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OBC आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल:सरकार से पूछा- ग्रिवयांस सेल बनाई थी या नहीं, आपत्तियां बुलाई थीं क्या?

भोपाल5 महीने पहले

मध्यप्रदेश में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत की। इसमें त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव व नगरीय निकाय चुनाव में ओबीसी को 35% आरक्षण देने की सिफारिश की गई है। सरकार की ओर से बताया कि व्यापक रूप से स्टडी की गई है। ट्रिपल टेस्ट पूरा हो रहा है। पहली स्टेज हो गई है। दूसरी और तीसरी स्टेज होना शेष है। इसके साथ चुनाव कराने की मंजूरी दी जाए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा है। कोर्ट तय करेगा कि पंचायत चुनाव में OBC को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा या नहीं।

कोर्ट ने पूछे चार सवाल
कोर्ट ने रिपोर्ट को लेकर सरकार से पूछा कि आपने ग्रिवयांस सेल बनाई थी कि नहीं? आपने जो काम किया है, उस पर लोगों काे आपत्ति दर्ज कराने मौका दिया या नहीं? क्या राज्य स्तर पर अनुशंसाएं की गई थीं? चुनाव क्षेत्र के अनुसार अनुशंसाएं क्यों नहीं की गईं, जबकि चुनाव क्षेत्र के आधार पर सिफारिशें होनी चाहिए थीं। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट अब 10 मई को फैसला सुना सकता है। फैसले में तय होगा कि पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण दिया जाएगा या नहीं।

याचिकाकर्ता सैयद जाफर और जया ठाकुर की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट वरुण ठाकुर ने पक्ष रखते हुए कहा कि चुनाव समय पर और तत्काल होने चाहिए। करीब तीन साल से चुनाव अटके हैं। ऐसे में चुनाव नहीं रोका जाना चाहिए। OBC आरक्षण के साथ चुनाव होते हैं, तो किसी को परेशानी नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को री-प्रेजेंटेशन मिलना चलिए।

ये दो टेस्ट पूरे करने होंगे
ट्रिपल टेस्ट के अनुसार अभी जो दो स्टेज बची हैं, उसमें सरकार को रिपोर्ट का एनालिसिस करके यह एक्सेप्ट करना है कि कितने प्रतिशत आरक्षण, कितनी जगह, कौन सा आरक्षण होगा। इसके अलावा, सरकार को आरक्षण की सीमा तय करनी होगी।

27% आरक्षण देना चाहती है सरकार
पंचायत चुनाव में राज्य सरकार OBC को 27 % आरक्षण देना चाहती है। इसे लेकर प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इससे पहले कोर्ट ने ट्रिपल टेस्ट करने का आदेश दिया था। वहीं, गुरुवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ट्रिपल टेस्ट पूरा किया है या नहीं। कोर्ट अगर ट्रिपल टेस्ट से संतुष्ट नहीं हुई, तो ओबीसी आरक्षण के बिना ही चुनाव कराने के आदेश देगी।

40 मिनट तक रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी
ओबीसी आरक्षण को लेकर नगर विकास एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह की प्रतिक्रिया आई है। सिंह ने बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट में मप्र पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग की 600 पेज से अधिक की डिटेल रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है। आयोग के एडवोकेट पीएस पटवालिया, निखिल जैन और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा 40 मिनट तक रिपोर्ट के बारे में विस्तृत जानकारी कोर्ट में दी है। कोर्ट में सरकार की तरफ से पर्याप्त तर्कों, आंकड़ों के साथ मजबूती से पक्ष रखा गया है।

कोर्ट को अवगत कराया गया है कि आयोग द्वारा हर एक जिले तथा नगरीय निकायों में ओबीसी की स्थिति का अध्ययन किया और प्रदेश में 48 प्रतिशत मतदाता अन्य पिछड़ा वर्ग के आंकलित किए गए हैं। सरकार की ओर से कोर्ट में प्रदेश में ओबीसी मतदाताओं की संख्या को देखते हुए त्रिस्तरीय ग्रामीण तथा नगरीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग को 35 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का पक्ष मजबूती से रखा गया है।