MP में देसी सांडों की नसबंदी का आदेश वापस:विरोध के बाद सरकार बैकफुट पर; कांग्रेस का तंज- यह हो क्या रहा है, सरकार चल रही है या सर्कस‌‌?

भोपाल7 महीने पहले
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एमपी में विरोध के बाद सांडों की नसबंदी का विरोध किया जा रहा है। - Dainik Bhaskar
एमपी में विरोध के बाद सांडों की नसबंदी का विरोध किया जा रहा है।

राज्य सरकार के पशुपालन विभाग का गांवों के निकृष्ट (अनुपयोगी) सांडों की नसबंदी के आदेश का मामला गरमाने के बाद सरकार बैकफुट पर आ गई है। सरकार ने विरोध के 24 घंटे के अंदर नसंबदी के आदेश को वापस ले लिया है। इस संबंध में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के संचालक डॉ. आरके मेहिया ने बुधवार को आदेश जारी किया।

बता दें सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने मामले को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पशुपालन मंत्री प्रेम सिंह पटेल के सामने उठाते हुए आदेश वापस लेने की मांग की थी। सांसद ने कहा था कि इस तरह तो गोवंश ही खत्म हो जाएगा। उन्होंने नसबंदी करने के तरीके पर भी सवाल उठाए थे।

कांग्रेस ने कसा तंज

वहीं, नसबंदी रोकने का आदेश जारी होने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेन्द्र सलूजा ने ट्वीट किया कि यह हो क्या रहा है, सरकार चल रही हे या सर्कस‌‌? राेज सुबह अजीबोगरीब आदेश निकलते है और शाम होते तक निरस्त? पहले मदिरा की खपत बढ़ाने का आदेश निकला,कांग्रेस के विरोध के बाद निरस्त। और अब सांडो के नसबंदी का आदेश भी कांग्रेस के विरोध के बाद निरस्त। ब्यूरोक्रेसी इसीलिए निशाने पर है।

प्रज्ञा बोलीं- सांडों की नसबंदी षड्यंत्र, सीएम से करेंगी जांच की मांग
देसी सांड की नसबंदी के आदेश विभाग की तरफ से वापस लेने पर सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने कहा कि मुझे लगता है कि यह आदेश कोई आंतरिक षड्यंत्र है। इससे सावधान रहने की जरूरत है। देसी गौवंश को नष्ट नहीं किया जा सकता। सांसद ने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मामले की जांच कराने की मांग करेंगी।

क्या है मामला

पशुपालन विभाग की तरफ से 29 सितंबर 2021 को जिलो को आदेश जारी किए थे कि निकृष्ट (अनुपयोगी) सांडों की नसबंदी करना सुनिश्चित किया जाए। आदेश में 4 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक नसबंदी अभियान चलाने के निर्देश दिए गए थे। सरकारी आकड़े के अनुसार प्रदेश में करीब 12 लाख सांड है।

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