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ऑनलाइन ठगी का अंतरराज्यीय गिरोह पकड़ा:बालाघाट पुलिस ने किया 20 करोड़ के फ्रॉड का खुलासा, 300 से ज्यादा मोबाइल हैंडसेट जब्त, 8 गिरफ्तार

बालाघाट7 महीने पहले
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​​​​​​फर्जी कॉल करके बैंक खाते से पैसे निकालने और नामी ऑनलाइन काॅमर्शियल कंपनियों से मोबाइल मंगाकर करोड़ों रुपए की धांधली करने वाले गिरोह का बालाघाट पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने करीब 20 करोड़ रुपए का फ्रॉड पकड़ा है। पुलिस ने 8 आरोपियों से 300 से ज्यादा मोबाइल हैंडसेट, 10 लाख नकद जब्त किया है। बड़े स्तर पर चल रहे ऑनलाइन ठगी के तार एक-दो नहीं बल्कि 18 से अधिक राज्यों से जुड़े हैं। अब तक इस नेटवर्क के 8 मुख्य संचालकों को बालाघाट, झारखंड के रांची, सरायकेला, देवगढ़ और आंध्रप्रदेश के चित्तूर से गिरफ्तार किया है। इनमें दो आरोपी बालाघाट के हैं।

बालाघाट एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि इस नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए आयकर विभाग और ईडी से संपर्क किया जा रहा है। इस मामले में चरणबद्ध तरीके से सब पर कार्रवाई की जाएगी।

कई चरणों में चल रहा था नेटवर्क

एसपी ने बताया कि इस नेटवर्क में 700 से अधिक ऑपरेटर थे, जो पढ़े-लिखे और टेक्नोलॉजी के जानकार हैं। ये सभी ओटीपी धोखाधड़ी, क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी, ई-कॉमर्स धोखाधड़ी, कालाबाजारी, टैक्स चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग आदि अवैध कामों से जुड़े हैं।

ऐसे करते थे फर्जीवाड़ा

साइबर अपराधियों का ये गिरोह बड़ी ही चालाकी से काम को अंजाम दे रहा था। सबसे पहले यह गिरोह अमेजन, फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों से फर्जी पते दर्ज कराकर आईफोन समेत बड़ी कंपनियों के मोबाइल बुक करते थे। इसके बाद बैंककर्मी बनकर किसी व्यक्ति को फोन करके उसे बैंक अकाउंट बंद होने का डर दिखाकर ओटीपी साझा करने का दबाव डालते थे। अपराधियों की बातों में आकर लोग अपना ओटीपी शेयर करते थे। उसी ओटीपी के जरिए ये चालबाज अपराधी ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए महंगे मोबाइल खरीदकर पीड़ित के बैंक खाते से पैसे गायब कर देते थे। जब पीड़ित के मोबाइल पर ऑनलाइन खरीदी का मैसेज आता था, तब उसे इस फर्जीवाड़े का पता चलता था। इधर ठग महंगे मोबाइल को फर्जी बिल बनाकर बेच देते थे।

बालाघाट के दो अपराधियों ने खोली परतें

दो दिन पूर्व मोबाइल की फर्जी खरीद-फरोख्त और धोखाधड़ी के मामले में बालाघाट कोतवाली पुलिस ने दो आरोपियों भटेरा निवासी मनोज राणा और किरनापुर निवासी हुकुम बिसेन को गिरफ्तार किया था। जांच में दोनों के पास से 7 लाख रुपए के करीब 74 मोबाइल हैंडसेट बरामद हुए। जब पुलिस ने उनसे कड़ाई से पूछताछ की तो नेटवर्क का लिंक झारखंड में मिला। पूछताछ में पता चला कि गिरोह में छह सदस्य और हैं, जिसमें 4 झारखंड के और 2 आंध्रप्रदेश के रहने वाले हैं। बालाघाट पुलिस ने बताया कि पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड देवघर (झारखंड) निवासी संतोष महतो है। इसके बाद मप्र पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए झारखंड पुलिस से संपर्क किया।

आरोपियों से जब्त क्रेडिट कार्ड।
आरोपियों से जब्त क्रेडिट कार्ड।

मप्र पुलिस ने झारखंड के तीन शहरों में मारे छापे

मामले की कड़ी मिलते ही बालाघाट के कोतवाली थाने की पुलिस ने झारखंड के रांची, जमशेदपुर और देवघर में छापामार कार्रवाई की। गिरोह का सरगना देवघर से मिला। वहीं, सुशांत अग्रवाल और प्रभात कुमार को अरगोड़ा थाना, रांची से, विकास उर्फ नितिन कुमार को सरायकेला से गिरफ्तार किया गया। इस मामले में अब तक छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। वहीं, आंध्रप्रदेश के चित्तूर निवासी हिर और श्रवण कुमार को बालाघाट पुलिस ने आंध्रप्रदेश जाकर गिरफ्तार किया है।

आरोपियों से यह मिला

पुलिस ने आरोपियों के पास से 300 से ज्यादा मोबाइल हैंडसेट, 10 लाख रुपए नकद, 75 से अधिक क्रेडिट कार्ड, हार्ड डिस्क, लैपटॉप, टीवी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। 30 से ज्यादा फ्रीज बैंक खातों की जानकारी भी मिली है।

ये हैं शातिर अपराधी

- संजय मेहतो (देवघर, झारखंड)

- हुकुम सिंह बिसेन (बालाघाट, मप्र)

- मनोज राणा (बालाघाट, मप्र)

- सुशांत अग्रवाल (रांची, झारखंड)

- प्रभात कुमार (रांची, झारखंड)

- विकास उर्फ नितिन कुमार (सरायकेला, झारखंड)

- हरि (चित्तूर, आंध्रप्रदेश)

- श्रवण कुमार (चित्तूर, आंध्रप्रदेश)

18 राज्यों की पुलिस के मदद से मिली लीड

झारखंड, आंध्रप्रदेश पुलिस के साथ 18 राज्यों के साइबर सेल के सहयोग से मेजर नेटवर्क ब्रेक करने में सफलता मिली है। इसमें अलग-अलग फ्रॉड में 700 से ज्यादा संदेही हैं। इन्होंने चार-पांच महीनों में करीब 20 करोड़ का फर्जीवाड़ा किया है। ई-कॉमर्स से मंगाया गए सामान की कालाबाजारी की गई है। कुछ मामलों में ऑनलाइन क्रेडिट कार्ड से पैसे निकाले गए हैं। आगे की जांच के लिए टीम गठित की गई है।

अभिषेक तिवारी, पुलिस अधीक्षक, बालाघाट

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