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सीधी की घटना / आदिवासी युवती की मौत, शव वाहन नहीं मिला तो भाई हाथ ठेले से 12 किमी. तक शव ले गया, सोन नदी में बहाया

तस्वीर सीधी जिले की है। यहां जिला अस्पताल में भर्ती एक आदिवासी महिला की मौत हो गई। उसके भाई ने अस्पताल प्रबंधन और नगर पालिका से शव वाहन की मांग की, लेकिन वाहन नहीं मिला। इसके बाद भाई के पास कफन खरीदने तक के पैसे नहीं थे। उसने एक हाथ ठेले का प्रबंध किया और ठेले को 12 किलोमीटर खींचकर सोन नदी के किनारे ले गया और शव को प्रवाहित कर दिया।
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  • जिला अस्पताल और नगर पालिका से शव वाहन मांगा, लेकिन दोनों जगह से वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया
  • भाई के पास कफन तक के लिए पैसा नहीं था, इसलिए कंबल से शव को ढंका और सोन नदी के किनारे ले गया
  • कमलनाथ ने कहा- घटना मावनता को शर्मसार करने वाली, सरकार की अंतिम संस्कार योजना कहां गई ?

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 03:30 PM IST

सीधी. सीधी के जिला अस्पताल में आदिवासी महिला की मौत के बाद शव वाहन तक नहीं दिया गया। न ही नगरपालिका की तरफ से दाह संस्कार की व्यवस्था की गई। ऐसे में महिला का भाई शव को हाथ ठेले में रखकर 12 किलोमीटर दूर सोन नदी ले गया और प्रवाहित कर दिया। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार को घेरा है।

कमलनाथ ने कहा कि महिला की मौत होने के बाद परिवार के पास पैसे नहीं होने थे। मजबूरी में शव को ठेले पर ले जाकर नदी में बहा दिया। शिवराज सरकार की अंतिम संस्कार योजना कहां गई? मानवता को शर्मशार करने वाली इस घटना के दोषियों पर तत्काल कार्रवाई हो। परिवार की हरसंभव मदद मिलनी चाहिए।

कमलनाथ का ट्वीट-

जानकारी के मुताबिक, कोल आदिवासी परिवार की बीमार युवती की उपचार के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई। लेकिन, शव को घर तक ले जाने के लिए जिला अस्पताल और नगर पालिका प्रशासन द्वारा शव वाहन नहीं उपलब्ध कराया गया। इतना ही नहीं, शव को कंधा देने के लिए चार लोग भी एकत्र नहीं हो पाए। ऐसे में महिला के भाई ने तीन पहिए के ठेले की जुगाड़ की और शव को घर ले जाने के बजाए करीब 12 किलोमीटर की दूर सोन नदी ले गया। यहां शव को नदी में बहा दिया गया। 

महिला का भाई शव को हाथ ठेले से सोन नदी के किनारे ले गया और वहां पर बहा दिया। 

मैंने सब जगह गुहार लगाई, किसी ने नहीं सुनी 
शहर के कोटहा मोहल्ला निवासी रामअवतार कोल ने बताया कि मेरी बहन राधा कोल का स्वास्थ्य खराब होने के कारण जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया था। वहां उपचार के दौरान रविवार को मौत हो गई। शव ले जाने के लिए वाहन की मांग की गई। कोई सुनने को तैयार नहीं था। बाद में वह ठेला लाकर शव को घर ले जाने की जगह सीधे सोन नदी पहुंचा दिया गया। इस परिवार के पास मृतिका के लिए कफन खरीदने तक के रुपए नहीं थे, जिससे शव को एक कंबल में ढंककर सोन नदी ले गए, वहीं दाह संस्कार करने के लिए भी बजट न होने से शव को सोन नदी में बहाया गया। 

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