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भोपाल में वैक्सीन ट्रायल पर सवाल:दिग्विजय बोले- सिर्फ गरीबों पर ही ट्रायल क्यों; मंत्री चौधरी ने कहा- मैं भी डॉक्टर हूं, टीका लगाने से मौत नहीं हुई

भोपाल2 वर्ष पहले
वैक्सीन ट्रायल के नाम पर गरीब बस्तियों से ही वॉलंटियर होने के कारण अब पूरी ट्रायल ही सवालों के घेरे में आ गई है। दिग्विजय ने ट्रायल के वॉलंटियर दीपक की मौत के बाद परिजन से भेंट की।
  • दिग्विजय का सवाल- पीपुल्स अस्पताल में कोवैक्सिन ट्रायल में सबसे ज्यादा गरीब बस्तियों से ही वॉलंटियर क्यों
  • सरकार ने कहा- मामले की जांच करेंगे, अधिकारियों की टीम बनाई, एक-एक वॉलंटियर से बातचीत कर रिपोर्ट बनाएं

राजधानी भोपाल में कोवैक्सिन ट्रायल पर सियासत शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर के गरीब बस्तियों में सबसे अधिक लोगों पर ट्रायल किए जाने की खबर का समर्थन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी इसको लेकर अब शिवराज सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कोवैक्सिन का ट्रायल टीका लगाने के बाद वॉलंटियर दीपक मरावी की 18 दिन पहले मौत हो गई थी। अब दिग्विजय ने उनके घर पहुंचकर परिजनों से बातचीत कर यह सवाल उठाए। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए कि कोरोना वॉलंटियर गरीब बस्तियों से ही क्यों है?

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हालांकि मौत मामले में अब स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी का कहना है कि कोवैक्सिन से किसी की मौत नहीं हो सकती है। मैं भी एक डॉक्टर हूं। मुझे पता है। हालांकि हर मौत दुखद है और इसकी जांच की जाएगी। इधर सरकार ने भी मामले की जांच कराए जाने की बात कही है। अधिकारी हर वॉलंटियर से खुद बातचीत कर पूरे मामले की जांच करेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह शनिवार सुबह टीला जमालपुरा स्थित दीपक के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों से बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें नहीं पता था कि दीपक पर ट्रायल किया गया है। दिग्विजय ने परिजनों से बात करने के बाद सवाल किया कि पीपुल्स अस्पताल में कोवैक्सिन ट्रायल किया गया। इसमें शुरुआती 6 दिन में महज 45 ही वॉलंटियर आए थे लेकिन फिर 1 महीने के अंदर ही 1700 से अधिक लोगों पर ट्रायल किया गया।

इसमें 95% भोपाल के ही लोग हैं। उसमें से भी अधिकांश पीपुल्स अस्पताल के आसपास वाली बस्तियों जैसे गरीब नगर, शिव नगर, टिंबर नगर समेत छह से अधिक बस्तियां है। यहां एक ही परिवार के कई लोगों को टीका लगा दिया गया। लोगों का आरोप है कि उन्हें पता ही नहीं कि उन पर ट्रायल किया जा रहा है। उन्हें कोरोना का टीका लगवाने के नाम पर अस्पताल ले जाया गया था।

टीका लगने के बाद जब उनकी तबीयत बिगड़ी, तो अस्पताल ने संपर्क तक नहीं किया। कुछ लोग अस्पताल गए, लेकिन उनका इलाज न करते हुए उन्हें प्राइवेट अस्पताल जाने की सलाह दी गई। इधर मंत्री चौधरी ने कहा कि मैं भी एक डॉक्टर हूँ। डॉक्टर होने के नाते मैं यह बात कह सकता हूं कि कोवैक्सिन के चलते मरावी की मौत नहीं हुई। क्योंकि वैक्सीन का प्रतिकूल प्रभाव होता तो वह 24 से 48 घंटे के बीच अपना असर दिखाता। खैर मौत जैसे भी हुई हो, हर मौत दुखदायी होती है। चिकित्सा शिक्षा विभाग इस मामले में जांच करेगा। सरकार मृतक दीपक मरावी के परिवार की आर्थिक मदद करेगी।

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