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  • Chambal's Water Level Is 4 Meters And Sindh Is Flowing Up One Foot, People Returning As Soon As The Water Recedes Fear That The Floods May Not Cause Havoc Again.

चंबल और सिंध किनारे के गांवों में हाईअलर्ट:चंबल का जलस्तर 4 मीटर और सिंध डेढ़ फीट खतरे के निशान से ऊपर बह रही, सहायक नदियों के उफान पर आने से प्रशासन ने हाईअलर्ट किया

भिंड4 महीने पहले
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सिंध नदी का मेंहदा घाटा का पुल। - Dainik Bhaskar
सिंध नदी का मेंहदा घाटा का पुल।

सिंध और चंबल नदी का रौद्र रूप अभी शांत नहीं हो रहा है। चंबल अभी भी खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर बनी हुई है। इधर, सिंध ने भारी तबाही मचाने के बाद पानी स्थिर है। सिंध का जलस्तर खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बना हुआ है।

पिछले चार दिन से सिंध पूरी बेग के साथ उफान पर है। इस बाढ़ के कारण सिंध किनारे के दो दर्जन से ज्यादा गांव पूरी तरह तबाह हो चुके है। इन गांव वासिसों को घर गृहस्थी का सामना छोड़कर गांव से पलायन करना पड़ा था। सीधे नदी का सामान्य जलस्तर 6 मीटर माना जाता है। वहीं 10 मीटर पर आने पर रौद्र रूप धारक कर लेती है। परंतु इस बार सिंध नदी 19 मीटर तह पहुंच चुकी है। इस नदी के रौद्र बेग में कई पुल समां गए है। वहीं, पर्राचय, मेंहदा और अतरसूमा पुल में दरारें आ चुकी है। यह पुलों को नुकसान हुआ है। शनिवार की सुबह तक सिंध नदी का मेंहदा घाट पर जलस्तर 11.6 मीटर नापा गया है, जोकि खतरे के निशान से एक मीटर से ज्यादा बना हुआ है।

इधर, अटेर क्षेत्र में एक दर्जन गांव को अपने घेरे में लेकर बैठी चंबल नदी भी अब धीरे-धीरे कम हो रही है। यह नदी का जलस्तर 128.50 मीटर से ज्यादा हो चुका था। यह नदी अब तक 126 मीटर आकर रूक गई है। जबकि इस नदी का जलस्तर 122 मीटर होने पर खतरे के निशान से ऊपर होना माना जाता है।

घर लौट रहे गांव वालों को फिर पानी आने का डर

  • पिछले दो दिन से भिंड जिले का मौसम साफ है। सिंध नदी का पानी घट रहा है। डेढ़ दर्जन गांव से पानी उतर गया है। परंतु अभी भी पांच से छह गांव ऐसे है जिनमें पानी भरा हुआ है। जखमाैली, अतरसूमा समेत कई गांव भिंड जिले की सिंध नदी के अंतिम सीमा पर बसे हैं। यह सिंध के नीचले हिस्से में होने की वजह से बाढ़ की चपेट में है। जखमौली गांव में बाढ़ का पानी आने की अफवाह बनी हुई है। गांव के रहने वाले मनोज कुशवाह का कहना है कि डैम से पानी छोड़ने की सूचना मोबाइल वॉट्सऐप पर लोगों के पास आ रही है। इस वजह से लोग घबराए हुए है।

सब कुछ तबाह फिर भी कोई अफसर नहीं आया

  • नदी की बाढ़ में डूब चुके गांवों की हालत दयनीय हो चुकी है। यह गांव में लोगों के पास खाने के लिए अनाज और पहनने के लिए कपड़े के मौहताज हो रहे है। रौन क्षेत्र के ग्राम कुसमरिया, खैरा, निवसाई, रेंवजा, महायर जैसे गांव से लोग पलायन कर चुके थे। पानी आने पर यहां खाने पीने का इंतजाम नहीं है। प्रशासनिक अफसरों की चुस्त- दुरूस्त व्यवस्था पर सवालिया निशान लग रहे हैं। एक भी बार यहां गांव में अफसर, पानी उतरने के बाद पूछने नहीं पहुंचे।
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