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कांग्रेस की आदिवासी वोटबैंक सियासत:चार घंटे चली बैठक; जनजातीय नेताओं ने संगठन में मांगी जगह, कमलनाथ बोले- चिंतन कर निर्णय लेंगे

मध्य प्रदेश2 महीने पहले

मध्य प्रदेश में आदिवासी वोट बैंक को लेकर सियासत तेज है। कांग्रेस ने भोपाल में आदिवासी विधायकों व नेताओं की बैठक आयोजित की। करीब चार घंटे चली इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने विधायकों और आदिवासी बहुल जिलों से आए नेताओं की बात सुनी। अधिकांश नेताओं ने कहा कि इस समाज को संगठन में आबादी के अनुपात में संगठन में जगह दी जाए। इस पर कमलनाथ ने कहा कि आपकी मांग व सुझाव पर चिंतन कर जल्दी ही निर्णय लिया जाएगा।

कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी ने आदिवासियों को झूठ परोसकर खोखला कर दिया है। इनसे मुकाबला भोपाल में बैठकर नहीं हो सकता। इसके लिए मैदान में उतरना होगा। यह बैठक दो मायने में बिलकुल अलग रही। पहली बार किसी बैठक में भाषण नहीं हुए। केवल विधायक अशोक मर्सकोले ने मंच पर आकर बैठक की रूपरेखा की जानकारी दी। इसके बाद सीधे विधायकों से चर्चा शुरू हो गई।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी आदिवासी वर्ग को गुमराह करने में लगी है। वह आदिवासी युवाओं को भ्रमित कर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना चाहती है लेकिन आज का आदिवासी वर्ग उसके किसी बहकावे में आना आने वाला नही है। कांग्रेस हमेशा से आदिवासी वर्ग की हितैषी रही है और हमेशा रहेगी। बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया, पूर्व मंत्री बाला बच्चन सहित 29 में से 25 आदिवासी विधायक व 22 जिलों के पदाधिकारी मौजूद रहे।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि पहली बार कमलनाथ किसी बैठक में चार घंटे तक मौजूद रहे। उन्होंने हर नेता व कार्यकर्ता को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय दिया। इस दौरान विधायक डा. हीरालाल अलावा ने कहा कि पार्टी को आदिवासी इलाकों में फोकस करना चाहिए। इसके लिए माइक्रो मैनेजमेंट बनाना जरूरी है। इसी तरह अशोक शाह ने कहा कि बीजेपी आदिवासी समुदाय को किस तरह गुमराह कर रही है, यह बताने के िलए बड़ा अभियान चलाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संगठन में आदिवासियों को महत्वपूर्ण पद भी मिलना चाहिए।

सामान्य सीट पर भी आदिवासी को टिकट दिया जाए
बैठक में यह मांग भी की गई कि प्रदेश में कई समान्य सीटें ऐसी हैं, जहां आबादी के हिसाब से आदिवासी नेताओं को चुनाव मैदान में उतारना चाहिए। यहां यह समुदाय जीत-हार में बड़ा फैक्टर हैं। यहां बालाघाट, बरगी और सिलवानी विधानसभा सीट का उदाहरण भी दिया गया। डा. अशोक मर्सकोले ने कहा कि यदि इन तीनों सीटों पर आदिवासी नेताओं का नाम आगे बढ़ाया जाता तो इसका फायदा कांग्रेस को मिलता, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

35 सीटें ऐसी, जहां कांग्रेस कभी नहीं जीती
बैठक में यह भी कहा गया कि प्रदेश की 230 में से 35 सीटें ऐसी हैं, जहां काग्रेस कभी चुनाव नहीं जीती है। इन सीटों पर आदिवासी नेताओं को चुनाव लड़ने का मौका क्यों नहीं दिया गया? यह भी कहा गया कि 105 सीटें ऐसी हैं, जहां इस समाज की आबादी 15 से 40% तक है। इसको ध्यान में रखकर प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

मोदी और शाह दिखा चुके हैं ताकत
आदिवासियों को साधने की जुगत लगातार जारी है। हाल ही में हुआ कांग्रेस का आदिवासी सम्मेलन बीजेपी को अपनी ताकत बताने के लिए था, हालांकि उस दिन कांग्रेस कुछ कमाल नहीं दिखा पाई। सम्मेलन में प्रदेश भर से आदिवासियों को आमंत्रित किया था। इससे पहले 18 सितंबर को जबलपुर में शहीदी दिवस पर बीजेपी ने आयोजन रखा था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे। 2023 के लिए शाह के बाद मोदी के दौरे के जरिए आदिवासियों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई।

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