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MP में अप्रैल में 45 डिग्री तक चढ़ेगा पारा:एक्सपर्ट बोले- 50 साल में पहली बार सबसे ज्यादा गर्मी पड़ेगी; लगातार 10 दिन से ज्यादा चलेगी लू

मध्यप्रदेश10 महीने पहले

मध्यप्रदेश में गर्मी पांच दशक के रिकॉर्ड तोड़ देगी। मौसम विभाग का दावा है कि 50 साल के इतिहास में पहली बार इतनी गर्मी पड़ेगी। मौसम में यह बदलाव ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण हो रहा है। इससे दुनिया के साथ भारत का तापमान भी 1 डिग्री से ज्यादा बढ़ चुका है। मध्यप्रदेश में बारिश के बाद ठंड और गर्मी के मौसम में बदलाव के रूप में इसका असर देखने को मिल रहा है। यह बदलाव आने वाले समय में क्या असर दिखाएगा? आइए मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश से समझते हैं...

इस बार मार्च में कई जगह तापमान सामान्य से ज्यादा रहा। पिछले सालों तक मार्च में तापमान अधिकतम 41.6 डिग्री तक गया था। बुंदेलखंड और उज्जैन डिवीजन में इस साल यह 42 डिग्री तक चला गया था। 50 साल के इतिहास में पहली बार मार्च में इतनी गर्मी हुई है। इस मामले में आप भी अपनी राय दे सकते हैं...

ऐसी रहेंगी अप्रैल-मई की रातें

रात का न्यूनतम तापमान भोपाल और ग्वालियर सहित मध्य और उत्तरी हिस्सों में सामान्य रहने की संभावना है। इंदौर, नर्मदापुरम और जबलपुर सहित दक्षिणी हिस्सों में सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है, यानी यहां पर रातें गर्म रहेंगी।

ऐसे रहेंगे अप्रैल-मई के दिन

भोपाल, ग्वालियर, नर्मदापुरम और जबलपुर सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन का अधिकतम तापमान समान्य से अधिक रहेगा। लू के दिनों की संख्या पिछले सालों से ज्यादा रह सकती है। इंदौर में लू के दिन सामान्य से अधिक रहेंगे।

मौसम में बदलाव के कारण

प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान लगातार सामान्य से ज्यादा बना हुआ है। ला-नीना की परिस्थितियां लगातार सक्रिय हैं। मार्च के अंत तक इसे खत्म होना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अभी भी यह सक्रिय है। ऐसे में अप्रैल और मई में भी तापमान बढ़ेगा। हिंद महासागर में IOD सक्रिय नहीं है। इसके सक्रिय होने से ही बीच-बीच में ठंडर स्टोर्म आते थे, वे इस बार नहीं आएंगे।

मौसम पर क्या असर

अप्रैल और मई में बारिश की संभावना बहुत कम है। धूल भरी आंधियां चलती रहेंगी। हल्के बादल जरूर रहेंगे, लेकिन बारिश की बहुत ज्यादा संभावना नहीं है। अप्रैल में तापमान में सामान्य से 2 से 3 डिग्री से ज्यादा और कहीं-कहीं 4 से 5 डिग्री से ज्यादा बढ़ोतरी हो सकती है। इसी कारण गर्मी में हीट वेव और सीवियर हीट वेव के हालात बने रहेंगे।

फसल पर ऐसा असर

डेढ़ से दो डिग्री तापमान बढ़ने से गेहूं की पैदावार में प्रति हेक्टेयर 1 से 2 टन की कमी आ जाती है। चावल की खेती में प्रति हेक्टेयर 0.7 से 0.8 टन की कमी आ जाती है। यह असर देखने को मिलेगा। इससे निपटने के लिए मृदा संरक्षण, जल संरक्षण और अन्य तरह से प्रकृति को बचाने का प्रयास करने होंगे।

अप्रैल में 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा

प्रमुख शहरों की बात की जाए तो ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर, सागर, रीवा, नर्मदापुरम, भोपाल सभी शहरों और खासतौर पर भोपाल, रीवा, सागर और नर्मदापुरम में अप्रैल के अंत तक तापमान 45 डिग्री तक पहुंच सकता है। वहीं मई के अंत में तापमान 47 डिग्री तक जा सकता है। जबलपुर और इंदौर में भी इसी तरह की परिस्थितियां बनेंगी।

2013 से मौसम बदल रहा

2013 के बाद से ही मौसम में काफी बदलाव आया है। अधिकतम और न्यूनतम तापमान में काफी बदलाव देखे गए हैं। स्थानिक असमानता नर्मदा बेसिन में सामान्यत: बाढ़ का क्षेत्र रहता था, पिछले दो साल में ग्वालियर, चंबल और बुदंलेखंड में इस तरह की घटनाएं बढ़ी हैं। वैसे ही, ठंडर स्टोर्म और हीट वेव की बात करें, तो दक्षिणी क्षेत्र जैसे इंदौर, नर्मदापुरम और जबलपुर ज्यादा प्रभावित रहें, लेकिन दो साल में यह उज्जैन, ग्वालियर और सागर संभाग में ज्यादा रहा हैं। यहां पर तापमान 2 डिग्री से ज्यादा बढ़ गया है।

IPCC की रिपोर्ट में यह कहा

यह जलवायु परिवर्तन है। IPCC की रिपोर्ट में कहा गया है कि पृथ्वी का तापमान 0.9 से एक डिग्री बढ़ा है। भारत में भी यह स्थिति है। 2050 तक रियो समिट का लक्ष्य था कि तापमान 1.5 डिग्री से ज्यादा न बढ़ने दिया, लेकिन ऐसा होते नहीं दिख रहा। 2050 तक पृथ्वी का तापमान 2 डिग्री तक बढ़ सकता है। कई मायनों में कृषि हो या मानव विकास हो, समुद्र में रहने वाले जीव समेत सभी के लिए एक विपरीत स्थिति लाएगा। यह देखा भी जाएगा। बीते सालों के अध्ययन में पाया गया है।

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