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भोपाल और इंदौर में पारा 40 पार:MP के 18 जिलों में लू का अलर्ट, अप्रैल के आखिरी में 44 डिग्री तक जा सकता है तापमान

भोपाल6 महीने पहले

मध्यप्रदेश में अब गर्मी दिन में ज्यादा सताने लगी है। खास बात ये है कि आने वाले दिनों में दिन का तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। हालत ये है कि तेज गर्मी से प्रदेश के कई हिस्सों में रेगिस्तान की तरह मृग मरीचिका का अहसास हो रहा है। भोपाल के अटल पथ पर लोगों को सड़क पर पानी भरे होने जैसा भ्रम हो रहा है। जबकि शहर में दिन का पारा 40 डिग्री पार जा चुका है।

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर समेत 18 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिक पीके साहा ने बताया कि 7 अप्रैल तक इसी तरह गर्मी बनी रहेगी। दिन में गर्म हवाएं चलने से लोगों की परेशानी बढ़ेगी। तीन दिन बाद थोड़ी राहत की उम्मीद की जा सकती है। अप्रैल के अंत तक प्रदेश भर में पारा 44 के पार पहुंच सकता है। मार्च में ही पारा 42 डिग्री को पार कर चुका था। आने वाले समय और गर्मी बढ़ेगी।

इन जिलों में लू का अलर्ट

सागर, भिंड, मुरैना, रीवा, सतना, सीधी, उमरिया, छिंदवाड़ा, जबलपुर, भोपाल, राजगढ़, धार, खंडवा, खरगोन, नर्मदापुरम, रतलाम, ग्वालियर, गुना और दतिया जिले में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। हालांकि रविवार रात आधे मध्यप्रदेश में पारा लुढ़का है, जबकि कुछ इलाकों में तापमान बढ़ा है। छिंदवाड़ा, मंडला, नरसिंहपुर, सागर, सिवनी, भोपाल, दतिया, गुना, ग्वालियर, खंडवा और खरगोन में पारा 1 से 3 डिग्री तक लुढ़क गया। इसी तरह रायसेन, पचमढ़ी, इंदौर, होशंगाबाद, दमोह, जबलपुर, खजुराहो, नौगांव, टीकमगढ़ और रीवा में तापमान चढ़ा है।

गर्म हवाओं का प्रभाव कम होगा

पीके साहा ने बताया कि सूखी गर्म हवाओं के कारण प्रदेश में ज्यादा गर्मी हो रही है। इसी कारण प्रदेश के अधिकांश इलाकों में लू भी चल रही है। तीन दिन बाद हीट वेव कुछ कमजोर हो जाएगी। इससे दिन और रात का पारा 2 से 3 डिग्री तक लुढ़क सकता है। इससे लू से राहत मिल सकती है। ला नीना के सक्रिय होने और IOD के प्रभावहीन रहने के कारण अभी नया सिस्टम नहीं बन रहा है। समुद्र की सतह गर्म होने के कारण गर्मी बढ़ रही है। यह स्थिति 7 अप्रैल तक इसी तरह बनी रहेगी।

इस कारण बनती है मृग मरीचिका

तेज धूप में सड़क पर पानी पड़े होने का भ्रम होना मृग मरीचिका है। ये सड़कों और सतह पर तब होती है, जब तापमान बढ़ने पर गरम हवा की लेयर बनने लगती हैं। सतह के पास गर्म हवाओं की परत होती हैं। यह विरल होती हैं, जबकि सतह से कुछ ऊंचाई पर ठंडी हवाएं भारी होती हैं। इसी से सूर्य का प्रकाश विभिन्न कोणों पर सघन माध्यम से विरल की ओर जाता है। यह अविलंब से हटता है। इससे विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 90 डिग्री के बराबर हो जाता है। इससे लोगों को कुछ दूरी पर पानी होने का भ्रम होता है।

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