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राज्यसभा चुनाव:मंत्री बनना चाहते हैं भाजपा के दोनों विधायक, पार्टी नेताओं से चल रहे थे नाराज

भोपाल2 वर्ष पहले
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  • वरिष्ठ भाजपा विधायकों से इतनी बड़ी गलती हो जाने कई सवाल खड़े कर रही हैं
  • भाजपा ने वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दो बार विधायकों से मॉकपोल कराया था

राज्यसभा चुनाव में भाजपा के दो मतों का नुकसान हुआ है। वो भी ऐसे दो विधायकों को जो चार-चार बार विधायक का चुनाव जीत चुके हैं। और राज्यसभा सहित राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी मतदान कर चुके हैं। ऐसे वरिष्ठ भाजपा विधायकों से इतनी बड़ी गलती हो जाने कई सवाल खड़े कर रही हैं। ऐसा तब हुआ है जब भाजपा ने दिल्ली से आए वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में दो बार विधायकों से मॉकपोल कराया था। 

शिवराज सिंह के मुख्यमंत्री बनते ही दोनों ने अपनी दावेदारी पेश की थी। लेकिन रेस से बाहर होने के बाद दोनों पार्टी से नाराज चल रहे थे। भाजपा को दो मतों का नुकसान होने पर विधायक संजय पाठक का कहना है कि एक विधायक को मतपत्र दिख नहीं रहा था इसलिए क्रास वोटिंग हो गई तो दूसरे से गलती से ऐसा हो गया। भाजपा विधायक संजय पाठक ने विधानसभा के बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए कहा की बुर्जुग विधायक अपने साथ मतदान करने के लिए एक सहयोगी लेकर गए थे। पीठासीन अधिकारी ने मतदान के समय सहायक को विधायक के साथ जाने नहीं दिया इसलिए उनका वोट निरस्त हो गया। वहीं पार्टी को दूसरे विधायक गोपीलाल जाटव विधायक ने बताया है कि ऐसा गलती से हुआ है। खास बात ये है कि जाटव सिंधिया के प्रभाव वाले गुना क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार एक विधायक ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। एक अन्य विधायक का सुमेर सिंह सोलंकी के पक्ष में वोट निरस्त हो गया है। गुना से भाजपा विधायक गोपीलाल जाटव ने क्रॉस वोटिंग की है। जबकि दूसरे भाजपा विधायक जुगल किशोर बागड़ी का वोट निरस्त हो गया है। इसके साथ ही कांग्रेस के एक विधायक का वोट भी निरस्त हुआ है। जुगल किशोर रैगांव विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। 

दरअसल, कमलनाथ सरकार के पतन के बाद प्रदेश में बनी शिवराज सरकार और ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश की राजनीति के समीकरण बदल गए हैं। सिंधिया समर्थक 22 विधायकों में करीब 11 विधायकों को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। बाकी बचे 11 विधायकों सहित निर्दलीय विधायकों को भी निगम मंडलों में एडजस्ट किया जाना है। ऐसी स्थिति में भाजपा विधायकों को अपने अस्तित्व पर खतरा नजर आ रहा है। 

मंत्रीमंडल के विस्तार से पहले कई भाजपा विधायक पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिल अपनी नाराजगी जता चुके हैं। राज्यसभा चुनाव की वजह से मंत्रीमंडल का विस्तार भी टाला जा रहा था। पार्टी नेततृत्व को इसी बात का डर था जो आज राज्यसभा चुनाव के दौरान हुआ। इससे पहले कमलनाथ सरकार के समय मानसून सत्र ने एक विधेयक पर कांग्रेस सरकार के पक्ष में मतदान किया था। 

पार्टी के कई वरिष्ठ नेता उपेक्षा से नाराज

ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेता नाराज है। इस बात का उल्लेख वे खुलकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सामने व्यक्त कर चुके हैं। गुरुवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा ने भी सिंधिया समर्थकों के कारण भाजपा के पुराने नेताओं पर चिंता जाहिर की थी। पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी के पुत्र समय आने पर निर्णय लेने की चेतावनी पार्टी को दे चुके हैं। वहीं पार्टी के वरिष्ठ दलित नेता डॉ. गौरीशंकर शेजवार मुख्यमंत्री के सामने कह चुके हैं कम से कम उनका धुंधला फोटो ही पोस्टरों पर लगवा दीजिए।

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