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जानिए... बीमारी के महामारी घोषित होने का मतलब:ब्लैक फंगस के केस, मौत, इलाज और दवाओं का रिकार्ड रखा जाएगा; बीमारी की प्रभावी तरीके से मॉनिटरिंग होगी

मध्यप्रदेश5 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा
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राजस्थान, गुजरात, हरियाणा और तेलंगाना के बाद अब मध्यप्रदेश में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) को महामारी घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य आयुक्त आकाश त्रिपाठी ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश में इस बीमारी से 600 से ज्यादा संक्रमित मिलने और 30 से ज्यादा मरीजों की मौत के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कहा था कि ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया जा रहा है।

राज्य किसी बीमारी को महामारी घोषित कर देते हैं, तो इससे संबंधित केस, इलाज, दवा और बीमारी से होने वाली मौत का रिकार्ड रखना होता है। इसके अलावा सभी मामलों की रिपोर्ट चीफ मेडिकल ऑफिसर को दी जाती है। मध्यप्रदेश में अब कोरोना की तरह अब ब्लैक फंगस का पूरा रिकार्ड जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रखेंगे। इसके साथ ही इस बीमारी की प्रभारी तरीके से मॉनिटरिंग होगी।

केंद्र ने सभी राज्यों को ब्लैक फंगस बीमारी को महामारी एक्ट 1897 के तहत नोटेबल डिजीज घोषित करने को कहा है। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने 19 अप्रैल को राज्‍यों को लिखे पत्र में कहा था है कि सभी सरकारी, प्राइवेट अस्‍पतालों और मेडिकल कॉलेजों को ब्‍लैक फंगस की स्‍क्रीनिंग, डायग्‍नोसिस और मैनेजमेंट के गाइडलाइंस का पालन करना होगा। राज्यों को ब्लैक फंगस के केस, मौत, इलाज और दवाओं का हिसाब रखना होगा।

मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस बीमारी महामारी घोषित किए जाने का आदेश
मध्य प्रदेश में ब्लैक फंगस बीमारी महामारी घोषित किए जाने का आदेश

ICMR व स्थास्थ्य मंत्रालय की गाइड लाइन का पालन करना होगा

ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर की ओर से जारी गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। इसके अनुसार ही इस संक्रमण की जांच की जाएगी। सभी मामलों की रिपोर्ट जिला स्तर के सीएमएचओ को की जाएगी। केंद्र ने कहा है कि इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम के सर्विलांस सिस्टम में भी इसकी जानकारी देना अनिवार्य है।

क्या होंगे बदलाव

जब किसी बीमारी को महामारी घोषित किया जाता है तो इसका मतलब होता है कि यह बीमारी पूरे विश्व के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। स्वास्थ्य महकमे को इससे सम्बन्धित पूरी तैयारियां करनी पड़ती हैं और इसके प्रति सचेत होना पड़ता है। महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत ब्लैक फंगस को भी महामारी घोषित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को कहा था।

दंडित करने का प्रावधान

खतरनाक बीमारियों के फैलने पर अंकुश लगाना एवं स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाना इस कानून के तहत अनिवार्य है। महामारी घोषित होने के बाद महामारी ऐक्ट के नियमों का पालन करना होता है। राज्यों द्वारा निर्धारित नियमों को न मानने पर इस एक्ट के तहत दंडित किए जाने का भी प्रावधान है। कोरोना महामारी घोषित होने के बाद होम आइसोलेट मरीजों के सार्वजनिक स्थानों पर जाने पर जुर्माने का प्रावधान लागू किया जा चुका है।

प्रशासन की यह जिम्मेदारी

महामारी एक्ट के तहत संक्रमित व्यक्ति को अस्पताल या अस्थाई आवास में रखवाने का प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। महामारी ऐक्ट अधिनियम के निर्देश की अवहेलना को अपराध की श्रेणी में माना जाएगा और भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत व्यक्ति पर कार्रवाई की जाएगी। यह नियम सरकारी और प्राइवेट अस्पातलों पर भी लागू होगा।

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कब घाेषित होती है महामारी

ब्लैक फंगस से पहले कोरोना संक्रमण को महामारी घोषित किया गया था। लेकिन इससे भी चेचक, हैजा, प्लैग जैसी बीमारियां महामारी के रूप में घोषित की जा चुकी हैं। जब कोई बीमारी लोगों के बीच एक-दूसरे को संक्रमित करती है, साथ ही उस बीमारी से होने वाली मौत, इंफेक्शन या उससे प्रभावित देशों की संख्या के आधार पर उसे महामारी घोषित कर दिया जाता है।

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मप्र में बीमारी का इलाज मुफ्त

मध्यप्रदेश में ब्लैक फंगस बीमारी का इलाज सरकार ने मुफ्त कर दिया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और रीवा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में मरीजों को फ्री इलाज किया जा रहा है। लेकिन इंजेक्शन की कमी बनी हुई है। जबलपुर में केस व्हाइट फंगस के मिले हैं, यह दवाओं से ठीक हो जाएगा।

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