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स्मार्ट सिटी के नए टेंडर पर रोक:निर्माण कार्यों में लापरवाही पर CM शिवराज नाराज, 2019 में हुए टेंडरों की होगी जांच; PWD मंत्री उठा चुके सवाल

मध्य प्रदेशएक महीने पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्मार्ट सिटी भोपाल में बंद पड़े कैमरों और सागर के निर्माणाधीन लाखा बंजारा तालाब की धीमी प्रगति पर अफसरों से नाराजगी जताई। चौहान ने कहा कि वर्ष 2019 में स्मार्ट सिटी मिशन में हुए कार्यों, उनके औचित्य, टेंडर प्रक्रिया, व्यय राशि तथा अनियमितताओं की जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिन निर्माण कार्यों के टेंडरों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। वह कमलनाथ सरकार के दौरान जारी हुए थे। इसे लेकर लोक निर्माण मंत्री गोपाल भार्गव सवाल उठा चुके हैं।

मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस ने यह मामला उठाया था। जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी निर्माण में सौन्दर्यीकरण के स्थान पर उपयोगिता और जनता की सुविधा को प्राथमिकता बनाया जाएगा। कोई भी नया टेंडर नहीं होगा। जो कार्य आरंभ नहीं हुए हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। राशि का मितव्ययी और सही उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे स्वयं सातों स्मार्ट सिटी भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और सतना के जन-प्रतिनिधियों से संवाद करेंगे। सभी सात शहरों में संचालित योजनाओं की वे स्वयं बिन्दुवार समीक्षा करेंगे। उन्होंने शिवराज ने कहा- 10 दिसम्बर को वे सागर में चल रहे प्रोजेक्ट की निरीक्षण करेंगे।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में 6600 करोड़ से 587 योजनाएं संचालित हैं। इसमें से महज 1577 करोड़ के काम पूरे हो पाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट सिटी मिशन, नगर निगम एवं पुलिस सहित नगरीय प्रबंधन से संबंधित विभिन्न एजेंसियों से बेहतर समन्वय सुनिश्चित करें। मिशन में जनता की आवश्यकता और शहर की प्राथमिकता के अनुसार जन-प्रतिनिधियों और नगरवासियों की सलाह से कार्यों की प्राथमिकता तय होगी तथा उसके अनुरूप ही निर्माण कार्य संचालित किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े शहरों के साथ मझौले और छोटे शहरों का नियोजन भी भविष्य की व्यवहारिक आवश्यकताओं के अनुसार किया जाए। स्मार्ट सिटी मिशन के वित्तीय संसाधनों का उपयोग केवल स्मार्ट सिटी तक ही सीमित नहीं रहे। इसके वित्तीय संसाधनों का उपयोग संपूर्ण शहर के विकास में सुनिश्चित किया जाए। मूलभूत कार्यों के लिए स्मार्ट सिटी से नगर निगम या अन्य एजेंसियों को राशि हस्तांतरित करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए।

मंत्री दे चुके हैं अफसरों को फ्री हैंड
कोरोना के लंबे ब्रेक के बाद अब एमपी में स्मार्ट सिटी और मेट्रो रेल के काम में तेज लायी जाएगी. इसका काम तेज गति से करने के लिए जिम्मेदार अफसरों को फ्री हैंड दे दिया गया है। नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेन्द्र सिंह ने विगत दिनों स्मार्ट सिटी और मेट्रो रेल के अभी तक के काम की समीक्षा के लिए सोमवार को भोपाल में बैठक ली थी। जिसमें काम में तेजी लाने के लिए उन्होंने अफसरों को फ्री हैंड दिया था।

उन्होंने कहा था कि भोपाल और इंदौर की तरह अन्य स्मार्ट सिटी भी पीपीपी और कन्वर्जेंस के प्रोजेक्ट बनाएं। स्मार्ट सिटी में पूरे अधिकार आपके पास ही हैं। सभी प्रोजेक्ट समय-सीमा में पूरा करवाने की जिम्मेदारी भी आपकी है। प्रोजेक्ट पर अमल के लिए किसी भी स्तर पर कोताही नहीं होनी चाहिए।

भोपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में घोटाला
भोपाल स्मार्ट सिटी प्रोजेक्‍ट के तहत जमीन नीलामी में भारी गड़बड़ी और घोटाला सामने आ चुका है। इस मामले की शिकायत ईओडब्ल्य में की गई है। EOW अब इस मामले की जांच कर रहा है। हाल ही में भोपाल में स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी ने करोड़ों रुपए की जमीन नीलाम की है। EOW को मिली शिकायत में नीलामी की शर्तों में हेराफेरी कर कई नामी बिल्डर्स को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा है। यह शिकायत उन बिल्डर्स की ओर से की गई है, जिन्हें शर्तें पूरी करने के बाद भी स्मार्ट सिटी में जमीन नहीं मिली।

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नीलामी की शर्तों में हेराफेरी का आरोप
सूत्रों के मुताबिक टीटी नगर इलाके में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत काम चल रहा है। इस इलाके में करीब 100 एकड़ जमीन को बेचा जाना है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 1500 करोड़ रुपए है। इसमें से कुछ जमीन की नीलामी भोपाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी ने पिछले दिनों कर दी है। इस राशि का उपयोग अलग-अलग क्षेत्र के 23 प्रोजेक्ट पूरा करने में किया जाना है। आरोप है कि नीलामी के पहले जमीन पर निर्माण की शर्तें कुछ और थीं, लेकिन नीलामी के बाद जमीन आवंटित होते ही शर्तों को बदल दिया गया।

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