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  • Due To Shortage, Tosilizumab Injection Of 32 Thousand 500 Is Being Given For 55 Thousand, There Is No Possibility Of Stock Coming Before April 20.

इंदौर में रेमडेसिविर के साथ टोसिलिजुमैब भी ब्लैक में:कमी के कारण 32 हजार 500 का इंजेक्शन 55 हजार में मिल रहा, 20 अप्रैल से पहले स्टॉक आने की संभावना भी नहीं

इंदौर8 महीने पहले
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कोरोना मरीज के फेफड़ों में सूजन या जलन होने पर यह टोसिलिजुमैब इंजेक्शन लगाया जा रहा है। (सिंबॉलिक फोटो) - Dainik Bhaskar
कोरोना मरीज के फेफड़ों में सूजन या जलन होने पर यह टोसिलिजुमैब इंजेक्शन लगाया जा रहा है। (सिंबॉलिक फोटो)
  • रिपोर्टर ने मरीज का परिजन बनकर मांगा इंजेक्शन, बेचने वाले ने डॉक्टर का पर्चा मंगाया, चौराहे पर बुलाया, फिर पलटा

आपदा का यह दौर मुनाफाखोरों के लिए "सुअवसर' में बदल गया है। यही कारण है कि कोरोना के इलाज में रेमडेसिवर के साथ टोसिलिजुमैब नामक इंजेक्शन की भी कालाबाजारी चल रही है। साढ़े 32 हजार रुपए एमआरपी वाला यह इंजेक्शन "चाेरी-छिपे' 55-60 हजार रुपए में बेचा रहा है। इसका कारण है कि स्टॉकिस्ट के पास यह इंजेक्शन नहीं है। 20 अप्रैल से पहले इसके शहर में आने की संभावना भी नहीं है। हालांकि कई मरीजों को डॉक्टर यह इंजेक्शन लिख रहे हैं।

इसलिए मरीज ज्यादा कीमत देकर भी इसे खरीद रहे हैं। कोविड पॉजिटिव मरीजों का इलाज करने के लिए जरूरी रेमडेसिवर इंजेक्शन की मांग और आपूर्ति के हालात सभी को पता है, लेकिन एक और इंजेक्शन है जिसकी मांग बढ़ रही है लेकिन बाजार से यह लगभग गायब है। हां, ब्लैक मार्केट में यह अब भी 15 से 20 हजार रुपए अधिक कीमत पर उपलब्ध है।

दरअसल, कोविड संक्रमितों के इलाज में डॉक्टर इटोलीजुमैब, रेमडेसिवर, फेविपिराविर और टोसिलिजुमैब इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इनमें सबसे महंगा इंजेक्शन है टोसिलिजुमैब। इस इंजेक्शन का निर्माण स्विट्जरलैंड की रॉश कंपनी करती है। भारत में सिप्ला कंपनी इसकी वितरक है। आठ दिन से ज्यादा संक्रमित रहने वाले मरीजाें के लिए डॉक्टर यही इंजेक्शन लिख रहे हैं। अब आलम यह है कि मरीज डॉक्टरों के लिखे पर्चे लेकर यह इंजेक्शन 55 से 60 हजार रुपए तक में खरीद रहे हैं।

केस 1: जंजीरावाला चाैराहे पर बुलाकर 52 और 55 हजार में दो इंजेक्शन बेचे

लाठी के लिए इस पर्चे पर लिखा था टोसिलिजुमैब।
लाठी के लिए इस पर्चे पर लिखा था टोसिलिजुमैब।

अन्नपूर्णा क्षेत्र के यूनिक अस्पताल में भर्ती पुरुषोत्तम लाठी को डॉक्टरों ने 10 अप्रैल टोसिलिजुमैब इंजेक्शन लिखा। उनके परिजन दवा बाजार में इंजेक्शन की तलाश करते रहे, लेकिन कहीं नहीं मिला। इसी बीच किसी ने बताया कि खातीवाला टैंक के कृष्णा मेडिकल पर यह इंजेक्शन मिल जाएगा। वहां संपर्क करने पर बताया गया कि 55 हजार रुपए का एक इंजेक्शन मिलेगा।

पुरुषोत्तम के परिजन इतने रुपए देने काे तैयार हाे गए ताे मेडिकल संचालक ने कहा कि एक लड़का आपको जंजीरावाला चाैराहे पर आकर इंजेक्शन दे जाएगा। परिजनाें ने कहा कि उन्हें दाे इंजेक्शन चाहिए। इसके बाद वे जंजीरावाला चाैराहे पर पहुंचे ताे करीब घंटेभर बाद एक लड़का आया। उसने उन्हें 52 और 55 हजार रुपए में दो इंजेक्शन दे दिए।

केस 2: अरबिंदाे के मेडिकल स्टाेर पर 45 हजार बता दी कीमत

क्लर्क कॉलोनी निवासी उषा चौकसे कोविड पॉजिटिव थीं। डॉक्टरों ने उन्हें भी टोसिलिजुमैब इंजेक्शन लिखा। उनके परिजन ने अरबिंदाे अस्पताल के मेडिकल स्टाेर पर संपर्क किया तो वहां इसकी कीमत 45 हजार रुपए बताई। हालांकि चौकसे परिवार में एक सदस्य दवाओं का कारोबार करते हैं। इसलिए यह इंजेक्शन साढ़े 32 हजार रुपए में मिल गया। यह इंजेक्शन की एमआरपी है। चौकसे का कहना है कि अब उनके परिवार में और भी लोगों काे इसी इंजेक्शन की जरूरत है, लेकिन अब यह 55 हजार रुपए में भी कोई देने के लिए तैयार नहीं हो रहा है।

इतना जरूरी है यह इंजेक्शन: फेफड़ों में सूजन और जलन होने पर लगाते हैं
डॉ. वीपी पाण्डेय बताते हैं कि फेफड़ों में सूजन, जलन होने पर यही इंजेक्शन लगाया जा रहा है। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉ. सुमित शुक्ला का कहना है कि बहुत से मरीजों पर यह इंजेक्शन कारगर हुआ है। इसलिए छोटे अस्पतालों ने भी इसे लगाना शुरू कर दिया है। एक मरीज को इसके करीब दाे इंजेक्शन लगाना पड़ रहे हैं।
एप्पल अस्पताल के डॉ. एमके शर्मा बताते हैं कि काेराेना के आठ से 10 फीसदी मामलों में मरीजों को इन्फेलिमिट्री (जलन या फेफड़ों में सूजन) वाले लक्षण होते हैं। शुरुआत में कुछ डॉक्टरों ने ट्रॉयल के तौर पर इसका इस्तेमाल शुरू किया। मरीजों को फायदा हुआ तो इसे लेकर गाइडलाइन बनाई है। डॉ. शर्मा का कहना है कि उनके अस्पताल में 100 में से करीब 10 मरीजों को इसकी जरूरत पड़ रही है।

दो दिन तक लगातार टालता रहा दुकानदार, डॉक्टर का पर्चा भेजो और 15 मिनट बाद टॉवर चौराहे आकर इंजेक्शन ले जाओ
टोसिलिजुमैब की कालाबाजारी का पता लगाने के लिए डीबी स्टार ने स्टिंग ऑपरेशन किया। पुरुषोत्तम के परिजनों ने कृष्णा मेडिकल के पीयूष जग्यासी का मोबाइल नंबर 8839595001 दिया था। रिपोर्टर ने 11 अप्रैल को इस पर कॉल कर इंजेक्शन खरीदने की बात की। पीयूष ने कहा कि कल तक दो इंजेक्शन थे, जो उसने एक मरीज को दे दिए। और चाहिए तो चार बजे तक व्यवस्था करता हूं। चार बजे दोबारा बात की तो उसने फिर थोड़ी देर में बात करने के लिए कहा।
इसके बाद कॉल कर कहा कि दुकान पर आकर बात करो। इंतजाम हुआ तो दो इंजेक्शन मिल जाएंगे। कुछ देर बाद पीयूष ने पलटकर कॉल किया और बताया कि टोसिलिजुमैब के दो इंजेक्शन आए थे, लेकिन किसी और को देना पड़े। अब कल इंतजाम होगा। अगले दिन यानी 12 अप्रैल को रिपोर्टर ने पीयूष से फिर संपर्क किया। उसने कहा कि डॉक्टर का पर्चा भेजो और 15 मिनट बाद टॉवर चौराहा आकर इंजेक्शन ले जाओ। रिपोर्टर ने पहले ईएसआई अस्पताल का कम्प्यूटर प्रिंट वाला एक पर्चा वाट्स एप पर भेजा और खुद टॉवर चौराहा पहुंचा। उसने डॉक्टर के हाथ से लिखा पर्चा भेजने को कहा। इसके बाद उसे निजी अस्पताल के एक डॉक्टर का पर्चा भेजा गया। वह इंजेक्शन देने के लिए तैयार हो गया, लेकिन बाद में कहा कि इंजेक्शन किसी और को बेच दिया है। अब बाद में दे पाऊंगा।

सीधी बात: पीयूष जग्यासी, ब्लैक में इंजेक्शन बेचने वाला कृष्णा मेडिकल स्टोर

आप टोसिलिजुमैब इंजेक्शन ब्लैक में क्यों बेच रहे हैं?
मैं नहीं बेच रहा हूं यह इंजेक्शन।
दो दिन से मरीज का परिजन बनकर मैं ही आपसे बात कर रहा था?
अच्छा, अब समझ आया। मैं तो मरीजों की मदद कर रहा हूं।
लेकिन आप 32 हजार के इंजेक्शन के लिए 55 हजार रुपए तक ले रहे हैं?
मैंने किसी से रुपए नहीं लिए।
लेकिन मुझसे जो बात हुई, उसमें आपने खुद भी स्वीकार किया है कि आपने यूनिक अस्पताल में पुरुषोत्तम नाम के मरीज को दो इंजेक्शन दिए हैं?
हां तो, मैं अकेले थोड़े ले रहा हूं। बहुत लोग हैं, जो ऐसा कर रहे हैं। उन्हें भी पकड़ो।

हो सकता है स्टाफ ने गलती से 45 हजार कीमत बोल दी हो
टोसिलीजुमैब की जो कीमत है, वह सिस्टम में अपलोड रहती है। हम किसी से ज्यादा रुपए नहीं लेते। कई लोग इस इंजेक्शन के लिए आ रहे हैं। हो सकता है कि किसी लड़के ने गलती से इसकी कीमत 45 हजार रुपए बता दी हो। हम एमआरपी से ज्यादा रुपए किसी से नहीं ले रहे।
रघुदीप सिंह, इंचार्ज मेडिकल स्टोर अरबिंदो अस्पताल

जाे कंपनी देशभर में इसकी वितरक, उसका कहना-
10-12 दिन में आने लगेगा इस इंजेक्शन का स्टॉक

टोसिलिजुमैब की किल्लत है। मेरे स्टॉक में एक भी नहीं है। मांग बहुत है। मैंने कलेक्टर को पूरा डाटा दे दिया है। 10-12 दिन में इस इंजेक्शन का स्टॉक आना शुरू होगा। तब तक मैं कुछ भी नहीं कह सकता।
उमेश मूले, सिप्ला सीएंडएफ इंचार्ज

जिम्मेदार ने कहा- मेरे रिश्तेदारों को ही नहीं मिला इंजेक्शन
कोरोना के 70-80 फीसदी इन्फेक्शन वालों को टोसिलिजुमैब की जरूरत पड़ रही है। मेरे रिश्तेदार को ही इसकी जरूरत है, लेकिन मुझे ही नहीं मिल रहा। कोई कालाबाजारी कर रहा है तो कार्रवाई करेंगे।
डाॅ. भूरे सिंह सेतिया, सीएमएचओ

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