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MP में 3 हाउसवाइफ बनेंगी मेयर:सागर, देवास, मुरैना में 6 गृहिणियों के बीच मुकाबला; समझिए पॉलिटिकल डेब्यू की पूरी कहानी...

मध्यप्रदेश5 महीने पहलेलेखक: राजेश शर्मा

रसोई का बजट बनाकर घर चलाने वाली महिलाएं अब शहर के विकास का खाका बनाएंगी। ऐसी 6 महिलाएं नगर सरकार की कमान संभालने के लिए महापौर बनने चुनाव मैदान में हैं। सागर और देवास में बीजेपी और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं गृहिणियों के बीच मुख्य मुकाबला है। जबकि मुरैना और खंडवा में दो महिलाएं घर से निकलकर शहर की प्रथम महिला बनने के लिए बीजेपी के टिकट पर भाग्य आजमा रही हैं। राजनीति में स्वयं को स्थापित करने की चुनौती इन महिलाओं के सामने है।

एमपी के 16 में से 8 नगर निगमों में महापौर पद के लिए कांग्रेस और बीजेपी से 16 महिलाएं किस्मत आजमा रही हैं। इसमें से छह ऐसी उम्मीदवार हैं, जिन्होंने राजनीति का पहाड़ा कभी नहीं पढ़ा और अब घर की दहलीज को पार कर सीधे चुनाव मैदान में उतर गई हैं। सभी राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से हैं, लेकिन इन्होंने अभी तक सिर्फ घर संभाला है। प्रदेश की चार नगर निगम में होने जा रहे महापौर प्रत्याशी के बारे में जानिए...

सागर में भाभी VS भाभी, दोनों सियासी परिवार से

सागर से अभिनेता मुकेश तिवारी की भाभी संगीता तिवारी बीजेपी से महापौर प्रत्‍याशी हैं। उनके पति सुशील तिवारी बीजेपी नेता हैं। वहीं, कांग्रेस ने सागर से बीजेपी विधायक शैलेंद्र जैन की भाभी निधि जैन को मैदान में उतारा है। अब सागर में भाभी VS भाभी के बीच मुकाबला होने जा रहा है। लिहाजा चुनाव रोचक होता दिखाई दे रहा है। सागर महापौर की सीट अनारक्षित महिला के लिए सुरक्षित की गई थी। निधि का प्रोफाइल देखें तो वे अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन परिषद की राष्ट्रीय संरक्षक हैं। वे भाजपा के पूर्व मंत्री जयंत मलैया की रिश्ते की बहन हैं। जबकि संगीता पूरी तरह से गृहिणी हैं। हालांकि पारिवारिक राजनैतिक माहौल का अनुभव भी उनके साथ है।

दोनों के पति विधायक का चुनाव लड़ कर जीत चुके

सागर से कांग्रेस उम्मीदवार निधि जैन और बीजेपी की टिकट से चुनाव मैदान में उतरी संगीता तिवारी ने भले ही पहली बार घर से सियासी कदम बाहर निकाला है, लेकिन दोनों राजनीति की थ्योरी पढ़ चुकी है। वजह है- दोनों के पति नेता हैं और विधायक का चुनाव लड़ चुके हैं। इसलिए चुनाव लड़ना दोनों के लिए ज्यादा कठिन नहीं है। इस चुनाव में यह सीट समान्य महिला के लिए आरक्षित हो गई है।

देवास में दो गृहिणियां आमने-सामने

देवास में कांग्रेस-बीजेपी ने गृहिणियों को महापौर उम्मीदवार बनाया है। दोनों ही पहली बार राजनीति की सीढ़ी चढ़ने के लिए चुनाव मैदान में हैं। भाजपा उम्मीदवार गीता अग्रवाल कहती हैं- अब बहू घर और मैं शहर को संभालूंगी। जबकि कांग्रेस उम्मीदवार विनोदिनी व्यास का कहना है कि अब घर की चार दिवारी से निकल कर देवास को स्वच्छता में नंबर वन बनाना है।

मुरैना में गृहिणी का मुकाबला राजनीति में सक्रिय महिला से

मुरैना से बीजेपी उम्मीदवार मीना जाटव का मुकाबला कांग्रेस की शारदा सोलंकी से है। शारदा राजनीति में सक्रिय हैं, लेकिन मीना पहली बार राजनीति में कदम रखते ही सीधे महापौर उम्मीदवार बन गईं। वे अब तक घर संभाल रही थीं। हालांकि एक आंगनबाड़ी उनकी देख रेख में चल रही है। उनका कहना है कि मेरा परिवार 25 साल से आरएसएस व बीजेपी से जुड़ा है। आंगनबाड़ी में काम किया है। अभी मैं सक्रिय राजनीति में नई हूं, लेकिन भरोसा है कि महापौर की कुर्सी को संभाल लूंगी। मेरी इच्छा तो पति को महापौर देखने की थी। मेरे पति ने तीन बार महापौर का टिकट मांगा, लेकिन नहीं मिला। इसलिए मैं चुनाव लड़ रही हूं।

खंडवा में गृहिणी ही जान सकती है ट्रैफिक-पानी की समस्या

कांग्रेस प्रत्याशी आशा मिश्रा का कहना है कि वे एक राजनीतिक परिवार से हैं। चाहे ससुराल पक्ष हो या मायका। वह गृहिणी जरूर हैं, लेकिन राजनीति के तौर-तरीके अच्छे से जानती हैं। परिवार की छोटी-छोटी जरूरतें पूरी करने वाली महिलाएं ही वर्तमान और भविष्य को ध्यान में रखकर प्लानिंग करती हैं। भाजपा ने खंडवा शहर को अलग दिशा में मोड़ दिया है। मैं खंडवा की दिशा और दशा दोनों में सुधार करना चाहती हूं। वरिष्ठजनों का मार्गदर्शन भी रहेगा।

मुझे गांव की सरकार चलाने का तजुर्बा है- अमृता यादव

भाजपा की महापौर प्रत्याशी अमृता यादव का कहना है कि मुझे गांव की सरकार चलाने का तजुर्बा है। वह अशोकनगर जिले में सरपंच रह चुकी हैं। ससुर के समय की राजनीति से लेकर वर्तमान राजनीति से अच्छी तरह वाकिफ हूं। पति भी नगर निगम में अध्यक्ष पद पर रह चुके हैं। सबके साथ मिलकर बेहतर काम करूंगी।

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