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MP में ब्लैक फंगस पर नई मुसीबत:रिएक्शन के बाद मरीजों का एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन लगवाने से इनकार; जबलपुर-सागर में रोक, इंदौर में अब टेबलेट

मध्यप्रदेश3 महीने पहले
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मध्यप्रदेश में ब्लैक फंगस की दोहरी मार मरीजों पर पड़ रही है। पहले से ही इंजेक्शन की कमी से जूझ रहे मरीजों के सामने एंफोटरइसिन बी के रिएक्शन से और मुसीबत बढ़ गई है। इंदौर, जबलपुर, सागर और भोपाल में इंजेक्शन देने के बाद कंपकंपी, बुखार और उल्टी के साइड इफेक्ट सामने आने के बाद मरीजों ने इंजेक्शन लगवाने से मना कर दिया है। मरीजों को जो इंजेक्शन गए हैं वे GBG121112 और 13 बैज नंबर के हैं। जबलपुर और सागर मेडिकल कॉलेज ने इंजेक्शन लौटाने की बात कही है। इंदौर में उन्हीं मरीजों को इंजेक्शन लगाया जा रहे है, जो अनुमति दे रहे हैं। बाकी मरीजों को टेबलेट दिए जा रहे हैं।

चार दिन पहले हिमाचल के बद्दी स्थित एफी फार्मा से 12 हजार 400 इंजेक्शन इंदौर लाए गए थे। इसमें से जबलपुर 1 हजार, सागर 450 और एक हजार इंजेक्शन भोपाल भेजे गए थे। शुक्रवार से रविवार के बीच चारों मेडिकल कॉलेज में ये इंजेक्शन दिए गए थे। इंजेक्शन देने के तुरंत बाद मरीजों में बेचैनी, उल्टी-दस्त, कंपकंपी और फीवर की शिकायत आने लगी।
आइए जाने एक्सपर्ट से आखिर क्यों आई यह दिक्कत-

पहले यह साइड इफेक्ट क्यों नहीं आए?
पहले मरीजों को लीपोसोमल एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन दिया जा रहा था। इसके साइड इफेक्ट नहीं हैं।

अब ये रिएक्शन क्यों हो रहे हैं?
सरकार ने चार दिन पहले प्लेन एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन अस्पतालों को उपलब्ध कराए हैं। इसके साइड इफेक्ट मरीज में दिखता है। किडनी पर भी असर डालता है। ये इंजेक्शन देने के बाद 30 से 70% मरीजों में तेज ठंड लगने का डर रहता है।

दोनों में अंतर क्या है?

रेट: लीपोसोमल एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन महंगा आता है। 3 से लेकर 7 हजार तक इसके दाम हैं। प्लेन एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन काफी सस्ते हैं। इंजेक्शन 3 से 700 के बीच मिल जाता है।

डोज: लीपोसोमल एंफोटरइसिन बी को टोटल डाेज कम समय में दिया जा सकता है। एक दिन में 250 MG तक दे सकते हैं। जबकि प्लेन एंफोटरइसिन बी को एक दिन में 50 MG ही दे सकते हैं। इससे डोज देने में समय लगाता हैै।

एंटीफंगल: लीपोसोमल एंफोटरइसिन बी की एंटीफंगल एक्टिविटी ज्यादा अच्छी है, जबकि प्लेन एंफोटरइसिन बी की कम है। इससे मरीज ज्यादा समय तक भर्ती रहते हैं।

इसका विकल्प क्या है?

सरकार फिर से लीपोसोमल एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन अस्पतालों को दे।

800 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं
प्रदेशभर में 800 से ज्यादा मरीज ब्लैक फंगस के अस्पतालों में भर्ती हैं। अकेले इंदौर के महाराजा यशवंतराव (एमवाय) अस्पताल में 350 और प्राइवेट में 170 मरीज हैं। पहले से ही ब्लैक फंगस के इंजेक्शन की मारामारी मची हुई है।

हिमाचल प्रदेश से आए एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन से भरे बॉक्स।
हिमाचल प्रदेश से आए एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन से भरे बॉक्स।

300 में MP को मिला था इंजेक्शन
7 हजार रुपए कीमत के ब्लैक फंगस के इस इंजेक्शन को हिमाचल के बद्दी में एफी फार्मा ने 300 रुपए की कीमत में मध्यप्रदेश को दिए गए थे। हिमाचल से 24 हजार इंजेक्शन की डील की गई थी। इसकी पहली खेप में 12 हजार 400 इंजेक्शन मिले हैं। 7 हजार इंजेक्शन प्राइवेट अस्पतालों में और 5 हजार सरकारी अस्पतालों में वितरित किए गए हैं।

जबलपुर में 60 का उपयोग हुआ, शेष स्टोर में रखवाए
जबलपुर में ब्लैक फंगस की एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन के 1000 हजार वाॅयल आए थे। इसमें से 60 का उपयोग रविवार छह जून को किया गया था। 940 इंजेक्शन को वापस दवा स्टोर में रखवा दिया गया है। मेडिकल काॅलेज के डीन डॉक्टर प्रदीप कसार और अधीक्षक डॉक्टर राजेश तिवारी ने बताया कि अभी इस इंजेक्शन के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है। सरकार को अवगत करा दिया गया है। ये सभी इंजेक्शन वापस लौटेंगे। जबलपुर में 50 लोगों में रिएक्शन हुआ था।

450 लीपोसोमल इंजेक्शन नए मिले
मेडिकल कॉलेज में ईएनटी विभाग की HOD डाॅक्टर कविता सचदेवा ने बताया कि 450 लीपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी के इंजेक्शन मिल गए हैं। पहले भी यही इंजेक्शन लग रहा था। अभी 126 मरीजों काे तीन-तीन इंजेक्शन दिए गए हैं। शासन स्तर पर और इंजेक्शन मिलने का आश्वासन मिला है। अभी सभी मरीज ठीक हैं। हालांकि वे थोड़ा डरे हुए हैं, लेकिन उन्हें यथास्थित बता दिया गया है।

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भोपाल में 8 मरीजों में दिखा इफेक्ट
भोपाल के हमीदिया अस्पताल में भी शनिवार को 8 मरीजों में एंफोटरइसिन बी इंजेक्शन के हल्के साइड इफेक्ट सामने आए थे। जिनको एंटी एलर्जी दवा दी गई। इस मामले में गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. जितेन शुक्ला का कहना है कि हमें 1 हजार इंजेक्शन कॉरपोरेशन से मिले थे। जिनका उपयोग किया जा रहा है। ईएनटी विभाग से कोई मेजर साइड इफेक्ट के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

दुष्प्रभाव देखने को मिला है
इंजेक्शन लगाने के बाद इस तरह के दुष्प्रभाव 30 से 40% मरीजों में देखने में आए हैं। इसी वजह से इंजेक्शन को धीरे-धीरे दिया जाता है। जो दुष्प्रभाव सामने आए हैं वे पूरी तरह से ज्ञात है। दो से तीन डोज के बाद इस तरह का दुष्प्रभाव सामने आते हैं।
डॉ. वीपी पांडे, एमवाय अस्पताल के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष

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