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  • Bhopal Coronavirus Vaccine Trials Update; People's Hospital Management Gave Clarification On The Questions Raised About The Covixin Trial

पीपुल्स प्रबंधन ने दी सफाई:ट्रायल पर कॉलेज के डीन बोले- हमने 7 दिन तक फोन किए, वॉलंटियर ने कुछ नहीं बताया; कई सवालों पर चुप्पी

भोपाल2 वर्ष पहले
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वॉलंटियर के प्रेस कांफ्रेंस रद्द के बाद पीपुल्स अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कॉलेज के डीन डॉक्टर अनिल दीक्षित भी प्रेस नोट जारी कर सफाई दी। - Dainik Bhaskar
वॉलंटियर के प्रेस कांफ्रेंस रद्द के बाद पीपुल्स अस्पताल प्रबंधन की तरफ से कॉलेज के डीन डॉक्टर अनिल दीक्षित भी प्रेस नोट जारी कर सफाई दी।
  • टीका लगवाने वाले वॉलंटियर के बीमार होने की खबर के 6 दिन बाद प्रबंधन आया सामने

पीपुल्स अस्पताल में कोवैक्सिन ट्रायल को लेकर उठ रहे सवालों पर अब अस्पताल प्रबंधन ने कहा है, कोरोना ट्रायल का टीका लगवाने वालों से लगातार संपर्क किया गया, लेकिन कुछ लोगों ने जानकारी नहीं दी। इन्हीं में से ट्रायल के 9 दिन बाद बीमारी से दीपक मरावी की मौत हो गई।

प्रबंधन के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का कारण कार्डियो रेस्पिरेटरी फैलियर है, जो सस्पेक्टेड पॉइजनिंग के कारण हुआ है। 9 दिन बाद इस तरह मौत होना वैक्सीन से संबंधित होने की संभावना नहीं है। ब्लाइंड ट्रायल होने के कारण भी पता नहीं है कि वॉलंटियर को वैक्सीन लगा या प्लेसिबो। इस संबंध में पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एवं रिसर्च सेंटर भोपाल के डीन डॉक्टर अनिल दीक्षित ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी है।

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पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एवं रिसर्च सेंटर भोपाल के डीन डॉक्टर अनिल दीक्षित ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी है।
पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एवं रिसर्च सेंटर भोपाल के डीन डॉक्टर अनिल दीक्षित ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सफाई दी है।

डॉ. अनिल दीक्षित ने कहा कि भारत बायोटेक इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) व नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के संयुक्त तत्वाधान में तैयार कोवैक्सिन का फेज-3 ट्रायल देश के विभिन्न भागों में नवंबर माह में शुरू हुआ था। भोपाल के पीपुल्स अस्पताल जो कि पीपुल्स कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर से संबद्ध है, को ट्रायल के लिए चयनित किया गया।

सेंटर में 27 नवंबर से ट्रायल प्रारंभ किया गया, क्योंकि यह डबल ब्लाइंड ट्रायल है। इसमें आधे लोगों को वैक्सीन और आधे लोगों को प्लेसिबो लगाया जा रहा है। इसके दो डोज 28 दिन के अंतराल में दी जा रही है। ट्रायल में आईसीएमआर व भारत बायोटेक द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन किया जा रहा है।

संस्थान द्वारा रोजाना निगरानी की जा रही है। 12 दिसंबर को प्रोटोकाल के साथ एक वॉलंटियर को डोज लगाया गया था। उसके बाद 7 दिन तक उनकी जानकारी ली जाती रही, जिसमें उन्होंने तकलीफ नहीं बताई थी।

गत 21 दिसंबर को उनके बेटे ने उनकी मौत की जानकारी दी थी। मेडिको लीगल इंस्टिट्यूट भोपाल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु का कारण कार्डियो रेस्पिरेटरी फैलियर है, जो कि सस्पेक्टेड पॉइजनिंग के कारण हुआ है, बताया गया। वैसे 9 दिन के बाद इस प्रकार मृत्यु का होना वैक्सीन से संबंधित होने की संभावना नहीं लगती है।

ब्लाइंड ट्रायल होने के कारण भी यह ज्ञात नहीं है, वॉलंटियर को कोवैक्सिन लगाया गया या उसे प्लेसिबो लगा। ड्रग एवं क्लिनिकल ट्रायल के नए नियमों के अनुसार किन्हीं भी सीरियस एडवर्स इफेक्ट की रिपोर्ट इंस्टिट्यूट एथिक्स कमेटी (आईसी) एवं सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (सीडीएससीओ) एवं डाटा मॉनिटरिंग सेफ्टी बोर्ड (डीएसएमबी) को देनी होती है, जो प्रावधान के अनुसार है।

अब तक सभी ने किया बचाव

मामला सामने आने के बाद से ही सभी बचाव करते नजर आ रहे हैं, लेकिन जांच की बात नहीं की जा रही। स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर प्रभुराम चौधरी के बाद खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सफाई दे चुके हैं कि यह मामला वैक्सीन ट्रायल से हुई मौत का नहीं है। ट्रायल को लेकर सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए, लेकिन अब तक सवाल उठाने वाले और दर्द झेल रहे लोगों से किसी ने बात तक नहीं की। यहां तक तीन घंटे की जांच के बाद अस्पताल को क्लीन चिट भी दे दी गई।

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