संडे बिग स्टोरीअफ्रीका के जंगल जैसी घास, कूनो को बनाती है खास:जंगल के बीच की नदी है लाइफलाइन; MP-राजस्थान में बना नया टूरिज्म सर्किट

रोहित श्रीवास्तव/निकिता अग्रवाल (भोपाल/ श्योपुर)19 दिन पहले

कूनो पालपुर नेशनल पार्क। रविवार की सुबह एकदम शांत। अन्य जंगलों की तरह। वैसी हलचल बिल्कुल नहीं जैसी एक दिन पहले थी। हां, अफ्रीकी चीतों के कदम रखने के बाद कूनो की चर्चा देश-दुनिया में जरूर है। इसके साथ यहां टूरिज्म की बढ़ती संभावनाओं पर भी चर्चा होने लगी है। इसकी वजह भी है- श्योपुर जिले में विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की खूबसूरती के बीच कूनो में वे तमाम खासियत मौजूद हैं जो टूरिस्ट को यहां ले आती हैं। वन्यजीवन से भरपूर कूनो में घास के मैदान हैं, यह ठीक वैसे ही है, जैसे अफ्रीका के जंगलों में होते हैं।

इस अभयारण्य को अपना नाम देने वाली कूनो नदी जंगल के बीच से बहती है। यही इस जंगल की लाइफलाइन है। यह नेशनल पार्क आम पर्यटकों के लिए 15 अक्टूबर के बाद खुलेगा। चीतों के दीदार कब से होने लगेंगे, फिलहाल यह तय नहीं है। कूनो कहां है, कैसा है? यहां खास क्या है? आप कैसे पहुंच सकते हैं? चीते आने के बाद गूगल पर यही ज्यादा सर्च किया जा रहा है। आइए, हम आपको इस स्टोरी में कूनो की सैर कराते हैं...

नेशनल पार्क को दो हिस्सों में बांटती है कूनो नदी
कूनो पार्क को कूनो नदी दो हिस्सों में बांटती है। पार्क के कुछ ही किलोमीटर दूर से मालवा के मऊ से निकली चंबल नदी बहती है। यह श्योपुर जिले में पाली गांव से दाखिल होती है। श्योपुर जिला राजस्थान के कोटा, बारां, सवाई माधोपुर और करौली से जुड़ा है। कूनो-पालपुर नेशनल पार्क में पानी का मुख्य स्त्रोत कूनो नदी है। इसके अलावा जंगल में बना एक प्राकृतिक झरना कैरी-खो है। इस झरने के पानी से पार्क में बने तमाम तालाब और जलकुंड बिना पंप के भरे जाते हैं। यहां झरने से निकलने वाला पानी पाइपलाइन में नेचुरल ग्रेविटी से आता है। यह पाइप लाइन 18 किलोमीटर लंबी है।

पार्क के अंदर मंदिर भी दर्शनीय स्थल
कूनो-पालपुर नेशनल पार्क में देव खो, आमझिर, भंवर खो, मराठा खो, दौलतपुरा, देव कुंड, जैन मंदिर, नटनी खो, रणसिंह बाबा मंदिर और धोराट बाबा मंदिर दर्शनीय स्थल हैं। कूनो-पालपुर नेशनल पार्क में पर्यटकों के ठहरने के लिए कुछ घर बनवाए गए हैं। इनकी बुकिंग डीएफओ कूनो के जरिए होती है। इसके अलावा पर्यटक सीसीएफ लॉयन प्रोजेक्ट के माध्यम से भी गेस्ट हाउस बुक करा सकते हैं। मध्यप्रदेश के 3 और राजस्थान के दो जिलों से घिरे कूनो पालपुर नेशनल पार्क में चीतों के आने से दोनों राज्यों के बीच नया टूरिस्ट सर्किट डेवलप होगा, जो ग्वालियर से शुरू होकर जयपुर में खत्म होगा।

जानवर ही नहीं, किले भी देखने को मिलेंगे
पार्क के अंदर सिर्फ जानवर ही नहीं, किले भी देखने को मिलते हैं। पार्क के अंदर पालपुर किला है। इसे पालपुर की गढ़ी के नाम से भी जाना जाता है। इसे चंद्रवंशी राजा बाल बहादुर सिंह ने बनवाया था। यहां आमेट किला पूरी तरह से पेड़ और झाड़ियों से घिरा हुआ है। इतिहासकारों के मुताबिक यह किला चंद्रवंशी राजा बाल बहादुर सिंह के राज्य का प्रमुख हिस्सा था। किले की दीवारों पर 500 साल पुरानी वास्तुकला के नायाम उदाहरण पर्यटकों को देखने को मिलते हैं। करौली से शाही परिवार जब श्योपुर शिफ्ट हुआ, तब सबसे पहले मैटोनी में किला बनवाया गया था। इस किले की दीवारों और मेहराब पर दुर्लभ वास्तुकला देखने को मिलती है।

ग्राफिक्स: विशाल सोनी।

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