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भोपाल:मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा- बच्चों और महिलाओं का कुपोषण दूर करने में आंगनवाड़ी केन्द्रों की भूमिका महत्वपूर्ण

भोपाल6 दिन पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
  • मुख्यमंत्री आज अस्पताल से वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश की आंगनवाड़ियों के संचालन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए है
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बच्चों और महिलाओं का कुपोषण दूर कर उन्हें स्वस्थ बनाए रखने में आंगनवाड़ी केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कोरोना वायरस (कोविड-19) के दौर में आंगनवाड़ियों महत्व और भी बढ़ गया है। दूसरे विभाग भी आंगनवाड़ी केन्द्रों को सक्षम बनाने में सहयोग करें। मुख्यमंत्री आज अस्पताल से वीडियो कान्फ्रेंस द्वारा प्रदेश की आंगनवाड़ियों के संचालन की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए है कि प्रदेश के अधिकारी और मंत्री भी जिलों में भ्रमण के दौरान आंगनवाड़ी केन्द्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं दुरस्त करने में सहयोग प्रदान करें। पोषण अभियान की कार्ययोजना बनाकर शत-प्रतिशत परिणाम प्राप्त किए जाएं। महिला और बाल विकास की योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को बेहतर बनाया जाए। जो कमियां दिखें उन्हें दूर किया जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी केन्द्रों पर विभिन्न व्यवस्थाएं करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बढ़ाए। एक अभियान और जन आंदोलन बनाकर कुपोषण का कलंक दूर करें। आगामी 15 अगस्त तक इसकी कार्ययोजना बनाई जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 की परिस्थितियों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अच्छा कार्य किया है, जिसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी के माध्यम से बच्चों को पोषण आहार देने का लक्ष्य पूर्ण करें। प्रदेश में शत-प्रतिशत आंगनवाड़ी केंद्र के भवन निर्माण का लक्ष्य है। अब प्रदेश में संचालित आंगनवाड़ी केन्द्र को अपने भवन मिलेंगे। सामुदायिक भवन अथवा अन्य रिक्त शासकीय भवन में इसकी व्यवस्था की जाए।

‘रेडी टू ईट’ पूरक पोषण आहार

मुख्यमंत्री निर्देश दिए कि कोविड-19 के संक्रमण काल में 53 हजार 668 स्व-सहायता समूहों द्वारा तीन वर्ष से छह वर्ष की आयु के सभी बच्चों को ‘रेडी टू ईट’ पूरक पोषण आहार प्रदाय करने का कार्य सुचारू रूप से संचालित हो। लोकल फॉर वोकल के क्रियान्वयन के तहत इसकी व्यवस्था की गई है। इसी प्रावधान के अनुसार सभी पात्र हितग्राहियों को प्रत्येक 15 दिवस के अंतराल से टेक होम राशन प्रदाय की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गंभीरता से अपना दायित्व पूरा करें। उन्होंने कहा कि बच्चों का वजन लेकर उनके पोषण स्तर की निगरानी और टीकाकरण भी नियत स्थानों पर छोटे-छोटे समूहों में किया जा रहा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लोगों के निवास जाकर कोरोना संक्रमण से बचाव का परामर्श भी प्रदान करें। कोरोना संक्रमण काल में पलायन कर मध्यप्रदेश में आए परिवारों के पात्र हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार प्रदाय की जानकारी भी उन्होंने प्राप्त की।

निरीक्षण के लिए होगा आईटी का उपयोग
उन्होंने कहा है कि महिला एवं बाल विकास विभाग त्रि-स्तरीय रणनीति तैयार कर कार्यों का संपादन सुनिश्चित करें। तत्काल किए जाने वाले कार्य, अल्पकालीन लक्ष्य और दीर्घकालीन लक्ष्य निर्धारित किए जाएं। तिमाही, छमाही और सालाना लक्ष्य बनाए जा सकते हैं। आंगनवाड़ी केन्द्रों के निरीक्षण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी आधारित पद्धति विकसित की जाए। इसे सिंगल सिटीजन डाटाबेस से भी जोड़ा जा सकता है। बेहतर मानीटरिंग सिस्टम होने से आंगनवाड़ी केन्द्रों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केन्द्रों की कमियाँ दूर कर उनकी उपयोगिता बढ़ाई जाए। केन्द्रों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए हैण्डपम्प स्थापना और पाईप लाइन से जल प्रदाय की संभावना का अध्ययन कर व्यवस्था की जाए। जिन केन्द्रों में किचन शेड और शौचालय नहीं है, वहाँ इनकी व्यवस्था के लिए प्रयास हों। उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को स्वच्छ भारत मिशन के तहत इन व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ये भी बताया गया

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को भी आंगनवाड़ी केन्द्रों के बेहतर संचालन के लिए सक्रिय रहने को कहा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के संदर्भ में आंगनवाड़ी केन्द्र के स्तर तक प्रायमरी पूर्व शिक्षा की व्यवस्था एक चुनौती है, जिसे स्कूल शिक्षा विभाग के साथ समन्वय कर अच्छे परिणाम प्राप्त करने के उद्देश्य से प्रयास किए जाएं। बैठक में बताया गया कि आंगनवाड़ी केन्द्रों की छह महत्वपूर्ण सेवाओं में पूरक पोषण आहार, पोषण एवं स्वास्थ्य शिक्षा, स्वास्थ्य जाँच, टीकाकरण, शाला पूर्व शिक्षा और संदर्भ सेवाएं शामिल हैं। केन्द्र के हितग्राहियों में छह माह से तीन वर्ष के बच्चे, तीन से छह वर्ष तक के बच्चे, 11 से 14 वर्ष की शालात्यागी किशोरी बालिकाएँ, गर्भवती माताएँ, धात्री माताएँ शामिल हैं। प्रदेश में 84 हजार 465 आंगनवाड़ी केन्द्र और 12 हजार 670 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र इस तरह कुल 97 हजार 135 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं। केन्द्र और राज्य सरकार के 50-50 प्रतिशत के अंश से संचालित इन केन्द्रों को 3409 सेक्टर में विभाजित किया गया है। प्रदेश के 313 विकासखण्डों में केन्द्र संचालित हैं।

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