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MP के सियासी मैदान में भी दौड़ेगा 'बुलडोजर’:2023 में सत्ता वापसी के लिए UP लाइन पर भाजपा, शिवराज को 'बुलडोजर बाबा' की तरह करेगी ड्राइव

भोपाल8 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा

उत्तरप्रदेश में बाबा का बुलडोजर कमाल कर गया। अब यही कमाल भाजपा मध्यप्रदेश में करना चाहती है। इसलिए यहां ‘मामा का बुलडोजर’ चलाया जाएगा। इसी लाइन के साथ वो अगले विधानसभा चुनाव में जाने की तैयारी कर रही है। इसके साफ संकेत हाईकमान से मिल गए हैं और शिवराज ने भी इसी स्ट्रैटजी पर काम करना शुरू कर दिया है। हाल ही में उन्होंने एक बयान देते हुए कहा- ‘मामा का बुलडोजर चला है... जब तक बदमाशों को दफन नहीं कर देगा, रुकेगा नहीं।’ (22 मार्च 22, रायसेन का खमरिया गांव)

दरअसल, यह एग्रेशन दिखाने की दो वजह है। इसमें से पहली है UP चुनाव के नतीजे। तमाम अटकलों को खारिज करते हुए बाबा ने बुलडोजर से जो ‘हीरो’ वाली छवि गढ़ी और हार्ड कोर कैंपेन चलाया, उसने सारे समीकरण ही बदल दिए।

दूसरी वजह है- पिछले MP विधानसभा चुनाव का सबक। तब BJP का नारा था– माफ करो महाराज, हमारा नेता शिवराज..। पर यह चला नहीं और सरकार गंवा बैठे। विश्लेषण में सामने आया कि पार्टी ने अपनी लाइन लंबी करने के बजाय विरोधियों पर ज्यादा फोकस कर दिया था। दोनों वजहों को मिलाकर यह लगभग तय हो गया कि MP में ‘हार्डकोर हीरो’ की तरह कैंपेन चलाया जाए तो सत्ता पाने की राह मुश्किल नहीं।

मामा के बुलडोजर के उदाहरण

  • श्योपुर में नाबालिग बच्ची से बलात्कार के आरोपी मोहसिन, रियाज और शाहबाज के घर ढहा दिए गए।
  • सिवनी में कॉलेज छात्रा के साथ रेप के आरोपी हरिराम वर्मा, राहुल वर्मा, विकास सिंह, निरपत वर्मा, वीरेन्द्र वर्मा के घर पर बुलडोजर चलाया।
  • रायसेन में सांप्रदायिक हिंसा के बाद गोली लगने से एक शख्स की मौत हुई, 30 से ज्यादा घायल हुए। यहां भी आरोपियों के घर ढहा दिए गए।
  • पोस्टर लगने के अगले दिन शहडोल में सामूहिक बलात्कार के आरोपी अब्दुल शादाब के घर पर बुलडोजर चला।
  • जावरा में अपहरण के आरोपी भूरू, जहरउद्दीन और उमर खां के निर्माण को तोड़ा गया। इससे पहले रतलाम में ड्रग माफिया लाला पठान का अवैध मार्केट तोड़ा गया।

होर्डिंग लगते ही चुनावी स्ट्रैटजी जाहिर

इन सब घटनाओं के बाद हाल ही में भोपाल में पार्टी विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक होर्डिंग लगवाया है। जिस पर लिखा- ‘बेटियों की सुरक्षा में जो भी बनेगा रोड़ा, मामा का बुलडोजर बनेगा हथौड़ा।’ जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है।

भोपाल में विधायक रामेश्वर ने शिवराज को 'बुलडोजर मामा' बताते हुए होर्डिंग लगवाए।
भोपाल में विधायक रामेश्वर ने शिवराज को 'बुलडोजर मामा' बताते हुए होर्डिंग लगवाए।

रायसेन की घटना पर बयान देते ही माहौल बना

मुख्यमंत्री 22 मार्च को रायसेन के उस खमरिया गांव में पहुंचे थे, जहां दो वर्ग भिड़ गए थे। यहां उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा- मामा का बुलडोजर चल निकला है। जब तक बदमाशों को दफन नहीं कर देगा, रुकेगा नहीं। जिन्होंने आदिवासियों पर हमला किया है, उनके घरों को खोदकर मैदान बना दिया जाए।

रायसेन के खमरिया गांव में सीएम शिवराज आदिवासी परिवार से मिलने पहुंचे थे।
रायसेन के खमरिया गांव में सीएम शिवराज आदिवासी परिवार से मिलने पहुंचे थे।

सियासी जानकारों के अनुसार प्रदेश में बीते दिनों तीन बड़ी कार्रवाई हुई है। जिसकी ब्रांडिंग भी खूब की जा रही है। सरकारी तंत्र के साथ-साथ संगठन के लोग भी इस कार्रवाई का प्रचार कर रहे हैं। इससे यही अनुमान लगाया जा सकता है कि हमेशा मुस्कुराते रहने वाले शिवराज सिंह चौहान की एक नई छवि गढ़ने की कोशिश हो रही है।

शिवराज के लिए इस ‘अवतार’ पर बढ़ना चैलेंजिंग रहेगा

राजनीतिक विश्लेषक एवं वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित कहते हैं कि शिवराज का मूल स्वभाव यह नहीं है। इसे शिवराज की छवि से जोड़कर नहीं, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रतीक के तौर पर देख सकते हैं। यूपी में इस एजेंडे से बीजेपी को बड़ा लाभ मिला है। वहां 80:20 के सियासी रंग को अब भाजपा मध्यप्रदेश में भी सरकार के सहारे और गहरा करने की कोशिश कर सकती है। दरअसल, 2018 में बीजेपी सत्ता से बाहर हो गई थी। साफ है कि पार्टी किसी नए एजेंडे को आगे बढ़ाएगी। अब देखना होगा कि शिवराज इस रास्ते पर कितना आगे तक बढ़ सकते हैं?

पूर्व में भी हुई कार्रवाई लेकिन, ब्रांडिंग पर नहीं दिया ध्यान

शिवराज इससे पहले भी सार्वजनिक मंचों से अपराधियों और भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति सख्त रुख अपनाते रहे हैं। कई बार उन्होंने मंचों से अपराधियों को गाड़ने की बात कही है। इसके साथ ही भ्रष्ट अधिकारियों को भी वे हड़काते रहे हैं। कई बार तो मंच से ही उन्हें निलंबित करने की घोषणा तक कर दी, लेकिन कभी इसकी ब्रांडिंग नहीं की। अब उत्तर प्रदेश में बीजेपी को मिली जीत के बाद शिवराज को भी प्रदेश में इसी रूप में प्रोजेक्ट करने की तैयारी की जा रही है।

युवाओं के बीच बुलडोजर बाबा का क्रेज

बीजेपी के एक बड़े नेता का कहना है कि जब से योगी आदित्यनाथ की वापसी हुई है, तब से बुलडोजर बाबा का क्रेज इतना ज्यादा बढ़ गया है कि लोग यूपी में चुनाव जीतने के बाद अपने हाथों पर बुलडोजर का टैटू बनवा रहे हैं, और साथ ही साथ बुलडोजर बाबा का नाम भी लिखवा रहे हैं। बीजेपी भविष्य में युवाओं को इसी तरह के टैटू लगाने का अभियान शुरू कर सकती है।

सुन ले रे अब्बास....

उत्तर प्रदेश में चुनावी सभा में शिवराज सिंह चौहान ने कहा था- सुन ले रे अब्बास! 10 मार्च को योगी जी का बुलडोजर तेरा हिसाब करेगा, ये माफिया बच नहीं पाएंगे। शिवराज ने भले ही ये बात यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान कही, लेकिन मध्यप्रदेश में भी आरोपियों के घर पर बुलडोजर कई महीनों से चल रहे हैं। शायद इसलिए ही यूपी में मुख्यमंत्री बुलडोजर बाबा हैं तो मध्यप्रदेश में बुलडोजर मामा।

महिलाओं से बलात्कार के मामले में तीसरे नंबर पर MP

साल 2020 में महिलाओं से बलात्कार के मामले में राजस्थान और यूपी के बाद 2339 मामलों के साथ मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर था, लेकिन सजा सिर्फ 33% मामलों में हुई। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में हर रोज 6 महिलाएं बलात्कार की शिकार हो रही हैं। राज्य में महिलाओं ने अलग-अलग अपराधों से जुड़े 25,640 मामले दर्ज कराए। बावजूद इसके कांग्रेस-बीजेपी के बीच कानूनी लड़ाई की वजह से आयोग को मिलने वाली महिलाओं की शिकायतें सुनने के लिए जनवरी 2019 के बाद महिला आयोग के सदस्यों की संयुक्त बैंच तक नहीं बैठी है। आयोग में औसतन हर साल 3000 शिकायतें आती हैं। आज की तारीख में 15,000 से ज्यादा अर्जियां लंबित हैं।

बाबूलाल गौर कहलाते थे 'बुलडोजर मंत्री'

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को बुलडोजर बाबा भी कहा जा रहा है। हालिया विधानसभा चुनाव में यह शब्द खूब पॉपुलर हुआ था। लेकिन असली बुलडोजर बाबा सीएम योगी नहीं हैं, बल्कि यह तमगा मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूबाल गौर (21 अगस्त 2019 को निधन हो गया) के साथ बहुत साल पहले जुड़ गया था। मध्य प्रदेश में 90 के दशक में सुंदरलाल पटवा सरकार में मंत्री रहते हुए बाबूलाल गौर ने प्रदेश में जमकर बुलडोजर चलवाया था। जिसके बाद उन्हें 'बुलडोजर मंत्री' भी कहा जाने लगा था। गौर मार्च 1990 से दिसम्बर 1992 तक मध्यप्रदेश शासन में मंत्री थे।

भोपाल में भारत टॉकीज और भोपाल टॉकीज पुराने शहर के सबसे व्यस्ततम चौराहे थे। वहां से कोई अतिक्रमण नहीं हटा सकता था। जब किसी भी तरह बात नहीं बनी तो मंत्री गौर ने खास योजना बनाई। उन्होंने बुलडोजर बुलवाया और अतिक्रमण स्थल पर खड़ा कर उसका इंजन चालू करा दिया। इसके बाद तो अतिक्रमण अपने आप हटने लगा। कुछ ऐसा ही वाकया बड़े तालाब के किनारे बनने वाली VIP रोड का है। बताया जाता है कि इस रोड को बनाने के दौरान वहां कई झुग्गियां थीं। इन झुग्गियों को हटाने के लिए बुलडोजर बुलाया गया।

पेन्सिलवेनिया के दो किसानों ने डिजाइन किया था बुलडोजर

पेन्सिलवेनिया के दो किसानों ने जब बुलडोजर डिजाइन किया था, तो उन्हें अंदाजा नहीं था कि एक दिन उनका यह अविष्कार अपराधियों का साम्राज्य कुचलने के लिए साथ सत्ता संग्राम का प्रमुख प्रतीक बन जाएगा। वैसे गौर करने वाली बात यह है कि दुनियाभर में बुलडोजर शब्द का प्रयोग धमकियों के लिए किया जाता है।

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