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MP में अपनी सरकार नहीं बचा सके कमलनाथ पहुंचे महाराष्ट्र:कांग्रेस ने सौंपा उद्धव सरकार बचाने का जिम्मा, जानिए वजह

मध्यप्रदेश3 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा

महाराष्ट्र की उद्धव सरकार को सियासी संकट से बचाने के लिए कांग्रेस ने सीनियर लीडर कमलनाथ को भेजा है। वे बुधवार सुबह भोपाल से मुंबई पहुंच गए। उन्हें पार्टी ने डैमेज कंट्रोल की जिम्मेदारी देने के साथ ऑब्जर्वर बनाया है। कमलनाथ की दोपहर 12 बजे उद्धव ठाकरे के साथ मीटिंग है। 1 घंटे बाद यानी दोपहर 1 बजे वह शरद पवार से भी मुलाकात करेंगे। सबके मन में यह सवाल है कि यह जिम्मा कमलनाथ को ही क्यों दिया गया? जबकि वे खुद ही इसी तरह के सियासी घटनाक्रम में मध्यप्रदेश में अपनी सरकार गंवा बैठे थे।

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पहली वजह गांधी परिवार का भरोसा

कांग्रेस में गांधी परिवार के सबसे भरोसेमंद मोतीलाल वोरा और अहमद पटेल के निधन के बाद पार्टी के पास ‘भरोसेमंद सियासी दूत’ के रूप में कमलनाथ ही बचे हैं। दरअसल, कई और भी कद्दावर नेता कांग्रेस में हैं लेकिन जी-23 के अस्तित्व में आने के बाद उनकी पकड़ जरूर कमजोर हो गई है। इसके अलावा कमलनाथ का गांधी परिवार से रिश्ता इंदिरा गांधी के जमाने से पारिवारिक है। इसीलिए उन्हें इंदिरा का तीसरा बेटा कहा जाता है।

महाअघाड़ी नेताओं से भी अच्छे संबंध

कमलनाथ के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सुप्रीमो शरद पवार, कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण और अशोक चव्हाण जैसे दिग्गज नेताओं से रिश्ते मजबूत हैं। महाराष्ट्र में कॉर्पोरेट सेक्टर में कमलनाथ की अच्छी पैठ मानी जाती है। इसके चलते शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे भी हमेशा संपर्क में रहे हैं। अब जबकि शिंदे के बगावती तेवर सामने हैं, ऐसे में कांग्रेस हाईकमान को कमलनाथ ही ‘भरोसेमंद’ और अनुभवी दिखाई दे रहे हैं।

कॉर्पोरेट संबंधों का मिलेगा फायदा

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कमलनाथ ने 40 साल तक केंद्र में राजनीति की है। उनके पास उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कमान रही है। ऐसे में महाराष्ट्र के कॉर्पोरेट सेक्टर में कमलनाथ की नेटवर्किंग अन्य नेताओं से कहीं ज्यादा है। इस तरह के सियासी संकट में कॉर्पोरेट सेक्टर की पर्दे के पीछे से भूमिका किसी से छुपी नहीं है। इस नजरिए से कमलनाथ, शरद पवार के साथ मिलकर सरकार बचा सकते हैं।

महाराष्ट्र से लगा हुआ है छिंदवाड़ा

महाराष्ट्र में MLC चुनाव के बाद से जिस तरह से सियासी घटनाक्रम बदले हैं, सरकार पर संकट देख कांग्रेस ने महाराष्ट्र के सभी विधायकों को मुंबई बुलाया है। कमलनाथ इन विधायकों के साथ संवाद करेंगे। चूंकि कमलनाथ का संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा, महाराष्ट्र की सीमा से लगा है, ऐसे में नागपुर और आसपास के जिलों के नेता हमेशा कमलनाथ के संपर्क में रहते हैं।

सियासी संकट में कमलनाथ को पहली बार नहीं भेजा..

ऐसा पहली बार नहीं है, जब गांधी परिवार ने कमलनाथ को अहम जिम्मेदारी सौंपी है। 2019 में कर्नाटक सरकार (कांग्रेस व जेडीएस की गठबंधन सरकार) को बचाने के लिए भी कमलनाथ को बंगलुरू भेजा गया था। मध्यप्रदेश में 2018 में जिस तरह से सिंधिया के साथ 22 कांग्रेसी विधायकों ने बगावत की थी। तब सिंधिया समर्थक विधायक भोपाल से बेंगलुरू शिफ्ट किए गए थे। ठीक उसी तरह महाराष्ट्र में भी ऐसे ही सीन बन रहे हैं। यहां एकनाथ शिंदे विधायकों को लेकर सूरत में कैंप किए हुए हैं। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि एमपी की तरह महाराष्ट्र में भी बीजेपी ने स्क्रिप्ट तैयार कर ली है।

राजस्थान सरकार बचाने की जिम्मेदारी भी मिली थी

मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद राजस्थान में सचिन पायलट की नाराजगी के चलते गहलोत सरकार के गिरने की नौबत आ गई थी। पायलट अपने समर्थक विधायकों को लेकर जयपुर से बाहर चले गए थे और राजस्थान में भी ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई थी। तब कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कमलनाथ को जिम्मेदारी सौंपी थी।

कमलनाथ के संबंध अंदर-बाहर दोनों जगह अच्छे

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कांग्रेस में कमलनाथ एक ऐसे नेता हैं, जिनके संबंध पार्टी के अंदर और बाहर सभी नेताओं से अच्छे हैं। गहलोत व पायलट के बीच तनाव को खत्म करने में कमलनाथ ने ही अहम भूमिका बनाई थी। कुछ महीने पहले जी-23 के नेताओं को मनाने की जिम्मेदारी भी कमलनाथ को दी गई थी। जिसमें वे सफल रहे।

महाराष्ट्र में उद्वव सरकार को गिराने के लिए बीजेपी वैसा ही ऑपरेशन चला रही है, जैसा दो साल पहले मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार का तख्तापलट कराने चलाया गया था। तब कमलनाथ सरकार गिरने की वजह ज्योतिरादित्य सिंधिया बने थे। ठीक उसी तरह शिवसेना के एकनाथ शिंदे उद्वव सरकार के लिए बड़ा संकट बन गए हैं।

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