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भोपाल में कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से LIVE:होम आइसोलेट संक्रमितों के लिए 30 डॉक्टर्स की ड्यूटी; अधिकतर का सवाल- लक्षण ही नहीं तो पॉजिटिव कैसे?

भोपाल7 महीने पहले

राजधानी भोपाल में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे है। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी भोपाल में कोविड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर फिर एक्टिव हो गया है। कॉल सेंटर में 100 कम्प्यूटर टर्मिनल और एक मेगा स्क्रीन लगाई गई है। यहां पर टीमें 16 से 24 घंटे काम करती है। जो लोगों की समस्याओं का समाधान करने के साथ ही नए संक्रमितों के इलाज से संबंधित जानकारी के साथ ही होम आइसोलेशन के मरीजों की वीडियो कॉलिंग के जरिए निगरानी भी कर रही है। यहां काम कर रहे डॉक्टरों ने बताया कि होम आइसोलेशन के मरीजों को गले में हल्की खरास, कफ की शिकायत है। कई लोग यह सवाल भी पूछते है कि हमें कोई सिम्टम नहीं है तो पॉजिटिव कैसे आ गए?

ऐसे काम करता है कमांड सेंटर
स्मार्ट सिटी के सीईओ अंकित अस्थाना ने बताया कि कोविड प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन की तरफ से कोविड कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है। इसमें चार अलग-अलग वर्टिकल है, जो अलग-अलग तरीके से काम करते है।

  • 1 पॉजिटिव लाइन लिस्ट टीम- यह सुबह 8 से 10 बजे तक काम करती है। टीम वॉर्ड और एसडीएम के इलाके के अनुसार मरीजों का डाटा बनाने काम करती है। साथ ही उनके लक्षण के आधार पर उनको होम आइसोलेशन और अस्पताल में भर्ती होने की सलाह देती है। साथ ही उनका डाटा सार्थक पोर्टल पर अपलोड करती है।
  • 2 डॉक्टरों की कॉलिग टीम- सुबह 8 से रात 11 बजे तक टीम होम आइसोलेशन के मरीजों से प्रतिदिन वीडियो कॉल के माध्यम संपर्क करती है। जहां वॉट्सएप कॉल की सुविधा नहीं है तो उनसे वाइस कॉल के माध्यम से उनका हाल चाल जानती है। उनका तापमान जानती है। किसी अन्य प्रकार की दिक्कत आ रही है तो उसकी जानकारी लेती है। यदि ऐसा लगता है कि किसी के गंभीर बनने की संभावना है तो उसको आरआरटी के माध्यम से अस्पताल में भर्ती कराया जाता है।
  • 3- 1075 हेल्पलाइन नंबर - यह टीम 24*7 काम करती है। आम जनता के विभिन्न प्रकार के कोविड से संबंधित प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान करती है। इसमें वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी, या घर के पास स्थित कोविड के अस्पताल में बेड की उपलब्धता समेत अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
  • 4- वैक्सीनेशन के लिए प्रेरक टीम- यह टीम सुबह 8 से रात 10 बजे तक काम करती है। ऐसे लोग जिन्होंने वैक्सीन का पहला डोज लगाया है, लेकिन उनका दूसरा डोज ड्यू हो चुका है। उनको कॉल करके प्रेरित करती है कि आप पास के वैक्सीनेशन सेंटर पर जाकर टीका लगाएं।

1 डॉक्टर 12 से 15 मरीजों से बात करते हैं
सीईओ अंकित अस्थाना ने बताया कि एक डॉक्टर एक घंटे में 12 से 15 होम आइसोलेशन के मरीजों से बात करते है। अभी हमारे पास होम आइसोलेशन में ही मरीज ज्यादा है। उनमें खांसी, कफ और सर्दी के लक्षण है। यदि किसी को भी कोविड से संबंधित कोई जानकारी चाहिए तो वह 1075 पर कॉल करके प्राप्त कर सकते है।

ऐसे सवाल पूछते है कॉल सेंटर पर
इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर की प्रभारी डॉ. संगीता टॉक ने बताया कि 1075 पर अभी 400 से 500 कॉल आ रहे है। अधिकतर लोगों के वैक्सीनेशन को लेकर सवाल होते है। सर्टिफिकेट कहां मिलेगा, प्रिकॉशन डोज कितने दिन बाद लगेगा। बच्चों के लिए वैक्सीन लगाने के लिए स्कूल ठीक है या किसी अन्य सेंटर पर ले जाए। बच्चे को फीवर है तो वैक्सीन लगाना चाहिए या नहीं। मेरी बेटी को मेस्चुरेशन पीरियड चल रहा है तो उसे वैक्सीन लगाना चाहिए या नहीं? बच्चे को सर्दी हो रही है तो वैक्सीन लगाऊं या नहीं? इस तरह के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया जाता है।

मरीजों में गले में खरास और कफ की शिकायत
कमांड सेंटर में कार्यरत आयुष मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनिधि ने बताया कि हम होम आईसोलेशन मरीज का वर्चुअल फॉलोअप वीडियो के माध्यम से लेते है। होम आइसोलेशन के मरीजों में माइल्ड सिम्टम्स है। इसमें गले में खरास और कफ की शिकायत है। कई लोगों में सिम्टम ही नहीं है। वह लोग पूछते है कि हमें तो सिम्टम नहीं है तो फिर पॉजिटिव कैसे आए। हम उनको बताते है कि आप एसिम्टोमेटिक पेसेंट है। आप से संक्रमण फैल सकता है। इसके अलावा उनके लक्षण की जानकारी लेते है।