• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • If The Government Fulfills The Small Needs, Then The Big Players Can Come Out; Need To Raise Awareness

जूनियर बास्केटबॉल इंडियन कैप्टन के सक्सेस टिप्स:जिंदगी में छोटे-छोटे गोल सेट करिए, जैसे-जैसे पूरे होंगे मोटिवेशन मिलेगा; बड़ा गोल ऐसे ही हासिल होगा

मध्यप्रदेश6 महीने पहलेलेखक: आशीष रघुवंशी

भारत के जूनियर बास्केटबॉल टीम के कैप्टन हर्षवर्धन तोमर मध्यप्रदेश के गुना में टूर्नामेंट में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव से आने वाले हर्षवर्धन ने दैनिक भास्कर से कहा, जिंदगी में छोटे-छोटे गोल सेट करने चाहिए। ये छोटे-छोटे गोल जब पूरे होते हैं तो खिलाड़ी को मोटिवेशन मिलता है। इसी तरह फिर वह बड़े गोल की तरफ आगे बढ़ता है। उन्होंने अपने संघर्ष और बास्केटबॉल खिलाड़ी बनने की पूरी कहानी बताई ...

आपने बास्केटबॉल को ही कैरियर के रूप में क्यों चुना?
मैं तो फुटबॉल खेलना चाहता था। स्कूल में भी फुटबॉल ही खेलना शुरू किया था, लेकिन मेरी हाइट के कारण स्कूल के कोच ने समझाया कि बास्केटबॉल खेलना चाहिए। मेरी मां भी बास्केटबॉल खिलाड़ी रही हैं। उनका चयन भी भारतीय टीम में हो गया था। उन्हीं ने सबसे ज्यादा सपोर्ट किया। बस यहीं से बास्केटबॉल की तरफ रुझान बढ़ा और खेल शुरू किया। 2012 में बास्केटबॉल खेलना शुरू किया।

क्रिकेट जैसे खेलों की तुलना में बास्केटबॉल में कितनी संभावनाएं हैं?

यह बात सही है कि क्रिकेट प्लेयर्स को जितनी सुविधाएं मिलती हैं, जितने आर्थिक लाभ मिलते हैं, उतने बास्केटबॉल खिलाड़ियों को नहीं मिलते। फेडरेशन काफी कोशिश करती है, लेकिन अकेले फेडरेशन से कुछ नहीं होगा। सरकार को भी ध्यान देना होगा। लोगों को बास्केटबॉल के बारे में जागरूक कराना पड़ेगा। बहुत से लोग तो इस खेल के बारे में जानते ही नहीं हैं। सरकार को खिलाड़ियों को यह विश्वास दिलाना होगा कि इस खेल में भी कैरियर की अपार संभावनाएं हैं। अभी कई खिलाड़ी नेशनल तक खेलकर बास्केटबॉल खेलना छोड़ देते हैं।

छोटे शहरों में बास्केटबॉल को लेकर उतनी जागरूकता नहीं, इस कमी को आप किस तरह देखते हैं?
हमारे पास जमीनी स्तर पर सुविधाएं बहुत कम हैं। खेल विभाग को इस खेल को बढ़ावा देने के लिए कुछ अतिरिक्त सुविधाएं देनी चाहिए। सुविधाएं बढ़ेंगी तो खिलाड़ी अपने आप इस खेल को खेलने के लिए प्रोत्साहित होगा। भारत में काफी अच्छे खिलाड़ी हैं, उन्हें बस जरूरत है सपोर्ट की। थोड़ी सी सुविधाएं उन्हें मिल जाएं तो वह बहुत अच्छा कर सकते हैं। किसी के पास जूते नहीं हैं तो किसी के पास आने-जाने के लिए आर्थिक मदद नहीं है, जिस वजह से वह आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।

NBA की कोचिंग में क्या बुनियादी फर्क दिखता है?
बुनियादी फर्क यह है कि भारतीय कोच ऑफेंसिव खेल पर ज्यादा ध्यान देते हैं और उसी तरह से कोचिंग देते हैं, जबकि बाहर के कोच डिफेंसिव खेल और कंडिशनिंग पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इससे खिलाड़ी के खेल में ज्यादा निपुणता आती है। इसके अलावा सुबह के समय में व्यक्तिगत ट्रेनिंग होती है और शाम के समय में टीम की ट्रेनिंग होती है।

साथ ही NBA(नेशनल बास्केट बॉल एसोसिएशन) में आने के बाद विदेशी कोच से जो ट्रेनिंग मिली, उससे भी काफी फर्क देखने को मिला है। अब मेरा खेल बहुत एक्सपोसिव हो गया है, जो पहले नहीं था। साथ ही बॉडी के मूवमेंट में भी बदलाव देखने को मिला है, जिससे प्रदर्शन अच्छा हुआ है।

खबरें और भी हैं...