुस्लिम बहुल इलाकों में सबसे अधिक 15 पार्षद प्रत्याशी उतारे हैं।

एजेंडे में मुस्लिम-दलित के बाद आदिवासी भी

ओवैसी को साफ पता है कि राजनीति में टिके रहना है, तो लगातार जनाधार बढ़ाते रहना होगा। यूपी में जहां वे मुस्लिमों के साथ दलितों को साथ लाने की कोशिश करते दिखे थे, तो एमपी में वे आदिवासियों की भी बात कर रहे हैं। जबलपुर में ओवैसी ने अपने संबोधन से इसे साफ भी कर दिया। बोले- अल्पसंख्यक समाज हो, आदिवासी हो या दलित हो, जब तक ये कौम अपना लीडर पैदा नहीं करेंगी, तब तक कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा- एमपी में मुस्लिमों, दलित व आदिवासियों के हाल सबके सामने हैं।

कांग्रेस को लग रहा समीकरण बिगड़ने का डर

एमपी निकाय चुनाव में AIMIM की एंट्री ने कांग्रेस प्रत्याशियों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी सबसे अधिक हमलावर भी कांग्रेस पर हैं।

विधानसभा में दो मुस्लिम विधायक

मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल सिर्फ दो मुस्लिम विधायक आरिफ अकील और आरिफ मसूद हैं। दोनों भोपाल से कांग्रेस से जीते हैं। 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 5 और भाजपा ने एक मुस्लिम प्रत्याशी उतारे थे, पर एक ही जीता। 2008 और 2003 में भी कांग्रेस ने 5-5 प्रत्याशी उतारे, पर आरिफ अकील ही जीत पाए थे।

ओवैसी सोमवार को जबलपुर और मंगलवार को भोपाल में प्रत्याशियों का प्रचार करने पहुंचे थे। जबलपुर-भोपाल की सभाओं में ओवैसी ने अपनी लाइन क्लीयर कर दी। ओवैसी ने कहा-AIMIM को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि एक मुस्लिम लीडरशिप तैयार हो। कांग्रेस और भाजपा बताएं कि आखिर देश में गरीब और अशिक्षित मुस्लिम ही क्यों हैं?

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