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3 दिन तक बुखार नहीं तो 7 दिन में निगेटिव!:केंद्र सरकार ने बदली कोरोना गाइडलाइन; MP सरकार ने जारी किया अलर्ट

मध्यप्रदेश5 महीने पहले

अगर आप कोरोना पॉजिटिव हैं। माइल्ड केस के साथ होम आइसोलेशन में हैं। लगातार 3 दिनों तक बुखार भी नहीं आया है, तो 7 दिन में खुद को कोरोना निगेटिव मान लीजिए, क्योंकि केंद्र सरकार ने कोरोना की गाइडलाइन में बदलाव किया है। अब तक 10 दिन में निगेटिव की गाइडलाइन थी। इस प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा था। नई गाइडलाइन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने भी लोगों को नए प्रोटोकॉल के बारे में बताया है। साथ ही, प्रदेश में बढ़ रहे कोरोना को लेकर अलर्ट भी किया है।

जानिए, नया कोरोना प्रोटोकॉल

  • कोरोना पॉजिटिव के बाद लक्षण नहीं तो होम आइसोलेशन में रहना है।
  • होम आइसोलेशन में भी परिवार वालों से अलग कमरे में रहना है।
  • ट्रिपल लेयर मास्क लगाना है। परिवार के सदस्यों को भी मास्क लगाना है।
  • 7 दिन में अगर 3 दिनों तक लगातार फीवर नहीं हो रहा है, तो घबराना नहीं है।
  • 7 दिन में खुद को निगेटिव मानकर आप सामान्य हो सकते हैं।
  • 7 दिन बाद कोई टेस्ट कराने की जरूरत भी नहीं है।
  • दूसरों के साथ चीजें शेयर नहीं करें।

अगर 60 वर्ष से अधिक है उम्र तो रहें सावधान

  • अगर उम्र 60 वर्ष से अधिक है और कोई बीमारी है, तो सावधान रहें।
  • कोई लक्षण है तो ऑक्सीजन लेवल जांचते रहें।
  • ऑक्सीजन का लेवल गिरता है, ताे डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
  • टेली मेडिसिन की व्यवस्था की मदद ले सकते हैं।

कब गंभीरता से लेना है

  • लगातार 100 डिग्री से ज्यादा फीवर रहता है।
  • सांस लेने में दिक्कत आ रही हो
  • सीने में लगातार दर्द और दबाव महसूस करना
  • दिमागी तौर पर कन्फ्यूजन बना रहना
  • लगातार थकान और मांसपेशियों में दर्द रहना

3 से 5 दिनों में निगेटिव हो रहे संक्रमित
मध्यप्रदेश में हालात फिर बिगड़ रहे हैं। इस मामले में भोपाल में जीएमसी के टीबी एंड चेस्ट विभाग के प्रोफेसर डॉ. लोकेंद्र दवे ने बताया कि वर्तमान में मरीजों की हालत तो स्टेबल है। जल्दी ठीक भी हो रहे हैं। चूंकि अधिकांश लोग वैक्सीनेटेड हैं, उनमें हर्ड इम्युनिटी भी डेवलप हो चुकी है। संक्रमित होने के बाद लोग जल्दी ठीक भी हो रहे हैं। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने गाइडलाइन जारी की है। इसके बावजूद लापरवाही नहीं बरतनी है। अलर्ट रहने की जरूरत है। कोई भी परेशानी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचें। वर्तमान में करीब 9 से 10% लोगों को ही अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ रही है।

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